कांग्रेस का केंद्र पर हमला : महिला आरक्षण क्रियान्वयन की इच्छुक नहीं सरकार, रणनीतिक तरीके से इसे परिसीमन विधेयक से जोड़ा
महिला आरक्षण: कांग्रेस ने केंद्र पर लगाया देरी करने का आरोप
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर महिला आरक्षण को जानबूझकर टालने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस 10 वर्षों से इसके पक्ष में है, लेकिन सरकार ने इसे परिसीमन से जोड़कर देरी की रणनीति अपनाई है। सोनिया गांधी और राहुल गांधी द्वारा लिखे पत्रों के बावजूद क्रियान्वयन में हो रही देरी महिला सशक्तिकरण के प्रति सरकार की उदासीनता दर्शाती है।
नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा है कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व हमेशा महिला आरक्षण के पक्ष में रहा है और इसके लिए वह समय-समय पर वह सरकार पर दबाव भी बनाती रही है लेकिन केंद्र सरकार रणनीति के तहत इसको लागू नहीं कर रही है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने मंगलवार को सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर कहा कि उनकी पार्टी करीब 10 साल से सरकार पर महिलाओं को आरक्षण देने का दबाव बना रही है और इस विधेयक को संसद में पारित कराने में भी अपना समर्थन दिया लेकिन सरकार ने जानबूझकर और रणनीतिक तरीके से इसे परिसीमन विधेयक से जोड़ दिया, जिससे इसे लागू करने में अड़चन आयी।
उन्होंने कहा कि 2017 में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी महिला आरक्षण विधेयक पारित होने के संबंध में केंद्र को पत्र लिखा था। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी 16 जुलाई, 2018 को केंद्र को पत्र लिखकर महिला आरक्षण को तुरंत लागू करने की मांग की थी। केंद्र सरकार ने इस मांग पर कोई ध्यान नहीं दिया और फिर परिसीमन से जोड़कर इसे टालने की कोशिश की। जयराम रमेश ने कहा, "कांग्रेस का रुख महिला आरक्षण को लेकर अडिग और अपरिवर्तित रहा है। राहुल गांधी के लिखे पत्र के आठ साल बाद भी, केंद्र सरकार-परिसीमन से जोड़कर आरक्षण के कार्यान्वयन में देरी करने के इच्छुक हैं और इसलिए वह इस मांग पर कोई कार्रवाई नहीं की है।”

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