समंदर की लहरों पर कोटा की छाप: गर्वित बल्दुआ बढ़ा रही शहर का मान,नेशनल सर्फ ओपन 2026 में बनाई जगह
चंबल से अंडमान तक का सफर
जुनून, मेहनत और सपनों की उड़ान ने दिलाई नई पहचान।
कोटा। चंबल नदी के शांत किनारों से निकलकर अब समंदर की ऊंची लहरों पर अपनी पहचान बना रही कोटा की बेटी गर्वित बल्दुआ ने एक बार फिर शहर का गौरव बढ़ाया है। अंडमान में आयोजित हो रहे नेशनल सर्फ ओपन 2026 में स्थान बनाकर उन्होंने यह साबित कर दिया कि अगर हौसले बुलंद हों तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती। यह प्रतियोगिता 13 अप्रैल तक चलेगी, जिसमें देशभर के प्रतिभाशाली सर्फर्स भाग ले रहे हैं। गर्वित की कहानी केवल एक खिलाड़ी की सफलता नहीं, बल्कि एक ऐसे सपने की उड़ान है, जो कोटा जैसे शैक्षणिक शहर से निकलकर अंतरराष्ट्रीय खेल मंच तक पहुंची है। उन्होंने अमेरिका में अपना स्टार्टअप भी शुरू किया है और इसके साथ ही सर्फिंग की कोचिंग लेकर इस खेल में खुद को और निखार रही हैं। गर्वित का कहना है, “अब समुद्र से मेरी दोस्ती हो गई है। लहरों के साथ जीना और उन्हंम समझना ही मेरी जिंदगी का हिस्सा बन गया है।”
बचपन से ही बड़े सपनों की उड़ान
गर्वित की मां संगीता महेश्वरी बताती हैं कि बचपन से ही उनकी बेटी के सपने बड़े थे। स्कूल के दिनों में वह एक बेहतरीन बास्केटबॉल कि खिलाड़ी रही हैं। खेलों के प्रति उनका झुकाव शुरू से ही रहा, लेकिन उनके भीतर कुछ अलग करने का जुनून भी था। पहाड़ों पर चढ़ना, नई जगहों पर घूमना और चुनौतियों को अपनाना उसे हमेशा आकर्षित करता था।
बेंगलुरु में मिला सर्फिंग का सपना
उनके जीवन में असली मोड़ तब आया जब उन्होंने बेंगलुरु में एमबीए के दौरान पहली बार समुद्र किनारे लोगों को सर्फिंग करते देखा। लहरों पर सवार होकर संतुलन बनाने का यह खेल उन्हें इतना आकर्षक लगा कि यही उनका सपना बन गया। इसके बाद उन्होंने खुद को पूरी तरह सर्फिंग के लिए समर्पित कर दिया।
पढ़ाई भी समुद्र किनारे, जुनून भी वहीं
गर्वित की लगन का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह अपनी पढ़ाई भी समुद्र किनारे बैठकर करती थीं। चेन्नई के महाबलीपुरम में 2023 में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सर्फिंग प्रतियोगिता में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए पांचवीं रैंक हासिल की थी। इसी उपलब्धि के आधार पर उन्होंने नेशनल स्तर के लिए क्वालिफाई किया और अब नेशनल सर्फ ओपन 2026 में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही हैं।
कोटा से दुनिया तक का सफर
साल 2011-12 से ही गर्वित कोटा से बाहर निकलकर नई दुनिया को देखने और समझने लगी थीं। उन्हें नए अनुभव हासिल करना और अलग-अलग जगहों पर जाना पसंद था। यही जिज्ञासा और साहस उन्हें आज इस मुकाम तक लेकर आया है। गर्वित बल्दुआ की सफलता न केवल कोटा बल्कि पूरे राजस्थान के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। उन्होंने यह दिखा दिया कि पारंपरिक सीमाओं से बाहर निकलकर भी नए रास्ते बनाए जा सकते हैं। आज वह उन युवाओं के लिए मिसाल हैं, जो अपने सपनों को सच करने का साहस रखते हैं। समंदर की लहरों पर सवार होकर गर्वित ने यह साबित कर दिया है कि जुनून और मेहनत के आगे कोई भी बाधा टिक नहीं सकती। अब सभी की नजरें उनके आगामी प्रदर्शन पर हैं, जहां वह देश के लिए और अधिक गौरव हासिल करने की तैयारी में हैं।

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