विश्व ब्रेल दिवस : हौसलों की उड़ान के आगे धुंधली दृष्टि भी नतमस्तक, बैंक से लेकर शिक्षा जगत तक फहरा रहे परचम

बच्चों के जीवन में शिक्षा का उजियारा फैला रहे 

विश्व ब्रेल दिवस : हौसलों की उड़ान के आगे धुंधली दृष्टि भी नतमस्तक, बैंक से लेकर शिक्षा जगत तक फहरा रहे परचम

संघर्ष से सफलता तक, इन जांबाजों ने पेश की मिसाल

कोटा। लुई ब्रेल दिवस के अवसर पर उन दृष्टिबाधितों की चर्चा करना लाजिमी है, जिन्होंने अपनी मेहनत और लगन से आज समाज में एक विशिष्ट मुकाम हासिल किया है। इनमें से कोई बैंक में अधिकारी है, तो कोई कॉलेज प्रोफेसर। ये सभी अपनी बाधाओं को पार कर आमजन की सेवा कर रहे हैं और समाज के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहे हैं। इनका मानना है कि संघर्ष के बिना सफलता संभव नहीं है। बैंक से लेकर शिक्षा जगत तक फहराया सफलता का परचम कोटा में ऐसे कई उदाहरण हैं जो प्रेरणा का स्रोत हैं। जिनमें शहर की नयापुरा बैंक में कार्यरत राजेंद्र कुमार सीनियर एसोसिएट, भरत माली प्राथमिक शिक्षा में अंग्रेजी के अध्यापक आसींद भीलवाड़ा में कार्यरत हैं, अरविंद सक्सेना अभी कोटा विवि में गेस्ट फैकल्टी इतिहास विभाग में कार्यरत हैं। ये तो मात्र आपके सामने उदाहरण है, शहर में अन्य भी है जिनमें से कोई व्यवसाय कर रहा है तो कोई अन्य क्षेत्रों में समाज के साथ कदम से कदम मिलाकर सेवा कर रहा है। इनका मानना है, संघर्ष के बिना सफलता नहीं है। अभी तो उन्हें  रास्ता मिला, अभी मंजिलें हासिल करनी है।

केस 1: बैंकिंग सेवा में ग्राहकों की पसंद बने 
मूलत: भरतपुर के निवासी राजेंद्र कुमार चार भाई-बहनों में तीसरे नंबर पर हैं। बचपन में जब माता-पिता को उनकी दृष्टिबाधिता का पता चला, तो कई जगह इलाज करवाया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्हें शिक्षा के लिए दिल्ली भेजा गया। वर्ष 2011 में प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से उनका चयन बैंकिंग सेवा में हुआ। राजेंद्र बताते हैं कि दृष्टिबाधित होने के बावजूद उनका प्रयास रहता है कि बैंक आने वाला हर ग्राहक संतुष्ट होकर जाए। वे बैंक के हर काउंटर की जानकारी तत्परता से ग्राहकों को देते हैं।

केस 2: बच्चों के जीवन में शिक्षा का उजियारा फैला रहे 
जन्मजात दृष्टिबाधित होने के बावजूद भरत माली ने हार नहीं मानी। जयपुर सहित कई शहरों में इलाज बेअसर रहने के बाद उन्होंने हिम्मत जुटाई और राजस्थान बोर्ड से 10वीं-12वीं करने के बाद अजमेर से बीएड किया। वर्तमान में वे आसींद (भीलवाड़ा) में बच्चों को शिक्षित कर रहे हैं। भरत बताते हैं कि दृष्टिबाधित छात्रों को परीक्षा में प्रति घंटा 20 मिनट का अतिरिक्त समय और लिखने के लिए 'स्क्राइब' (सहयोगी) की सुविधा मिलती है। उन्होंने अंग्रेजी साहित्य, राजनीति विज्ञान और लोक प्रशासन में स्नातक की डिग्री हासिल की है।

केस 3: हादसे के बाद भी जारी रही शैक्षणिक यात्रा
कोटा विश्वविद्यालय में कार्यरत अरविंद सक्सेना ने 10वीं कक्षा के दौरान एक एक्सीडेंट में अपनी आंखों की रोशनी खो दी थी। उस समय तकनीक इतनी विकसित नहीं थी कि उनका इलाज हो पाता। इसके बावजूद उन्होंने बूंदी से शिक्षा प्राप्त की, इतिहास में एमए और फिर पीएचडी की। 1976 में झालावाड़ कॉलेज में उनकी नियुक्ति हुई और 2012 में वे सेवानिवृत्त हुए। उन्होंने अब तक 7 पुस्तकें लिखी हैं, 11 विद्यार्थियों को पीएचडी करवाई है और उनके 20 शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं।

