बेटियों का दर्द : बीए के बाद छूट रही पढ़ाई, ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी कॉलेजों में पीजी संकाय ही नहीं

पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए 60 से 75 किमी दूर शहर आने में छात्राएं असमर्थ

बेटियों का दर्द : बीए के बाद छूट रही पढ़ाई, ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी कॉलेजों में पीजी संकाय ही नहीं

रामगंजमंडी में 27 साल बाद भी शुरू नहीं हुआ पीजी संकाय ,उच्च शिक्षा के लिए 120 किमी सफर या पढ़ाई छोड़ने की मजबूरी।

कोटा। बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के दावों के बीच ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियां उच्च शिक्षा से वंचित हो रही हैं। सरकारी कॉलेजों में पोस्ट ग्रेजुएशन नहीं होने से बीए के बाद उनकी शिक्षा बीच में ही छूट रही है। ऐसे में छात्राओं के सामने सिर्फ दो ही विकल्प बचते हैं, या तो आगे की पढ़ाई छोड़ दें, या फिर पीजी करने के लिए शहरी कॉलेज आने-जाने के रोजाना 120 से 150 किमी का लंबा सफर तय करें। सुरक्षा, दूरी और पारिवारिक चिंताओं के कारण ज्यादातर बेटियों के सपने यहीं टूट जाते हैं।
कोटा जिले के रामगंजमंडी, इटावा, कनवास और सांगोद के राजकीय महाविद्यालयों में पीजी संकाय संचालित नहीं है। बीए के बाद छात्राएं आगे की पढ़ाई जारी रखना चाहती हैं, लेकिन पीजी संकाय नहीं होने के कारण उनका सपना अधूरा रह जाता है। हालांकि, सांगोद कॉलेज में केवल राजनीति विज्ञान विषय में पीजी की सुविधा है, जबकि क्षेत्र की डिमांड भूगोल, इतिहास, हिन्दी व संस्कृत जैसे विषयों में स्नातकोत्तर कक्षाएं शुरू करने की है। नतीजन, छात्राओं को इन्हीं समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

27 साल बाद भी पोस्ट ग्रेजुएशन नहीं
रामगंजमंडी कॉलेज में स्थापना के 27 साल बाद भी स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम शुरू नहीं हो सके। ग्रामीण क्षेत्र की छात्राओं के सामने सबसे बड़ी समस्या दूरी की है। पीजी की पढ़ाई के लिए उन्हें कोटा शहर के कॉलेजों में जाना पड़ता है, जो गांव-कस्बों से 60 से 75 किलोमीटर दूर हैं। आने-जाने में यह दूरी 120 से 150 किलोमीटर तक पहुंच जाती है। सुरक्षा, समय और खर्च जैसे कारणों से अभिभावक भी बेटियों को इतनी दूर भेजने में हिचकते हैं। ऐसे में बीए के बाद ही पढ़ाई छोड़ने की मजबूरी बन जाती है।

80 से ज्यादा गांवों की बेटियों के टूट रहे सपने
राजकीय महाविद्यालय कनवास की स्थापना वर्ष 2018 में हुई थी, जिसे आज 9 साल हो गए। छात्र-छात्राओं की संख्या भी बड़ी लेकिन कॉलेज यूजी से पीजी नहीं हो सका। जबकि, यह महाविद्यालय 80 से ज्यादा गांवों को कवर करता है। ग्रामीणों का कहना है, ऊर्जा मंत्री से लेकर लोकसभा अध्यक्ष तक को ज्ञापन दे चुके हैं। आयुक्तालय को भी कई बार पत्रभेजे हैं। लेकिन, आश्वासन के सिवाए कुछ नहीं मिला।

कनवास कॉलेज में नामांकन अच्छा है। यहां पीजी संकाय होना ही चाहिए। यूजी के बाद पीजी करने के लिए मुझे 120 किमी का सफर तय करना पड़ता है। जेडीबी से हिन्दी में एमए कर रही थी, लेकिन दूरी अधिक होने व अन्य कारणों से बीच में छोड़ना पड़ा। लड़कियों के लिए इतनी दूर आना जाना आसान नहीं है।
-कुसुम राठौर, छात्रा कनवास

