पश्चिम एशिया संकट: ईरानी हमले के डर से यूएई से भागे विदेशी, कुत्ते-बिल्ली लावारिस छोड़े
मानवीय त्रासदी और विस्थापितों का पलायन
ईरानी मिसाइल हमलों से दुबई में मानवीय संकट गहरा गया है। लोग पालतू पशुओं को लावारिस छोड़कर भाग रहे हैं, जबकि लेबनान में एक दिन में एक लाख लोग विस्थापित हुए। इजरायली हमलों से ईरान के ऐतिहासिक स्थलों को भारी नुकसान पहुँचा है और तेल डिपो में लगी आग से पाकिस्तान में जहरीले प्रदूषण का खतरा बढ़ गया है।
दुबई। ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों से पश्चिम एशिया में नया मानवीय संकट खड़ा हो गया है। हमलों के डर से हजारों विदेशी दुबई छोड़कर जा रहे हैं तो कुत्ते-बिल्ली जैसे पालतू पशु लावारिस छोड़ दे रहे हैं। रेस्क्यू से जुड़ी कई संस्थाओं को ऐसे सैकड़ों पालतू पशु मिले हैं। कुछ को लैंप पोस्ट से बांधकर छोड़ दिया गया, तो कई खाली अपार्टमेंट में बंद मिले। कई पेट्स तो पहले से भरे शेल्टर होम के बाहर छोड़ दिए गए हैं। जानवरों को बचाने वाले संगठनों ने बताया कि एक एक वॉलंटियर को एक ही दिन में 27 संदेश मिले हैं। इन वॉलंटियर्स का कहना है कि पहले से भरे शेल्टर होम में अब और पेट्स को रखना मुश्किल हो रहा है। रेस्क्यू संगठनों को दुबई में कई पालतू कुत्ते सड़क किनारे लैंप पोस्ट पर बंधे मिल रहे हैं। इसको लेकर सोशल मीडिया में इन विदेशों अमीरों की कड़ी आलोचना हो रही है। वहीं यूएई के लिए जंग के बीच नया मानवीय संकट खड़ा हो गया है। इस बीच मंगलवार को संयुक्त अरब अमीरात के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने ईरान की ओर से दागी गई कई बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया।
यूएई ने नष्ट किए ईरानी ड्रोन
मंत्रालय के मुताबिक सोमवार को किए गए हमले में कुल 15 बैलिस्टिक मिसाइलों का पता चला, जिनमें से 12 को इंटरसेप्ट कर मार गिराया गया, जबकि तीन मिसाइलें समुद्र में गिर गईं और किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ। रक्षा मंत्रालय ने यह भी बताया कि मिसाइलों के साथ-साथ ड्रोन के जरिए भी हमला किया गया था। अधिकारियों के अनुसार कुल 18 ड्रोन देखे गए, जिनमें से 17 को वायु रक्षा प्रणाली ने नष्ट कर दिया, जबकि एक ड्रोन संयुक्त अरब अमीरात के क्षेत्र में गिर गया। हालांकि अब तक किसी बड़े नुकसान या हताहत की सूचना नहीं है। यूएई का कहना है कि देश की वायु रक्षा प्रणाली पूरी तरह सतर्क है और किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए लगातार निगरानी रखी जा रही है। सरकार ने नागरिकों को आश्वस्त किया है कि सुरक्षा एजेंसियां हालात पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।
यूएई में किन देशों के नागरिकों की गई जान?
बयान के अनुसार, इन हमलों में 4 पाकिस्तानी, नेपाली और बांग्लादेशी नागरिकों की मौत हो गई है। वहीं 117 लोग मामूली रूप से घायल हो गए। इस बीच, इजरायल ने एक बार फिर ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए हैं। इजरायली सेना के मुताबिक, राजधानी तेहरान, मध्य ईरान के इस्फहान और दक्षिणी इलाकों में ईरानी शासन से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाकर हवाई हमले किए जा रहे हैं।
तेहरान में कई ऐतिहासिक स्थलों को हुआ नुकसान
इजरायली हवाई हमलों में ईरान के इस्फ़ाहान में चहेल सोतून पैलेस सहित विभिन्न ऐतिहासिक स्थलों को नुकसान पहुंचा है। उल्लेखनीय है कि सफाविद काल का यह महल इस्फÞाहान के गवर्नर कार्यालय के पास स्थित है। रिपोर्टों के अनुसार, पास ही हुए बम धमाके के कारण महल परिसर के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचा है। यह महल अपने भित्ति चित्रों, तालाबों और 17वीं शताब्दी के ऐतिहासिक हॉल के लिए जाना जाता है। इस्फÞाहान के एक निवासी ने बताया, चहेल सोतून इमारत और गवर्नर कार्यालय के बीच केवल कुछ ही पेड़ हैं, और स्पष्ट रूप से उन्हें भी नुकसान पहुँचा है।
यूनेस्को की सूची में शामिल सफÞाविद काल के नक्श-ए-जहाँ स्क्वायर के आसपास भी नुकसान की खबरें हैं, जिसमें अली कापू पैलेस और कई ऐतिहासिक मस्जिदें शामिल हैं। ये रिपोर्टें यूनेस्को द्वारा तेहरान में पहले हुए हमलों के बाद ईरान में विरासत स्थलों के जोखिमों के बारे में चेतावनी देने के कुछ दिनों बाद आई हैं। एजेंसी ने कहा कि वह ईरान और पूरे क्षेत्र में सांस्कृतिक विरासत की स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रही है।
ईधन बचाने के लिए वियतनाम में वर्क फ्रॉम होम
पश्चिम एशिया बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में आई अस्थिरता को देखते हुए वियतनाम सरकार ने देश में ईंधन की खपत कम करने के लिए कड़े कदम उाने शुरू कर दिए हैं। वियतनाम के उद्योग और व्यापार मंत्रालय ने मंगलवार को नागरिकों से जहां संभव हो वहां रिमोट वर्क (घर से काम) करने का आग्रह किया है ताकि यात्रा और परिवहन की मांग को कम किया जा सके। वियतनाम समाचार एजेंसी के अनुसार, मंत्रालय ने एक आधिकारिक अपील जारी कर नागरिकों से ईंधन बचाने के विभिन्न उपाय अपनाने को कहा है।
