दुल्हन आ गई, बच्चे हो गए, लेकिन नहीं जुड़ पाए नाम

कोरोनाकाल से ही राशनकार्ड में नाम जोड़ने की प्रक्रिया बंद

दुल्हन आ गई, बच्चे हो गए, लेकिन नहीं जुड़ पाए नाम

राशनकार्ड में नाम शुद्धिकरण व नए नाम नहीं जुड़ने से लोगों के कई योजनाओं के कार्य अटके हुए हैं।

कोटा। केस 1 - सुल्तानपुर क्षेत्र के राजेन्द्र की चार साल पहले शादी हुई थी। राजेन्द्र ने बताया कि पत्नी का नाम राशन कार्ड में शामिल करवाने के लिए ई-मित्र पर चक्कर लगा रहा हूं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। उसकी समस्या का समाधान होना चाहिए ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।

केस 2 - कैथून क्षेत्र निवासी श्योजीराम अपने बच्चे का नाम राशनकार्ड में जुड़वाने के लिए भटक रहा है। उसने बताया कि कई सरकारी दस्तावेज तैयार करवाने के लिए राशनकार्ड की जरूरत होती है, लेकिन उसके बच्चे का नाम नहीं होने से दस्तावेज तैयार करवाने में परेशानी आ रही है।

खाद्य सुरक्षा योजना का पोर्टल पिछले तीन साल से लॉक होने के कारण उपभोक्ताओं को अपने परिवार के नए सदस्यों के नाम राशन कार्ड में शामिल करने के लिए पिछले तीन साल से इंतजार है। सरकार ने अभी तक पुराने राशन कार्ड में परिवार के नए सदस्य का नाम शामिल करने की प्रक्रिया शुरू नहीं की है। ऐसे में उपभोक्ता प्रतिदिन जिला रसद विभाग कार्यालय में इस उम्मीद से पहुंच रहे हैं कि आज या कल नाम जुड़ जाएगा, लेकिन इन्हें  निराशा हाथ लग रही है। 

दुल्हन व बच्चे कर रहे इंतजार
कोरोनाकाल के दौरान राशन कार्ड में परिवार के नए सदस्यों के नाम जोड़ने की प्रक्रिया बंद हो गई थी। इससे क्षेत्र के कई लोग सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हैं। जिले में कई परिवार ऐसे हैं जिनके सदस्यों की शादी को तीन साल बीत चुके हैं, लेकिन दुल्हन और उनके बच्चों के नाम अभी तक राशन कार्ड में नहीं जुड़ पाए है। राज्य सरकार ने खाद्य सामग्री में नए नाम शामिल करने के लिए पिछले वर्ष पोर्टल खोला था। उस दौरान कई नए राशन कार्ड खाद्य सामग्री योजना में शामिल हो गए थे, लेकिन पुराने राशनकार्ड में  नए सदस्यों के नाम नहीं जुड़ पाए थे।

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पांच लाख से अधिक राशन कार्ड धारक
जिले में पांच लाख से अधिक राशन कार्ड धारक हैं। इनमें से 29 हजार 819 बीपीएल धारक हैं। वहीं राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एनएफएसए) दो लाख 78 हजार 696 राशन कार्ड धारक हैं। जिन्हें चावल, गेहूं, मोटा अनाज राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत मिल रहा है। इसके साथ ही इन्हें अन्य लाभ भी मिलते हैं। वहीं नॉन एनएफएसए के दो लाख 23 हजार 382 राशन कार्ड बने हैं। ये ऐसी श्रेणी में आते हैं। जो लोग राजस्थान के निवासी नहीं है और राजस्थान में निवास कर रहे हैं। 

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यहां पड़ती है राशनकार्ड की जरूरत
राशनकार्ड में नाम शुद्धिकरण व नए नाम नहीं जुड़ने से लोगों के कई योजनाओं के कार्य अटके हुए हैं। जाति व मूल निवास, विवाह प्रमाण पत्र व आधार कार्ड बनवाने के लिए राशन कार्ड में व्यक्ति का नाम होना अनिवार्य है। ऐसे में नाम नहीं होने से उनके कार्य नहीं हो पा रहे हैं। वहीं राशन कार्ड में नए सदस्य नहीं जुड़ने से उन्हें कई सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। कई योजनाओं के लाभ के लिए राशनकार्ड को सरकारी दस्तावेज के रूप में मान्य कर रखी है। ऐसे में पात्र होने के बावजूद योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। 

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डेढ़ साल पहले से ई-मित्र पर नाम जुड़वाने के लिए आॅनलाइन आवेदन कर रखा है, लेकिन साइट नहीं चलने के कारण ई-मित्र वाला मना कर देता है, वहीं कई बार रसद कार्यालय तक गई हूं, लेकिन हर बार पोर्टल बंद का बोलकर वापस भेजे देते हैं।
- ललिता कुमारी, रायपुरा 

खाद्य सुरक्षा योजना में काफी समय से नए सदस्यों के नाम शामिल नहीं हो पा रहे हैं। इसकी लगातार शिकायतें आ रही है। यह केन्द्र सरकार का मामला है। इसका पोर्टल कब शुरू होगा, इस सम्बंध में फिलहाल कोई जानकारी नहीं है। 
- पुष्पा हिरवानी, जिला रसद अधिकारी कोटा

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