नयापुरा बस स्टैंड की हालत बदहाल : करोड़ों की कमाई, लेकिन यात्रियों को सुविधाएं फिर भी नदारद…
छत से टपकता पानी, गिरता प्लास्टर और लटकते बिजली के तार
कोटा। सवारियां जुटाकर रोडवेज प्रशासन भले ही अपने निर्धारित लक्ष्य पूरे करने का दावा कर रहा हो, लेकिन यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं के मामले में नयापुरा बस स्टैंड की तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। यहां यात्रियों के लिए बैठने की पर्याप्त साफ जगह तक नहीं है। बारिश के दिनों में छत से पानी टपकता है, जगह-जगह प्लास्टर गिर रहा है और कई स्थानों पर बिजली के तार लटकते नजर आते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जिस बस स्टैंड से हर दिन बड़ी संख्या में यात्री सफर करते हैं, वहां मूलभूत सुविधाओं का इतना अभाव क्यों है।
रोडवेज प्रशासन के अनुसार कोटा रोडवेज डिपो पिछले एक साल से प्रदेश में नंबर वन चल रहा है। दोनों बस स्टैंड और कैंटीन-मॉल से डिपो को हर साल 28 करोड़ 85 लाख रुपए से अधिक की आय होती है। बसों के संचालन से हाेने वाली आय अलग से है। डिपो के पास 77 बसें हैं, जबकि 18 बसें अनुबंध पर संचालित हो रही हैं। यानी कुल 95 बसों के जरिए यात्रियों को परिवहन सुविधा दी जा रही है। लेकिन नयापुरा बस स्टैंड पर पहुंचते ही व्यवस्थाओं की हकीकत अलग नजर आती है।
छत से गिरता प्लास्टर, टपकता है पानी
नयापुरा बस स्टैंड की छत का प्लास्टर कई जगह से उखड़ चुका है। कुछ हिस्सों में प्लास्टर गिरने से यात्रियों के लिए खतरा बना हुआ है। बारिश होने पर छत से पानी टपकने लगता है। बस स्टैंड परिसर में बने कमरों की स्थिति भी बेहतर नहीं है। मासिक पास बनाने वाले कक्ष की दीवारों पर जगह-जगह प्लास्टर गिर रहा है और दरारें दिखाई दे रही हैं। कई कमरों की खिड़कियां और दरवाजे भी टूटे हुए हैं। बस स्टैंड पर साफ-सफाई की स्थिति भी यात्रियों को परेशान कर रही है। जगह-जगह गंदगी दिखाई देती है। दीवारों और कोनों में पान-गुटखे के निशान नजर आते हैं। बूंदी निवासी शीला दीक्षित ने बताया कि रिश्तेदारी में कोटा आने के दौरान जब वह नयापुरा बस स्टैंड पहुंचीं तो यहां साफ-सफाई की स्थिति ठीक नहीं मिली। उनका कहना था कि दिन में दो-तीन बार सफाई होनी चाहिए और गंदगी फैलाने वालों को रोका जाना चाहिए।
बिजली के तार लटके, पंखे भी अधूरे
देवली निवासी रूपाली ने बताया कि बस स्टैंड परिसर में कई जगह बिजली के तार लटकते दिखाई देते हैं। गर्मी के बीच यात्रियों को पर्याप्त राहत देने के लिए पंखे भी हर जगह नहीं लगे हैं। कई स्थानों पर सिर्फ पंखों के हुक दिखाई देते हैं। ऐसे में यात्रियों को गर्मी में परेशान होना पड़ता है। बस स्टैंड परिसर में आवारा पशुओं की आवाजाही भी बनी रहती है।
पुरानी बसों में फटी सीटें
सिर्फ बस स्टैंड ही नहीं, बल्कि डिपो की कुछ बसों की हालत भी यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। कई बसों की सीटें फटी हुई हैं। बसों के अंदर कई बार मूंगफली और अन्य खाद्य पदार्थों के छिलके पड़े दिखाई देते हैं। इससे साफ-सफाई व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होते हैं।
पार्किंग की व्यवस्था भी नहीं
नयापुरा बस स्टैंड पर यात्रियों को छोड़ने या लेने आने वाले लोगों के लिए व्यवस्थित पार्किंग की सुविधा भी नहीं है। लोग अपने वाहन लेकर आते हैं, लेकिन उन्हें खड़ा करने में परेशानी होती है। बसों के आवागमन के दौरान रास्ते में खड़े वाहनों को बार-बार हटाना पड़ता है। इससे बसों की आवाजाही भी प्रभावित होती है। यात्रियों और उनके परिजनों को वाहन चोरी होने की चिंता भी बनी रहती है। एक तरफ डिपो की आय और उपलब्धियों के आंकड़े सामने हैं, तो दूसरी तरफ उसी डिपो के प्रमुख बस स्टैंड की जर्जर हालत यात्रियों की परेशानी को उजागर कर रही है। अब जरूरत इस बात की है कि आय और संचालन के साथ यात्रियों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं पर भी उतना ही ध्यान दिया जाए।
नयापुरा बस स्टैंड की स्थिति को लेकर विपणन बोर्ड को लिखा गया है। विपणन बोर्ड की ओर से निरीक्षण किया जाएगा। उसके बाद ही नया भवन बनाने या फिर मरम्मत कराने को लेकर आगे की कार्रवाई जाएगी।
- अजय कुमार मीणा, मुख्य प्रबंधक, रोडवेज डिपाे, कोटा

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