इक्वाडोर ने कोलंबियाई आयात पर थोपा 100% टैरिफ : व्यापार विवाद गहराया, विदेश आर्थिक नीति में संशोधन करने का आह्वान
व्यापार युद्ध: इक्वाडोर ने कोलंबिया पर टैरिफ दोगुना किया
इक्वाडोर ने सीमा सुरक्षा और नशीली दवाओं की तस्करी का हवाला देते हुए कोलंबिया से आयात पर 100% टैरिफ लगाने का फैसला किया है। कोलंबियाई राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने इसे "कठोर" बताते हुए एंडियन समुदाय छोड़ने के संकेत दिए हैं। बिजली आपूर्ति और व्यापारिक प्रतिबंधों ने दोनों देशों के बीच आर्थिक तनाव चरम पर पहुंचा दिया है।
ब्यूनस आयर्स। इक्वाडोर ने एक मई से कोलंबिया से होने वाले आयात पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाने का निर्णय लिया है। इक्वाडोर के उत्पादन, विदेश व्यापार एवं निवेश मंत्रालय ने गुरुवार को कहा, "कोलंबिया द्वारा ठोस और प्रभावी सीमा सुरक्षा उपायों को लागू करने में विफलता के कारण इक्वाडोर को संप्रभु कार्रवाई करनी पड़ी है। एक मई से कोलंबिया से आयात पर सुरक्षा शुल्क 50 प्रतिशत से बढ़कर 100 प्रतिशत हो जाएगा।"
कोलंबियाई राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि टैरिफ बढ़ाने का इक्वाडोर का फैसला "अत्यंत कठोर" है और इसके कारण कोलंबिया एंडियन समुदाय से बाहर हो सकता है। उन्होंने कोलंबिया की विदेश आर्थिक नीति में संशोधन करने का भी आह्वान किया, और विदेश मंत्री से आग्रह किया कि वे दक्षिण अमेरिकी मर्कोसुर समूह (दक्षिण अमेरिका का एक प्रमुख आर्थिक और व्यापारिक समूह) में स्थायी सदस्यता हासिल करने की दिशा में काम करें और कैरेबियन तथा मध्य अमेरिकी देशों के साथ व्यापारिक संबंधों को मजबूत करें।
हाल के महीनों में इक्वाडोर और कोलंबिया के बीच व्यापार को लेकर विवाद चल रहा है। इक्वाडोर के राष्ट्रपति डैनियल नोबोआ ने सबसे पहले एक फरवरी को कोलंबिया से होने वाले सभी आयात पर 30 प्रतिशत शुल्क लगा दिया था। उन्होंने इसका कारण सीमा पर नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने में कोलंबिया की ओर से सहयोग न मिलना बताया था, और बाद में उन्होंने इस शुल्क को और बढ़ा दिया। कोलंबिया ने भी जवाबी कदम उठाते हुए इक्वाडोर को बिजली की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति रोक दी।
उल्लेखनीय है कि इक्वाडोर को सूखे के मौसम में हर साल ऊर्जा की कमी का सामना करना पड़ता है। एन्डियन समुदाय (जिसे पहले एन्डियन पैक्ट कहा जाता था) दक्षिण अमेरिकी देशों को एक साथ लाती है। इसमें कोलंबिया, इक्वाडोर, पेरू और बोलीविया जैसे देश शामिल हैं। इसका उद्देश्य आर्थिक एकीकरण, मुक्त व्यापार और नीतियों में तालमेल को बढ़ावा देना है। वर्ष 1969 में स्थापित यह संगठन, लैटिन अमेरिका के प्रमुख क्षेत्रीय आर्थिक समूहों में से एक बना हुआ है।

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