स्कूलों में ताले, आंगनबाड़ी केंद्र पर आने को मजबूर बच्चे

मासूमों को नहीं मिली गर्मी से छुट्टी

स्कूलों में ताले, आंगनबाड़ी केंद्र पर आने को मजबूर बच्चे

बच्चों को पोषाहार और दूध के लिए तेज गर्मी में आना पड़ रहा है।

कोटा। आसमान से बरसती आग और थपेड़े मारती 'लू' के बीच जब बड़े बच्चे घरों में कूलर-एसी की हवा में सुरक्षित हैं, शहर के आंगनबाड़ी केंद्रों के बाहर दोपहर में 3 से 6 साल के मासूम बच्चे पसीने से तरबतर, लाल चेहरों के साथ हांफते हुए नजर आते हैं। भीषण गर्मी के इस दौर में जहां स्कूलों में ग्रीष्मावकाश हो चुका है, वहीं इन नौनिहालों को सिर्फ पोषाहार और दूध के लिए इस जानलेवा धूप में बाहर निकलने पर मजबूर होना पड़ रहा है। ऐसे में इन मासूमों की ओर  किसी की निगाहे नहीं जा रही है। तेज धूप और लू के थपेड़ों के बीच प्रतिदिन सुबह केंद्रों पर पहुंचने वाले बालक तपती धूप में घर लौटते समय गर्मी से बेहाल दिखते हैं।

केंद्र पर बच्चे लेने अभिभावक दिनेश कुमार ने बताया कि मेरे बच्चे की उम्र करीब 4 साल है। इतनी गर्मी में उसको छोड़ने व लेने आना पड़ता हैं। साथ ही उन्होने कहा कि जब स्कूलों में पढ़ने वाले बड़े बच्चों को गर्मी से राहत देने के लिए अवकाश दिया जा सकता है इन बच्चों को क्यो नहीं दिया जा सकता हैं। वहीं केंद्र पर बच्चे को छोड़ने के लिए अभिभावक मनीष कुमार ने बताया कि गर्मी में केवल नाममात्र की संख्या के बच्चें आ रहे हैं।

6 वर्ष तक के आ रहे बच्चे  
आंगनबाड़ी केंद्रों पर छह वर्ष तक के बच्चे नियमित रूप से आंगनबाड़ी केंद्रों पर पहुंच रहे हैं। केंद्रों में उपस्थिति दर्ज होने के कारण बच्चों को पोषाहार और दूध वितरण के लिए तेज गर्मी में भी आना पड़ रहा है। वहीं केंद्र पर बच्चे लेने आये प्रदीप कुमार ने बताया कि केंद्र पर आने वाले बच्चों का समय परिवर्तन किया जाना चाहिए या अवकाश घोषित करना चाहिए। महिला एवं बाल विकास विभाग ने जिला कलक्टर को छुट्टियां देने के लिए हरी झंडी दे दी है।

भीषण गर्मी में केंद्र पर भेजने को मजबूर 
अभिभावकों का कहना है कि भीषण गर्मी में घर से बाहर निकालना उनके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। बढ़ते तापमान और हीटवेव के बीच छोटे बच्चों को लू का खतरा सबसे ज्यादा रहता है।

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बिजली गुल तो अन्य कोई व्यवस्था नहीं 
महिला बाल विकास के संचालित आंगनबाड़ी केंद्र पर देखा जाए तो हवा के लिए पंखे व पानी के लिए व्यवस्था कर रखी है। यदि लाइट गुल हो जाती है तो केंद्र पर बिजली की कोई अन्य व्यवस्था नहीं है। जिसके चलते भीषण गर्मी में नौनिहाल पसीने में भीग जाते हैं।

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इनका कहना 
हमने आंगनबाड़ी केंद्र की छुट्टियों के लिए कलक्टर को लोकल स्तर पर अधिकृत कर रखा हैं।
-वासुदेव मालावत,निदेशक आईसीडीएस विभाग

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आगंनबाड़ी केंद्र पर 3-6 से वर्ष तक के बच्चें आते है। जबकि सरकारी व निजी स्कूलों में अभी अवकाश है। वहीं आगामी दिनों में नौतपा चालू होने वाला हैं। हमारी ये ही मांग है कि बिना ज्ञापन देवे आंगनबाड़ी केंद्र पर अवकाश घोषित हो। वहीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका भी समय परिवर्तन होना चाहिए।
- शाहिदा खान, राज. आंगनबाड़ी महिला कर्मचारी एवं मजदूर संघ प्रदेश अध्यक्ष

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