सांप पकड़ने वाले हाथों में अब किताबों की ताकत, कक्षा एक से करीब आठवीं तक नि:शुल्क पढ़ाई
अंग्रेजी व संस्कृत बोलकर चौंका रहे बच्चे
घुमंतु समाज के बच्चों की तकदीर गढ़ रहा छात्रावास।
कोटा। यदि आप शाम के समय महावीर नगर प्रथम स्थित श्री गोविंद गुरू घुमंतु छात्रावास के आसपास से गुजर रहे तो वहां पर शाम के समय पर होता हनुमान चालीसा का पाठ व भारत माता की जय के गूंजते जयकारों को सुनकर आप चौंकिए नहीं। ये कोई मंदिर नहीं हैं। यहां पर हाड़ौती भर के घुमंतु जातियों के बच्चों को कक्षा एक से लेकर करीब आठवीं तक नि:शुल्क पढ़ाया जाता हैं। वहीं छात्रावास में पढ़ाई के साथ बच्चों का सुबह से लेकर शाम तक का व्यवस्थित शेड्यूल बना हुआ। जिसका वे पालन करत हैं।
छात्रावास के कोषाध्यक्ष संतोष यादव ने बताया कि छात्रावास में हाड़ौती की विभिन्न जगह जिसमें खानपुर,भवानीमंडी, सारोला, इटावा, बूंदी सहित अन्य जगहों के नट,भोपा,ओड़,कंजर,गाड़िया लुहार,मोगिया,कालबेलिया,रैबारी, जोगी,बंजारा समाज के बच्चों की आर्थिक, सामाजिक व भूगोेलिक जांच पड़ताल करके उनको प्रवेश दिया जाता हैं। वहीं ये बच्चें यहां पर आने से पहले अपने माता-पिता के साथ पुश्तैनी काम में सहयोग करते है जिनमें सांप पकड़ाना, लोहा पिटाना सहित अन्य कामों में सहयोग करते हैं।
कोषाध्यक्ष संतोष यादव ने बताया कि भारत की आजादी में घुमंतु जातियों का बहुत बड़ा योगदान रहा हैं। वहीं ये जातियां समाज की मुख्यधारा से अलग होती जा रही हैं। अत: इन जातियों व बच्चों को मुख्यधारा में लाने के लिए छात्रावास की स्थापना सन 2024 में 25 बच्चों से हुई व वहीं अभी करीब छात्रावा में 38 बच्चे निवासरत व अध्ययनरत हैं। वहीं घोषित रिजल्ट में 8 वीं में करीब 5 बच्चों ने ए ग्रेड़ प्राप्त किया। वहीं अभी छात्रावास में बच्चों के लिए जयपुर से आएं ट्रेनर दिनेश शर्मा बच्चों को संस्कृत सीखा रहे हैं।
संस्कारों का अद्भुत संगम
छात्रावास के अध्यक्ष गणपत शर्मा कहते हैं, हम चाहते हैं कि जब ये बच्चे यहाँ से निकलें, तो दुनिया की मुख्यधारा से जुड़े रहे जिसके चलते यहाँ का माहौल बेहद आधुनिक और अनुशासित है। यहाँ के बच्चे जब फराटेदार अंग्रेजी में अपना परिचय देते हैं और साथ ही झुककर बड़ों के चरण स्पर्श करते हैं, तो देखने वालों की आंखें नम हो जाती हैं। यह दृश्य बताता है कि यदि अवसर मिले, तो प्रतिभा किसी जाति या भूगोल की मोहताज नहीं होती।
ये रहती है दिनचर्या
छात्रावास कार्यकारिणी सदस्य विमल जैन व गौरीशंकर नागर छात्रावास अधीक्षक ने बताया कि बच्चों के दिनभर की व्यवस्थित दिनचर्या बनी हुई हैं। जिसमें सुबह करीब 6 बजे जागना होता है। उसके बाद प्रात: स्मरण व 7बजे से अल्पाहार 7.30 बजे होता है। उसके बाद विद्यालय जाना वहां पर पढ़ाई करना वहां से लौटाने के बाद पुन: विद्यार्थियों की दिनचर्या शुरू हो जाती हैं।
भामाशाहों के सहयोग से संचालित होता है
छात्रावास की कार्यकारिणी में मंत्री भूपेंद्र जैन, संरक्षक अरविंद गोयल, सुरेंद्र गौतम,राजेंद्र विजय सहित अन्य ने बताया कि यहां पर पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। कार्यकारिणी सदस्यों ने बताया कि ये बच्चें कभी अपने माता-पिता के मजदूरी करने जाते थे। कुछ बच्चे कालबेलिया समुदाय से है जो कि सांप पकड़ने का काम करते हैं। आज उन बच्चों का छात्रावास में प्रवेश के बाद उनको पढ़ने के साथ-साथ संस्कारित किया जा रहा हैं। साथ ही यहां पर आने वालों बच्चों के लिए सबकुछ नि:शुल्क रहता हैं। साथ ही भामाशाह के सहयोग से छात्रावास का संचालन किया जा रहा हैं।
डॉ. मोहन लाल साहू व विपिन योगी ने बताया कि छात्रावास परिसर सीसीटीवी से लैस हैं। साथ ही बच्चों को पढ़ने के लिए सुव्यवस्थित लाइब्रेरी बनी हुई हैं व ट्यूटर भी लगा रखे हैं। बीते सत्र में एक बच्चें ने खेल प्रतियोगिता में भाग लेकर प्रथम स्थान प्राप्त किया था। वहीं बच्चों भोजन करने के दौरान एक-दूसरे से संस्कृत में बातचीत करते हैं।

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