कोटा रोज 70 क्विंटल गन्ना रस पी रहा, भीषण गर्मी में मीठी राहत का बना सहारा
ग्राहकी से दुकानदारों के खिले चेहरे
शहर में चार दर्जन से अधिक मशीनें लगातार संचालित हो रही हैं।
कोटा। गर्मी के तेवर अब तीखे होने लगे हैं। अप्रैल के मध्य में ही तेज धूप और बढ़ती तपन ने आमजन का जीना मुहाल कर दिया है। ऐसे में राहत की तलाश में लोग पारंपरिक और प्राकृतिक पेय पदार्थों की ओर रुख कर रहे हैं। इनमें गन्ने का रस सबसे आगे है। शहर में इन दिनों गन्ने के रस की मांग में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है और रोजाना करीब 70 क्विंटल गन्ना रस के रूप में खप रहा है। शहर के प्रमुख बाजारों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन के आसपास, कॉलोनियों और मुख्य चौराहों पर गन्ने के रस के ठेले और दुकानें बड़ी संख्या में नजर आ रही हैं।
दोपहर बाद ग्राहकों की अधिक भीड़
एक अनुमान के अनुसार शहर में चार दर्जन से अधिक मशीनें लगातार संचालित हो रही हैं। इन मशीनों पर दिनभर गन्ना पिरोया जा रहा है और ग्राहकों को ताजा व ठंडा रस परोसा जा रहा है। सुबह के समय जहां ग्राहकों की संख्या सीमित रहती है, वहीं दोपहर बाद जैसे-जैसे तापमान चरम पर पहुंचता है, गन्ने के रस की दुकानों पर भीड़ उमड़ने लगती है। कई स्थानों पर ग्राहकों को अपनी बारी का इंतजार भी करना पड़ रहा है। शाम के समय तो हालात ऐसे हो जाते हैं कि ठेलों के आसपास खड़े होने तक की जगह नहीं मिलती।
मशीनों की बढ़ी संख्या, नए ठेले भी लगे
गर्मी की बढ़ती मांग को देखते हुए कई नए विक्रेताओं ने भी गन्ने का रस बेचना शुरू कर दिया है। शहर में नई चरखियां लगाई गई हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा भी बढ़ी है और ग्राहकों को ज्यादा विकल्प मिल रहे हैं। कुछ विक्रेता नींबू, अदरक और पुदीना मिलाकर स्वादिष्ट और हेल्दी रस भी परोस रहे हैं। शहर में बने आरओबी के नीचे काफी जगह होने व पर्याप्त छाया रहने से यहां कई छोटी मोटी दुकानों, थडिय़ों के साथ गन्ने की चरखियां भी आराम से चल रही हैं। इसके अलावा हाइवे पर जहां अंडरब्रिज व ओवरब्रिज हैं, उनके नीचे भी पर्याप्त छाया होने व वाहनों का स्टैण्ड होने या न होने पर गर्मी में बाइक, कारों व अन्य वाहनों से यात्रा करने वाले लोग कुछ पलों के लिए छांव में विश्राम के साथ गन्ने के रस से हलक तर कर लेते हैं।
ग्राहकी से दुकानदारों के खिले चेहरे
डीसीएम रोड स्थित गन्ने का ठेला लगाने वाली महिला दुकानदार सरोज व गोमती ने बताया कि यह सीजन उनके लिए सबसे ज्यादा कमाई का समय होता है। इस बार गर्मी जल्दी और तेज आई है, जिससे बिक्री भी उम्मीद से ज्यादा हो रही है। कई दुकानदार सुबह से लेकर देर रात तक लगातार काम कर रहे हैं। भीषण गर्मी के इस दौर में गन्ने का रस न केवल प्यास बुझाने का साधन बना हुआ है, बल्कि शहरवासियों को ताजगी और ऊर्जा भी प्रदान कर रहा है। मीठी ठंडक के रूप में यह पारंपरिक पेय एक बार फिर लोगों की पहली पसंद बन गया है।
यहां से हो रही गन्ना की आवक
कोटा में गन्ने का उत्पादन बहुत बड़े स्तर पर नहीं होता, इसलिए यहां इस्तेमाल होने वाला ज्यादातर गन्ना बाहर से मंगवाया जाता है। उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य होने के कारण कोटा में बड़ी मात्रा में गन्ना यहां के जिलों (जैसे सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ) से ट्रकों के जरिए आता है। महाराष्ट्र से भी कुछ व्यापारियों द्वारा गन्ना सप्लाई किया जाता है, हरियाणा और पंजाब सीमित मात्रा में, लेकिन सीजन के हिसाब से यहां से भी गन्ना आता है। श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों में कुछ हद तक गन्ना उत्पादन होता है, वहां से भी कोटा तक सप्लाई आती है। गन्ना आमतौर पर ट्रकों और पिकअप वाहनों के जरिए थोक मंडियों तक लाया जाता है। वहां से रस बेचने वाले दुकानदार और ठेले वाले इसे खरीदकर अपने-अपने क्षेत्रों में ले जाते हैं।
गन्ने का रस शरीर को तुरंत ऊर्जा देने के साथ ही डिहाइड्रेशन से बचाने में मददगार होता है। इसमें प्राकृतिक शर्करा, खनिज और पानी की अच्छी मात्रा होती है। यही वजह है कि लोग कोल्ड ड्रिंक्स और पैकेज्ड पेय की बजाय गन्ने के रस को प्राथमिकता देते हैं।
-डॉ. संजय शायर, सीनियर फिजिशियन
शहर में इन दिनों गन्ने के रस की मांग में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है और रोजाना करीब 70 क्विंटल गन्ना रस के रूप में खप रहा है। गन्ना ट्रकों और पिकअप वाहनों के जरिए थोक मंडियों तक लाया जाता है। वहां से दुकानदार और ठेले वाले खरीदकर ले जाते हैं।
- विकास कुमार, गन्ना के थोक व्यापारी

Comment List