तमिलनाडु चुनाव: रिकॉर्ड 4,618 उम्मीदवार मैदान में, टीवीके 234 सीटों पर आजमा रही किस्मत, 23 अप्रैल को होंगे चुनाव
तमिलनाडु चुनाव: 4,618 उम्मीदवार मैदान में, मुकाबला हुआ दिलचस्प
तमिलनाडु की 234 सीटों पर 4,618 उम्मीदवार किस्मत आजमाएंगे। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और विपक्षी नेता पलानीस्वामी के बीच कड़ा मुकाबला है। अभिनेता विजय की नई पार्टी और सीमन की एनटीके ने इस बार चुनाव को पांच कोणीय और रोमांचक बना दिया है, जिससे राज्य का सियासी पारा चढ़ गया है।
चेन्नई। तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल को होने वाले चुनावों में अब कुल 4,618 उम्मीदवार मैदान में हैं। गुरूवार को नाम वापसी की अंतिम तिथि के बाद यह आंकड़ा सामने आया है। चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार को नामांकन वापस लेने की समय सीमा समाप्त होने तक रिकॉर्ड 7,599 नामांकन (6,216 पुरुष और 1,380 महिलाएं) दाखिल किए गए थे। इनमें से 4,618 नामांकन स्वीकार किए गए, 2,640 खारिज कर दिए गए और 521 उम्मीदवारों ने अपने नाम वापस ले लिए हैं। वर्तमान में आयोग द्वारा 911 नामांकनों को 'प्रतिस्पर्धी' के रूप में वर्गीकृत किया गया है और आंकड़ों को अपडेट करने की प्रक्रिया जारी है।
वर्ष 2006 के बाद के पिछले पांच विधानसभा चुनावों के आंकड़े बताते हैं कि नाम वापसी के बाद मैदान में रहने वाले उम्मीदवारों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। 2006 में 2,586 उम्मीदवार, 2011 में 2,748 उम्मीदवार, 2016 में 3,776 उम्मीदवार और 2021 में 3,998 उम्मीदवार मैदान में थे। इसी प्रवृत्ति के अनुरूप इस बार यह संख्या बढ़कर 4,618 हो गई है, जिनमें अधिकांश निर्दलीय हैं। सीटों के बंटवारे, निर्वाचन क्षेत्रों की पहचान, उम्मीदवारों के नाम तय करने, नामांकन दाखिल करने, जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही अब मंच चार मुख्य मोर्चों के बीच मुकाबले के लिए तैयार है। चारों प्रमुख मोर्चों के नेताओं ने मतदाताओं को लुभाने के लिए राज्य के हर जिले और कोने-कोने में अपना सघन प्रचार अभियान शुरू कर दिया है।
सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के नेतृत्व वाला 'सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस' सत्ता बरकरार रखने और अपनी 'द्रविड़ियन मॉडल 2.0' सरकार बनाने के लिए उत्सुक है। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन पहली बार मुख्यमंत्री बनने के बाद इस गठबंधन की मजबूती के आधार पर फिर से जीत का दावा कर रहे हैं। दूसरी ओर, मुख्य विपक्षी दल अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी के लिए यह उनके 53 साल के राजनीतिक इतिहास की सबसे बड़ी परीक्षा है। पार्टी एम.जी.आर. और जयललिता जैसे करिश्माई नेताओं की कमी महसूस कर रही है, लेकिन एक मजबूत गठबंधन के जरिए वह पिछले चुनावी नुकसान को पीछे छोड़ने की कोशिश में है।
चुनावी मैदान में दो अन्य खिलाड़ी भी हैं। अभिनेता विजय की नवगठित पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके), जो पहली बार सभी 234 सीटों पर किस्मत आजमा रही है तथा सीमन के नेतृत्व वाली नाम तमिलर काच्ची (एनटीके), जो हमेशा की तरह अकेले चुनाव लड़ रही है। इसके अलावा, निष्कासित अन्नाद्रमुक नेता वी.के. शशिकला और पट्टाली मक्कल कच्ची (पीएमके) संस्थापक डॉ. रामदास के नए मोर्चे की मौजूदगी से यह मुकाबला पांच कोणीय हो गया है।
मैदान में मौजूद प्रमुख चेहरों में एम.के. स्टालिन (कोलाथुर), उनके बेटे और उप-मुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन (चेपॉक-तिरुवल्लिकेनी), अन्नाद्रमुक से बाहर किए गए और अब द्रमुक में शामिल हो चुके पूर्व मुख्यमंत्री ओ. पनीरसेल्वम (बोडिनायक्कनूर), देसिया मुरपोक्कु द्रविड़ कषगम (डीएमडीके) महासचिव प्रेमलता विजयकांत (वृद्धाचलम) और पलानीस्वामी (इडप्पडी) शामिल हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन (सातुर), केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन (अविनाशी आरक्षित), पूर्व राज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन (मायलापुर) और वनथी श्रीनिवासन (कोयंबटूर उत्तर) चुनाव लड़ रहे हैं। द्रमुक के दिग्गज नेता दुरईमुरुगन काटपाडी सीट से रिकॉर्ड 13वीं बार मैदान में हैं। अभिनेता विजय दो सीटों चेन्नई की पेरम्बूर और तिरुचि पूर्व से चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि सीमन शिवगंगा जिले की कराईकुडी सीट से मैदान में हैं।
द्रमुक इस बार खुद 164 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि गठबंधन सहयोगियों के 12 उम्मीदवार उसके 'उगते सूरज' के निशान पर चुनाव लड़ रहे हैं, जिससे कुल संख्या 176 हो गई है। बाकी 58 सीटों पर सहयोगी दल अपने प्रतीकों पर लड़ रहे हैं। अन्नाद्रमुक गठबंधन में मुख्य पार्टी 167 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि भाजपा, पीएमके और एएमएमके सहित अन्य सहयोगियों को 67 सीटें दी गई हैं। एम.के. स्टालिन अपने गढ़ कोलाथुर से लगातार चौथी बार जीत की उम्मीद कर रहे हैं। वह 1984 से लगातार 10वीं बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। चुनावी तस्वीर साफ होने के साथ ही राज्य में राजनीतिक पारा चढ़ गया है। कई जिलों में बढ़ती गर्मी के बावजूद नेताओं ने अपना प्रचार अभियान और तेज कर दिया है।

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