खाद्य सुरक्षा योजना में हुई सर्जिकल स्ट्राइक: पौने दो लाख फर्जी लाभार्थियों पर बड़ा प्रहार: नाम कटे
अपात्र होने के बाद भी ले रहे थे मुफ्त का गेहूंं
कोटा जिले में करीब 1 लाख 70 हजार अपात्र लोगों के नाम सूची से हटाए ।
कोटा। राज्य सरकार द्वारा खाद्य सुरक्षा योजना में पारदर्शिता लाने और वास्तविक जरूरतमंदों तक लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से ई-केवाईसी को अनिवार्य किए जाने के बाद बड़े स्तर पर कार्रवाई सामने आई है। इस अभियान के तहत कोटा जिले में ही करीब 1 लाख 70 हजार अपात्र लोगों के नाम सूची से हटा दिए गए, जो लंबे समय से मुफ्त राशन का लाभ उठा रहे थे। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, जिन लोगों ने ई-केवाईसी नहीं करवाई या जो पात्रता की शर्तों पर खरे नहीं उतरे, उन्हें सूची से बाहर कर दिया गया। अकेले हालिया कार्रवाई में करीब 50 हजार लाभार्थियों के नाम हटाए गए, जबकि पिछले तीन वर्षों में कुल मिलाकर यह संख्या पौने दो लाख के करीब पहुंच गई है।
ई-केवाईसी की अनिवार्यता से राह बनी आसान
जानकारी के अनुसार राज्य स्तर पर भी यह अभियान व्यापक असर दिखा रहा है। प्रदेशभर में अब तक 26 लाख लाभार्थियों के नाम पात्रता सूची से हटाए जा चुके हैं। वहीं, पिछले तीन वर्षों में कुल 89 लाख से अधिक अपात्र व्यक्तियों को बाहर किया गया, जबकि इसके समानांतर 85 लाख से ज्यादा नए पात्र लाभार्थियों को जोड़ा भी गया है। इससे साफ है कि सरकार का फोकस अब केवल वास्तविक जरूरतमंदों तक ही योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर है। कोटा जिले में खाद्य विभाग की टीमों ने गांव-गांव और शहरी क्षेत्रों में सर्वे कर अपात्र लोगों की पहचान की। कई मामलों में ऐसे लोग भी सामने आए जो आर्थिक रूप से सक्षम होने के बावजूद योजना का लाभ ले रहे थे। ई-केवाईसी अनिवार्यता ने ऐसे मामलों पर प्रभावी रोक लगाने का काम किया है।
इस तरह पकड़ में आए अपात्र
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा यह अभियान चरणबद्ध तरीके से चलाया गया है। इसके तहत राशन कार्ड धारकों की ई-केवाईसी अनिवार्य की गई और आधार से लिंकिंग और परिवार के सदस्यों का सत्यापन मृत, डुप्लीकेट और स्थानांतरित व्यक्तियों की पहचान आयकरदाता, सरकारी नौकरी वाले और आर्थिक रूप से सक्षम परिवारों की जांच की गई। इसके बाद तय मानकों पर खरे नहीं उतरने वालों को अपात्र घोषित कर सूची से बाहर किया गया। जांच के दौरान कई ऐसे मामले सामने आए कि कहीं पर एक ही व्यक्ति के नाम से दो-दो राशन कार्ड चल रहे थे और कहीं मृत व्यक्तियों के नाम पर वर्षों से राशन उठाया जा रहा था। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, यह गड़बड़ियां वर्षों से चली आ रही थीं, जिन्हें अब तकनीकी प्रणाली के जरिए चिन्हित किया गया।
पात्रों को मिलेगा पूरा लाभ
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इस कार्रवाई से अब वास्तविक गरीब और जरूरतमंद परिवारों को राशन का पूरा लाभ मिल सकेगा। पहले अपात्र लोगों के कारण वितरण प्रणाली पर दबाव रहता था, जिससे कई बार पात्रों को भी परेशानी होती थी। खाद्य विभाग ने साफ किया है कि आगे भी यह अभियान जारी रहेगा। जिन लोगों ने अभी तक ई-केवाईसी नहीं करवाई है, उन्हें जल्द प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं, अन्यथा उनके नाम भी सूची से हटाए जा सकते हैं। इसी अवधि में 85 लाख 65 हजार 190 नए पात्र लाभार्थियों को जोड़ा गया है। इससे यह स्पष्ट है कि सरकार एक ओर अपात्रों को बाहर कर रही है, वहीं दूसरी ओर वास्तविक जरूरतमंदों को जोड़ने पर भी उतना ही जोर है।
पूरे प्रदेश में लाखों अपात्र लोगों के नाम सूची से हटा दिए गए, जो लंबे समय से मुफ्त राशन का लाभ उठा रहे थे। जिन लोगों ने ई-केवाईसी नहीं करवाई या जो पात्रता की शर्तों पर खरे नहीं उतरे, उन्हें सूची से बाहर कर दिया गया।
- पूनम, अतिरिक्त आयुक्त, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग

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