ईरान, तुर्की के बाद दुनिया में एक और ड्रोन सेना के सुपर पावर का जन्म: ड्रोन इंडस्ट्री में बहुत तेजी से पैर पसार रहा ताइवान, हर साल लाखों ड्रोन बनाने का लक्ष्य
ड्रोन वॉरफेयर: ताइवान बना नया 'ग्लोबल ड्रोन सुपरपावर'
ताइपे। ईरान और अमेरिका की जंग में विस्फोटक ड्रोन विमानों की ताकत देखकर दुनिया हैरान है। ईरान सऊदी अरब से लेकर कतर तक में तबाही मचा रहा है और सुपरपावर अमेरिका तथा इजरायली सेना इसे पूरी तरह से रोकने में नाकाम साबित हो रही है। अमेरिका के थॉड और पेट्रियट तथा इजरायल के एयर डिफेंस सिस्टम ईरानी शाहेद ड्रोन के आगे फेल हो गए हैं। इससे खाड़ी देशों में भारी नुकसान पहुंचा है। दुनियाभर के सैन्य रणनीतिकार विस्फोटक ड्रोन को लेकर अब बड़ी चेतावनी दे रहे हैं। इससे पहले यूक्रेन युद्ध में भी रूस ने ईरानी शाहेद ड्रोन की मदद से यूक्रेन में भारी तबाही मचाई थी।
वहीं, यूक्रेन तुर्की के बायरकतार सीरिज के ड्रोन पर भरोसा करता है। तुर्की एवं ईरान के बाद अब एक और देश है जो अगला ड्रोन सुपरपावर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस देश का नाम ताइवान है जिसे चीन अपना हिस्सा कहता है। दुनिया में ड्रोन सेना की बढ़ती मांग के बीच ताइवान बहुत चुपचाप तरीके से बहुत बड़े पैमाने पर स्वदेशी तकनीक की मदद से ड्रोन बना रहा है। यही नहीं ताइवान इन हमलावर ड्रोन को यूक्रेन को निर्यात कर रहा है जो रूस के साथ जंग लड़ रहा है। इससे अब ताइवान में यह ड्रोन इंडस्ट्री बहुत तेजी से पैर पसार रही है। ताइवान में ड्रोन निर्माण को एक प्रयोग के तौर पर शुरू किया गया था लेकिन ताइपे ने पिछले एक साल में ही 1 लाख ड्रोन का यूक्रेन को निर्यात किया है। यह बिक्री पोलैंड और चेक रिपब्लिक की मदद से की गई है।
चीन की धमकियों का सामना कर रहे ताइवान के लिए हमलावर ड्रोन उसके अपने अस्तित्व को बचाए रखने के लिए भी बहुत ही जरूरी हैं। ताइवान ने ड्रोन बनाया है जो मध्यम ऊंचाई तक लंबे समय तक उड़ान भर सकता है। इसके अलावा ताइवान ने Chien Hsiang कामीकाजी ड्रोन बनाया है जो ईरान के शाहेद की तरह से ही निगरानी करने, इलेक्ट्रानिक हमले और हाई वैल्यू टारगेट पर लंबी दूरी तक हमला करने में सक्षम है। ताइवान न केवल खुद से ड्रोन बना रहा है, बल्कि अमेरिका से भी ड्रोन खरीद रहा है। ताइवान का इरादा साल 2030 तक हर साल 1 लाख 80 हजार ड्रोन बनाने का है। ताइवान अपने साथ राजनयिक संबंध रखने वाले देशों को ड्रोन की सप्लाई कर रहा है जिसका नागरिक और सैन्य दोनों ही तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है।
चीन के हमले का खतरा
असल में ताइवान उन देशों को विकल्प मुहैया करा रहा है जो चीनी उपकरणों से मुक्त ड्रोन चाहते हैं। यह अमेरिका और उसके सहयोगी देशों जैसे जापान, भारत, यूरोपीय देशों के लिए मददगार है जो अपने सप्लाई चेन में विविधता लाना चाहते हैं। ताइवान पर चीन के हमले का खतरा मंडरा रहा है, इसी वजह से ताइपे बहुत तेजी से घरेलू ड्रोन उद्योग को खड़ा करना चाहता है। आज ताइवान में 260 कंपनियां ड्रोन के पूरे सिस्टम को खुद से बना रही हैं और एकीकृत कर रही हैं।

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