Read More इंटरनेशनल मार्केट की तेजी का असर : सोना-चांदी की कीमतों में उछाल, जानें कितने बढ़ें भाव

क्यों मनाया जाता है विश्व ब्रेल दिवस 
प्रत्येक वर्ष 4 जनवरी को 'विश्व ब्रेल दिवस' मनाया जाता है। यह दिन ब्रेल लिपि के आविष्कारक लुई ब्रेल के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, ताकि दृष्टिबाधितों के अधिकारों और संचार के महत्व के बारे में वैश्विक जागरूकता फैलाई जा सके।

Read More शेरगढ़ अभयारण्य में अतिक्रमण हटाने के लिए चलेगा अभियान, वन मंत्री संजय शर्मा ने कहा- लोहे की फेसिंग लगाई गई, दुबारा कोई कब्जा नहीं

राजकीय सार्वजनिक पुस्तकालय कोटा: तकनीक से आसान हो रही राह 
कोटा के दादाबाड़ी स्थित राजकीय सार्वजनिक मंडल पुस्तकालय राजस्थान की संभवत: एकमात्र ऐसी लाइब्रेरी है जहाँ ब्रेल पुस्तकें भी तैयार की जाती हैं। यहाँ वर्तमान में 28 विद्यार्थी नियमित अध्ययन के लिए आते हैं। पुस्तकालय में आधुनिक संसाधन उपलब्ध हैं:
- टेक्स्ट टू स्पीच:--- डिजिटल पाठ को सुनने योग्य आॅडियो में बदलना।
- ओपन आई पर्ल कैमरा:--- किताबों को स्कैन कर तुरंत आॅडियो में परिवर्तित करना।
- फोकस-40 रिफ्रेशेबल ब्रेल डिस्प्ले:--- डिजिटल सामग्री को ब्रेल में प्रदर्शित करना।
- ब्रेल प्रिंटर:--- डिजिटल टेक्स्ट को ब्रेल पन्नों पर प्रिंट करना।
- मेरलिन बेसिक:-- दृष्टिबाधित बच्चों के लिए टेक्स्ट को बड़ा कर दिखाने वाला उपकरण।
- हिंदी ओसीआर:--- हिंदी मुद्रित सामग्री को सुलभ डिजिटल रूप में बदलना।

Read More राजस्थान विधानसभा : पट्टे मामले में कोर्ट स्टे हटने के बाद एसओजी जांच पर फैसला लेगी सरकार, सत्ता-विपक्ष में चर्चा

इनका कहना है 
तकनीक ही समावेशी शिक्षा की रीढ़
"ब्रेल केवल एक लिपि नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और गरिमा का माध्यम है। समावेशी शिक्षा का अर्थ यही है कि सीखने का अधिकार व्यक्ति की दृष्टि पर निर्भर न हो। जब तकनीक सही हाथों में होती है, तब अक्षमता बाधा नहीं बल्कि क्षमता में बदल जाती है।"
- डॉ. दीपक कुमार श्रीवास्तव, नोडल अधिकारी, सार्वजनिक पुस्तकालय कोटा संभाग

Related Posts

Post Comment

Comment List

Latest News

पुलिस की कार्रवाई : हत्या के फरार आरोपी को शरण देने वाले 3 लोग गिरफ्तार, बदमाशों ने छत पर बैठे व्यक्ति को मारी थी गोली पुलिस की कार्रवाई : हत्या के फरार आरोपी को शरण देने वाले 3 लोग गिरफ्तार, बदमाशों ने छत पर बैठे व्यक्ति को मारी थी गोली
बजरी माफिया गैंगवार में हत्या के फरार आरोपी को शरण देने वाले तीन लोग गिरफ्तार। कोतवाली थाना क्षेत्र में सेमलपुरा...
ईरान के हमले में मारे गए 6 अमेरिकी सैनिक : अमेरिका ने की पुष्टि, कहा- मलबे में मिले शव
पश्चिम एशिया संकट के कारण शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट : प्रमुख सूचकांक 2 प्रतिशत गिरे, निफ्टी में भी गिरावट
मोदी ने देशवासियों को दी होली की बधाई : सुख-समृद्धि और सफलता की कामना की, बोले- पूरे माहौल में नई ऊर्जा भर देता है होली का त्योहार 
रावी-ब्यास जल ट्रिब्यूनल 5 से राजस्थान दौरे पर : इंदिरा गांधी नहर का करेगा निरीक्षण, केंद्र व राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के साथ कानून विशेषज्ञ होंगे शामिल
प्रदेश में गर्मी ने शुरू किया तेवर दिखाना : अधिकांश शहरों में तापमान 31 डिग्री सेल्सियस, तापमान और बढ़ने से तेज होगी गर्मी
यातायात पुलिस नहीं खेलेगी होली, क्यों लिया ये निर्णय