इसमें अनावश्यक होने पर निजी वाहनों के उपयोग को सीमित करने, कारपूलिंग (साझा सवारी) करने, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने और कम दूरी के लिए साइकिल को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया गया है। सरकार ने भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए नागरिकों को इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों पर विचार करने के लिए भी प्रोत्साहित किया है। मंत्रालय का मानना है कि इन उपायों से न केवल वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं के प्रभाव को कम किया जा सकेगा, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी। उल्लेखनीय है कि मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, जिससे कई आयात निर्भर देशों के लिए ईंधन की आपूर्ति एक बड़ी चुनौती बन गई है।
लेबनान में एक दिन में एक लाख लोग विस्थापित
लेबनान पर इजरायल के लगातार बढ़ते हमलों के कारण पिछले 24 घंटों में यहां एक लाख से अधिक लोग अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर हुए हैं। इससे एक गंभीर मानवीय त्रासदी का संकेत मिलता है। लेबनान में संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (यूएनएचसीआर) की प्रतिनिधि कैरोलिना लिंडहोम बिलिंग ने जिनेवा में पत्रकारों को बताया कि अब तक लेबनान सरकार के आॅनलाइन पोर्टल पर कुल 6,67,000 से अधिक विस्थापित लोग पंजीकृत हो चुके हैं। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा, पंजीकृत विस्थापितों की संख्या में मात्र एक दिन में एक लाख का इजाफा हुआ है, जो बेहद डरावना है। यूएन प्रतिनिधि ने चेतावनी दी कि वर्तमान में विस्थापन की गति 2024 में इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच हुए पिछले युद्ध की तुलना में कहीं अधिक तेज है। इजरायली बमबारी के डर से दक्षिण लेबनान और बेरुत के उपनगरीय इलाकों से लोग सुरक्षित किानों की तलाश में उत्तर की ओर पलायन कर रहे हैं।
विस्थापितों की भारी संख्या के कारण राहत शिविरों और आश्रय स्थलों पर अत्यधिक दबाव बढ़ गया है। लेबनान सरकार और अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसियां भोजन, दवा और स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने के लिए संघर्ष कर रही हैं। मानवीय संगठनों ने तत्काल युद्धविराम की अपील की है ताकि विस्थापितों को आवश्यक सहायता पहुँचाई जा सके। संयुक्त राष्ट्र ने यह भी जानकारी दी है कि लेबनान में रहने वाले सीरियाई शरणार्थी अब वापस अपने देश लौटने को मजबूर हैं। गत दो मार्च से अब तक 80,000 से अधिक सीरियाई नागरिक इजरायली हमलों से बचने के लिए लेबनान की सीमा पार कर सीरिया जा चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार विस्थापन की स्थिति इतनी आपातकालीन है कि कई परिवार बिना अपना सामान लिए ही जल्दबाजी में लेबनान छोड़कर निकल गए।
ईरान के तेल ठिकानों पर हमले से पाकिस्तान में प्रदूषण का खतरा
ईरान में तेल रिफाइनरियों और डिपो पर हुए हालिया अमेरिकी-इजरायली हवाई हमलों का असर अब पड़ोसी देश पाकिस्तान के पर्यावरण पर भी पड़ने की आशंका है। पाकिस्तान मौसम विज्ञान विभाग ने एक विशेष बुलेटिन जारी कर चेतावनी दी है कि ईरान से आने वाली हवाएं जहरीले प्रदूषक तत्वों को लेकर पाकिस्तान के पश्चिमी हिस्सों में प्रवेश कर सकती हैं, जिससे वायु गुणवत्ता में भारी गिरावट आ सकती है। मौसम विभाग के अनुसार, ईरान की वर्तमान स्थिति के कारण हवाएं प्रदूषकों को देश के पश्चिमी क्षेत्रों तक ले जा सकती हैं। विभाग ने 12 मार्च तक पाकिस्तान के पश्चिमी हिस्सों में बारिश, तेज हवाओं और गरज के साथ बौछारें पड़ने का अनुमान जताया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान की सीमा से सटे बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा के इलाकों में यह हवाएं पहुँचती हैं, तो वहाँ स्मॉग और जहरीले कणों का स्तर बढ़ सकता है। उल्लेखनीय है कि तेहरान में तेल केंद्रों पर बमबारी के बाद पूरी राजधानी काले धुएं की मोटी चादर में लिपटी हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों और पत्रकारों ने तेहरान की हवा को बेहद जहरीला बताया है। ईरानी रेड क्रेसेंट सोसाइटी ने भी चेतावनी दी है कि इन हमलों से भारी मात्रा में जहरीले हाइड्रोकार्बन, सल्फर और नाइट्रोजन आॅक्साइड का उत्सर्जन हुआ है, जो फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुँचा सकते हैं। पाकिस्तान ईरान के साथ लगभग 900 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है। मौसम विभाग ने सीमावर्ती इलाकों के निवासियों, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों को सावधानी बरतने और अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने की सलाह दी है।

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