4 साल बाद भी अधूरा 40 करोड़ का मेटरनल एंड चाइल्ड हॉस्पिटल, जानें पूरा मामला

जून तक काम पूरा होने की जताई जा रही संभावना

4 साल बाद भी अधूरा 40 करोड़ का मेटरनल एंड चाइल्ड हॉस्पिटल, जानें पूरा मामला

मेडिकल कॉलेज परिसर में एक साल में बनना था 100 बेड का अस्पताल।

कोटा। कोटा मेडिकल कॉलेज परिसर में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से स्वीकृत हुआ 40 करोड़ का मेटरनल एंड चाइल्ड हॉस्पिटल 4 साल बाद भी बनकर तैयार नहीं हुआ। अभी भी कई तरह के कार्य अधूरे पड़े हैं। जबकि, हॉस्पिटल का निर्माण कार्य वर्ष 2023 में पूरा होना था। डेट लाइन निकल जाने के बाद भी हॉस्पिटल पूरी तरह से बनकर तैयार नहीं हुआ। जिसकी वजह से यहां गायनी चिकित्सा सुविधाएं शुरू नहीं हो सकी। जिससे मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है और जेकेलोन अस्पताल पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

2023 में बनकर तैयार करना था हॉस्पिटल
चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत करने के लिए मेडिकल कॉलेज परिसर में सरकार ने वर्ष 2021 में 100 बेड के मेटरनल एंड चाइल्ड हॉस्पिटल स्वीकृत किया था। जिसके निर्माण के लिए वर्ष 2022 में 40 करोड़ रुपए का बजट भी जारी कर दिया था और इसकी डेडलाइन वर्ष 2023 तय की गई थी। इसके बावजूद निर्माण एजेंसी एनएचएम ने कार्य समय पर पूरा नहीं किया। अब अधिकारियों द्वारा जून तक काम पूरा होने की संभावना जताई जा रही है।

जेकेलोन पर पड़ रहा भार
इस अस्पताल के शुरू नहीं होने का सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है। हाड़ौती क्षेत्र से आने वाली गायनी और प्रसूता महिलाओं के अधिकांश केस जेकेलोन अस्पताल ही जा रहे हैं। इससे वहां मरीजों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है और व्यवस्थाएं प्रभावित होती हैं।

हॉस्पिटल शुरू हो तो हाड़ौती के मरीजों को मिले लाभ
चिकित्सकों का मानना है कि यदि यह मेटरनल एंड चाइल्ड हॉस्पिटल समय पर बनकर शुरू हो जाए तो नए कोटा शहर सहित पूरे संभाग के मरीजों को बड़ी राहत मिल सकती है और जेकेलोन अस्पताल पर भार भी कम होगा। हालांकि, मेडिकल कॉलेज में भी गायनी वार्ड संचालित हैं।

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कोविड़ के कारण एक साल देरी से शुरू हुआ काम
कोर्डिनेटर डॉ. बीएल पाटीदार ने बताया कि वर्ष 2021 में स्वीकृति मिल गई थी लेकिन कोविड-19 के कारण काम शुरू नहीं हो सका। इसके बाद वर्ष 2022 में शुरू हुआ, जो 2023 में पूरा होना था। लेकिन निर्माण कार्य की गति धीमी रही। इस प्रोजेक्ट की कार्यकारी एजेंसी एनएचएम है।

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मार्च में होना था हैंडओवर, अब तक नहीं हुआ
चिकित्सकों ने बताया कि मेटरनल एंड चाइल्ड हॉस्पिटल मार्च में मेडिकल कॉलेज को हैंडओवर किया जाना था, लेकिन अप्रैल का पहला सप्ताह गुजरने के बाद भी यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। एनएचएम अधिकारियों द्वारा काम पूरा होने में 2 से 3 महीने और लगने की बात कही जा रही है।

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अस्पताल में मिलेंगी अत्याधुनिक सुविधाएं
मेटरनल एंड चाइल्ड हॉस्पिटल में 14 कॉटेज वार्ड बनाए गए हैं और पूरा परिसर एयर कंडीशनिंग से लैस होगा। यहां लेबर रूम एलडीआर कॉन्सेप्ट पर तैयार किया जा रहा है, जो आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होगा। इसके अलावा ऑपरेशन थिएटर, इमरजेंसी गेट, लाइब्रेरी और सेमिनार हॉल जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी।

225 बेड की मिलेगी सुविधा
कोर्डिनेटर डॉ. पाटीदार ने बताया कि वर्तमान में यह अस्पताल 100 बेड का है, लेकिन जरूरत पड़ने पर इसे 225 बेड तक विस्तारित किया जा सकता है। इधर, मरीजों का कहना है कि परियोजना में लगातार हो रही देरी का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। अब सभी की नजरें जून पर टिकी हैं कि आखिर कब यह अस्पताल शुरू होगा और कब राहत मिलेगी।

मेडिकल कॉलेज परिसर में 40 करोड़ की लागत से मेटरनल एंड चाइल्ड हॉस्पिटल का निर्माण कार्य चल रहा है। इसकी कार्यकारी एजेंसी एनएचएम है। इस हॉस्पिटल के शुरू होने से न केवल कोटा बल्कि होड़ौतीभर के मरीजों को लाभ मिलेगा।
-आशुतोष शर्मा, अधीक्षक मेडिकल कॉलेज अस्पताल

एनएचएम एक्सईएन ने न फोन उठाया न मैसेज का जवाब दिया
नवज्योति ने मेटरनल एंड चाइल्ड हॉस्पिटल का निर्माण कार्य में हो रही देरी के कारणों को लेकर बात करने के लिए एनएचएम एक्सईएन जुगल किशोर सांखला को फोन किया लेकिन उन्होंने अटैंड नहीं किया। इसके बाद उन्हें मैसेज किया लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया।

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