मिडिल ईस्ट का तनाव हमारी थाली तक पहुंचा, ग्राहकों की खरीदारी क्षमता हुई प्रभावित
बाजार की रौनक रह गई आधी
उफ ये महंगाई: खाद्य तेलों की कीमतों में उबाल, सूखे मेवे के भी गरमाए दाम।
कोटा। मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण बढ़ती महंगाई का असर अब सूखे मेवे और खाद्य तेल के कारोबार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। दो माह में सूखे मेवों की कीमत में 100 से 200 रुपए प्रति किलो और खाद्य तेलों की कीमतों में पांच प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। व्यापारियों का कहना है कि महंगे सिलिंडर, परिवहन खर्च और आयात पर निर्भरता के कारण कीमतों में तेजी बनी हुई है। इससे कारोबार की रफ्तार धीमी पड़ गई है। ईरान और अन्य देशों से आने वाले माल की ढुलाई महंगी हो गई है। कंटेनर भाड़ा और आयात शुल्क में हुए बदलाव का भी बाजार पर असर दिखाई दे रहा है। वैसे तो कई व्यापार पर इसका असर पड़ा, लेकिन खासतौर पर पिस्ता और बादाम के दामों में तेजी की बड़ी वजह विदेशी बाजारों में बढ़ी कीमतें मानी जा रही हैं।
बादाम व पिस्ता की राह में बाधा ईरान व अमेरिका
किराना व्यापारी पवन के मुताबिक इस समय बादाम 1000 रुपए प्रति किलो तक बिक रहा है, जबकि करीब 15 दिन पहले इसका भाव लगभग 920 रुपए प्रति किलो था। जनवरी से मई के बीच बादाम के दाम 920 से 1020 रुपए प्रति किलो के बीच रहे। पिस्ता 1200 से 1300 रुपए प्रति किलो तक बिक रहा है, जबकि यही रेट दो माह पूर्व सौ रुपए कम था। कारोबारियों का कहना है कि बाजार में आने वाला अधिकांश पिस्ता और बादाम ईरान और अमेरिका से आयात होता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय हालात का असर सीधे कीमतों पर हो रहा है। काजू साबुत की कीमत 800 से 1200 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई। वहीं, अखरोट के दाम कुछ कम हुए हैं। इस समय जहां 600 से 800 रुपए प्रति किलो विक रहा है। फरवरी में अखरोट का भाव 700 से 900 रुपए प्रति किलो तक चला गया था। हालांकि आगे दाम और बढ़ने की उम्मीद भी जताई जा रही है।
ऐसे बढ़े खाद्य तेलों के दाम
किराना व्यापारियों के अनुसार खाद्य तेलों की बात करें तो दो-तीन माह पूर्व की अपेक्षा वर्तमान में करीब पांच प्रतिशत तक दाम में उछाल दर्ज किया गया है। कारोबारी अशोक के अनुसार सरसों का तेल के दामों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्तमान में सरसों तेल 170 से 175 रुपए प्रति किलो बिक रहा है, जबकि जनवरी में इसका भाव करीब 160 रुपए प्रति किलो था। रिफाइंड तेल की कीमत भी जनवरी के 140 रुपए प्रति किलो से बढ़कर करीब 160 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है। व्यापारियों का कहना है कि रिफाइंड तेल का बाजार काफी हद तक दूसरे देशों पर निर्भर है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल का असर यहां भी दिखाई देता है।
बाजार की रौनक रह गई आधी
व्यापारियों के अनुसार अब बाजार की रौनक आधी रह गई है। इसके पीछे महंगाई बढ़ने के कारण ग्राहकों की खरीदारी क्षमता प्रभावित हुई है। घरेलू गैस सिलिंडर बढ़ने से आम लोगों का घरेलू बजट बिगड़ रहा है। लोग जरूरत भर ही खरीदारी कर रहे हैं। सूखे मेवे एवं खाद्य तेलों की बढ़ती कीमतों ने आमजन की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। पिछले कुछ दिनों में बादाम, काजू, किशमिश सहित अन्य सूखे मेवों के दामों में तेजी आई है, वहीं सरसों, सोयाबीन व रिफाइंड तेल भी महंगे हो गए हैं। किराना दुकानदारों का कहना है कि खाद्य सामग्री के दामों में लगातार उछाल आने से ग्राहकी कम होने लगी है। अब खरीदारी लगातार घटती जा रही है। इससे आमजन के साथ व्यापारी वर्ग को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अब तो महंगाई की आंच रसोई घर तक पहुंचने लगी है। खाद्य तेलों के दाम पिछले कुछ दिनों से लगातार बढ़ रहे हैं। अब एक लीटर तेल का पाउच ही 160 रुपए में मिल रहा है। इससे घरेलू बजट गड़बड़ाने लगा है।
-जानकी देवी, गृहिणी
ईरान और अन्य देशों से आने वाले माल की ढुलाई महंगी हो गई है। कंटेनर भाड़ा और आयात शुल्क में हुए बदलाव का भी बाजार पर असर दिखाई दे रहा है। आयात लागत बढ़ने और बाजार में आवक कम होने से कीमतों में उछाल आया है।
-पवन दुआ, किराना व्यापारी

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