कागजों में दफन 80 लाख की सोलर फैंसिंग और 50 लाख का इलैक्ट्रिक शवदाह गृह
पार्क के चारों ओर घना जंगल, पैंथर-भालू व हाइना का रहता है खतरा
अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में शाकाहारी वन्यजीवों व वन कर्मियों पर मंडराया मांसाहारी जानवरों के हमले का खतरा।
कोटा। अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क को मांसाहारी जानवरों के हमले से सुरक्षित बनाने के लिए 80 लाख की लागत से सौलर फेंसिंग का सुरक्षा कवच बनाया जाना था, जो एक साल बाद भी नहीं बन सका। जबकि, पार्क के चारों ओर घना जंगल है, जहां लेपर्ड, हाइना व भालुओं की मौजूदगी से शाकाहारी वन्यजीवों व रात्रि गश्त पर तैनात वन कर्मियों की जान पर संकट बना रहता है।वहीं, मृत जानवरों के खुले में अंतिम संस्कार से इंफेक्शन, बैक्टीरिया व संक्रमण का खतरा टालने को 50 लाख का इलेक्ट्रिक शवदाह गृह का निर्माण भी कागजों में दफन होकर रह गया।
दरअसल, मुख्यमंत्री बजट घोषणा 2025-26 के तहत अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में सेकंड फेस के विकास कार्यों के लिए 40 करोड़ के बजट की घोषणा की गई थी। जिसमें 80 लाख से पार्क की सम्पूर्ण दीवार पर सौलर फेंसिंग करवाने व 50 लाख से इलेक्ट्रिक शवदाह गृह के निर्माण के लिए वन्यजीव विभाग ने कुल 1.30 करोड़ का प्रस्ताव बनाकर उच्चाधिकारियों को भेजे थे, जो बजट के अभाव में स्वीकृत नहीं हुए।
5 हजार मीटर सुरक्षा दीवार पर लगनी थी फेंसिंग
वन्यजीव विभाग के उप वन संरक्षक अनुराग भटनागर ने बताया कि अभेड़ा बायोलॉजिकल की सुरक्षा दीवार 5 हजार रनिंग मीटर लंबी है। वर्तमान में यह दीवार 10 फीट ऊंची है, जिस पर करीब 4 फीट ऊंची सीलर फेंसिंग लगाई जाएगी, जो सौलर से कनेक्ट रहेगी और चार्ज होने के साथ उसमें निर्धारित मात्रा में विद्युत करंट प्रवाहित होता रहेगा। इससे बाहर का कोई भी वाइल्ड एनिमल खास तौर पर लेपर्ड दीवार फांद पार्क के अंदर नहीं आ सकेगा। जिससे शाकाहारी वन्यजीव व गश्त करते वनकर्मियों पर मांसाहारी जानवरों के हमले का खतरा टल सकेगा। इस सौलर फेंसिंग से पूरा बायोलॉजिकल पार्क कवर्ड रहेगा। इसमें करीब 80 लाख रुपए का खर्चा आएगा। इसके प्रस्ताव बनाकर उच्चाधिकारियों को भेज दिए हैं।
पिंजरे में घुसकर लेपर्ड कर चुका ब्लैकबक का शिकार
बायोलॉजिकल पार्क में वर्ष 2023 में 29 अप्रैल की रात लेपर्ड ने बाहर से बायोलॉजिकल पार्क की 10 फीट ऊंची दीवार फांद परिसर में कूद गया था और ब्लैक बक के एनक्लोजर में घुसकर हमला कर दिया। जिसमें ब्लैक बक के शावक की मौत हो गई। घटना के बाद से वनकर्मी रात्रि गश्त के दौरान खुद की सुरक्षा को लेकर चिंतित हो गए।
इलैक्ट्रिक शवदाह गृह बने तो टले बैक्टीरिया व संक्रमण का खतरा
बायोलॉजिकल पार्क में 50 लाख की लागत से इलेक्ट्रिक शवदाह गृह बनवाया जाना है। इससे मृत जानवरों के शव का सुगमता से डिस्पोजल हो सकेगा। अब तक शव का अंतिम संस्कार करने के लिए जलाया जाता है, जिससे लकड़ियों की खपत बढ़ती है और धुएं से हवा में प्रदूषण भी बढ़ता है। ऐसे में इलेक्ट्रिक शवदाह गृह बनने से लकड़ियों की खपत रुकेगी और वायुमंडल में प्रदूषण भी नहीं फैलेगा। इसके अलावा इंफेक्शन, बैक्टीरिया व संक्रमण का खतरा भी टलेगा। लेकिन विभाग की अनदेखी के कारण प्रस्ताव कागजों से बाहर नहीं निकल सके।
बायोलॉजिकल पार्क में 40 करोड़ की लागत से द्वितीय चरण के विकास कार्य करवाए जाने हैं। जिसमें 80 लाख की लागत से सोलर फेंसिंग और 50 लाख से इलेक्ट्रिक शवदाह गृह बनाना है। जिसके प्रस्ताव बनाकर उच्चाधिकारियों को भेजे गए हैं, जैसे ही बजट प्राप्त होगा वैसे ही कार्य शुरू करवा दिया जाएगा।
- अनुराग भटनागर, डीएफओ वन्यजीव विभाग कोटा

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