चुनाव आयोग की बड़ी कार्रवाई: पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के लिए 1,111 केंद्रीय पर्यवेक्षक तैनात, अप्रेल में होंगे चुनाव

चुनावी राज्यों में ये हिंसा और प्रलोभन पर रखेंगे नजर

चुनाव आयोग की बड़ी कार्रवाई: पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के लिए 1,111 केंद्रीय पर्यवेक्षक तैनात, अप्रेल में होंगे चुनाव

चुनाव आयोग ने निष्पक्ष मतदान हेतु 1,111 पर्यवेक्षकों को तैनात किया है। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल सहित चुनावी राज्यों में ये "आंख और कान" के रूप में हिंसा और प्रलोभन पर नजर रखेंगे। 18 मार्च तक ये अधिकारी अपने क्षेत्रों में पहुंचेंगे, जहां आम जनता और दल सीधे शिकायतें दर्ज करा सकेंगे।

नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनावों के साथ-साथ छह राज्यों में होने वाले उपचुनावों के लिए 1,111 केंद्रीय पर्यवेक्षकों को तैनात किया है। मंगलवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि इन पर्यवेक्षकों में सामान्य, पुलिस और व्यय अधिकारी शामिल हैं। इन्हें चुनाव आयोग के "आंख और कान" के रूप में वर्णित किया गया है, जो चुनावी प्रक्रिया के दौरान जमीनी स्तर पर निगरानी रखेंगे।

आयोग के अनुसार सामान्य पर्यवेक्षक की संख्या 557, पुलिस पर्यवेक्षक 188 तथा व्यय पर्यवेक्षक 366 होगी। इनको 832 विधानसभा क्षेत्रों और उपचुनाव वाली सीटों पर तैनात किया जायेगा। आंकड़ों के अनुसार, चुनावी राज्यों में पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक 294 सामान्य पर्यवेक्षक तैनात किए गए हैं। इसके बाद तमिलनाडु में 136, असम और केरल में 51-51, और पुडुचेरी में 17 तथा उपचुनाव वाले राज्यों के लिए आठ सामान्य पर्यवेक्षक तैनात किए गए हैं। पश्चिम बंगाल में उच्च तैनाती राज्य के चुनावी इतिहास और राजनीतिक संवेदनशीलता को देखते हुए की गई है।

पश्चिम बंगाल में 84 पुलिस पर्यवेक्षकों के साथ -साथ तमिलनाडु में 40, असम में 35, केरल में 17, पुडुचेरी में चार तथा उपचुनाव वाले राज्यों में आठ पुलिस पर्यवेक्षकों की तैनाती की गयी है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि चुनाव पूरी तरह से हिंसा मुक्त और प्रलोभन मुक्त वातावरण में होने चाहिए। आयोग ने सभी पर्यवेक्षकों को 18 मार्च तक अपने संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में पहुँचने का निर्देश दिया है।

ये पर्यवेक्षक अपनी डयूटी पर पहुँचने के बाद, अपने संपर्क विवरण सार्वजनिक करेंगे। वे प्रतिदिन एक निश्चित समय तय करेंगे जिसमें उम्मीदवार, राजनीतिक दल और आम जनता उनसे मिलकर अपनी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे। केंद्रीय पर्यवेक्षकों की नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 324 और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 20 ख के तहत की जाती है। ये अधिकारी पारदर्शिता बनाए रखने, चुनावी कदाचार को रोकने और क्षेत्र स्तर पर चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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