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बीए करने के बाद अधिकतर छात्राएं एमए नहीं कर पाती। शहरी कॉलेज जाने के लिए घंटों बसों का इंतजार और लंबी दूरी के कारण छात्राओं को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यहां हिन्दी, संस्कृत व ज्योग्राफी में पीजी खुलना चाहिए।
-श्रुति राठौर, छात्रा कनवास

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बीकॉम करने के बाद मुझे पीजी के लिए रामगंजमंडी से झालावाड़ आना-जाना पड़ा। प्रतिदिन 60 किमी के सफर में कई परेशानियों का सामना करना पड़ा। यूजी में मेरी कई सहपाठी तो पीजी नहीं कर सकी। मजबूरन उन्हें आगे की पढ़ाई छोड़नी पड़ी। कॉलेज को 27 साल हो गए। अब तो सरकार पीजी संकाय शुरू करें।
-रुचि गुर्जर, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष रामगंजमंडी

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धरना, प्रदर्शन, भूख हड़ताल व अनशन तक सब कर लिए, शिक्षा मंत्री सहित आयुक्तालय को अनगिनत ज्ञापन दे दिए इसके बावजूद आज तक एमए व एमकॉम शुरू नहीं हुआ। छात्राओं की ही नहीं छात्रों की भी यूजी के बाद पढ़ाई छूट रही है।
-संस्कार मीणा, पूर्व छात्र रामगंजमंडी कॉलेज

क्या कहते हैं शिक्षक

रामगंजमंडी कॉलेज 1999 में शुरू हुआ था, जिसे वर्तमान में 27 साल होने जा रहे हैं। इसके बावजूद यहां आर्ट्स व कॉमर्स में पीजी संकाय शुरू नहीं हो सका। जबकि, क्षेत्र का यह सबसे बड़ा कॉलेज होने के नाते यहां पीजी संकाय खोले जाने की सख्त आवश्यकता है। विद्यार्थियों को पीजी करने के लिए या तो 30 किमी दूर झालावाड़ या 75 किमी दूर कोटा जाने को मजबूर होते हैं। वहीं, अधिकांश छात्राएं तो पीजी कर नहीं पाती। कॉलेज में एमए व एमकॉम खुलना चाहिए।
-डॉ. संजय गुर्जर, प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय रामगंजमंडी

कनवास कॉलेज की स्थापना वर्ष 2018 में हुई थी, जिसके बाद से अब तक पीजी संकाय शुरू नहीं हो सका। जबकि, हिन्दी, संस्कृत, इतिहास व ज्योग्राफी में एमए शुरू किए जाने की सख्त आवश्यकता है। मजबूरन, विद्यार्थियों को पीजी करने के लिए 60 किमी दूर कोटा शहर जाने का ही विकल्प बचता है। प्रतिदिन आने-जाने में 120 किमी दूरी तय करनी पड़ती है। ऐसे में कई छात्राएं तो पीजी कर ही नहीं पाती है। आयुक्तालय को कई बार प्रस्ताव भिजवा चुके हैं। लेकिन, अब तक पीजी नहीं खुला।
-डॉ. ललित नामा, सीनियर असिस्टेंट प्रोफेसर कनवास कॉलेज

संबंधित कॉलेजों से विद्यार्थियों की डिमांड पर प्राचार्य की ओर से प्रस्ताव आते हैं, उन्हें आयुक्ताय भेज दिया जाता है। सरकार हर साल कहीं न कहीं पीजी संकाय खोल रही है। यह सतत प्रक्रिया है जो निरंतर जारी है। हां, यह बात भी सही है कि कोटा ग्रामीण क्षेत्र के अधिकांश कॉलेजों में पीजी संकाय नहीं होने से परेशानी है। हालांकि, समाधान के प्रयास लगातार जारी है।
-प्रो. विजय पंचौली, क्षेत्रिय सहायक निदेशक कॉलेज शिक्षा

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