यमन: जासूसी के आरोप में 9 यमनियों की मौत की सजा बरकरार, हूती कोर्ट का बड़ा फैसला
जासूसी के आरोप में हूती अदालत ने 9 आरोपियों की दी मौत की सजा
हूती संचालित अदालत ने अमेरिका और इजरायल के लिए जासूसी करने के दोषी 9 यमनियों की मौत की सजा बरकरार रखी है। सरकार ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया है।
सना। हूती समूह द्वारा संचालित राजधानी सना स्थित एक अदालत ने सोमवार को जासूसी के आरोप में दोषी ठहराए गए नौ यमनियों की मौत की सजा को बरकरार रखा। हूती-संचालित अल-मसीरा टीवी ने यह जानकारी दी। रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने नौ आरोपियों के खिलाफ मूल फैसले को बरकरार रखा है, जिन पर हूती समूह अमेरिका, इजरायल और सऊदी अरब सहित विदेशी देशों के लिए जासूसी करने का आरोप लगाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से आठ आरोपी हिरासत में हैं और एक फरार है।
रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने एक व्यापक जासूसी मामले में सजा को पलट दिया या कम कर दिया, लेकिन इन नौ आरोपियों की मौत की सजा को अपरिवर्तित रखा। हूती समूह ने एक बयान में कहा कि ये दोषसिद्धि उन गतिविधियों पर आधारित हैं जो राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुंचाती हैं और मुकदमे उनके नियंत्रण वाले क्षेत्रों के कानूनों के अनुसार चलाए जा रहे हैं।
हालांकि, यमन के सूचना मंत्री मुअम्मर अल-एरियानी ने इन फैसलों की आलोचना करते हुए इन्हें राजनीतिक रूप से प्रेरित और कानूनी वैधता से रहित बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी तरह के मामलों में बयान दबाव और धमकी के तहत हासिल किए गए है। हूती विद्रोहियों ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी अदालतें स्वतंत्र रूप से काम करती हैं।
ये फैसले 2023 के अंत से यमन में बढ़ते तनाव के बीच आए हैं, जब हूतियों ने गाजा युद्ध के दौरान फिलिस्तीनियों के समर्थन में कार्रवाई करते हुए इजरायल और लाल सागर में अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों को निशाना बनाना शुरू किया था। इन हमलों के जवाब में अमेरिका, ब्रिटेन और इजरायल ने हूती-नियंत्रित कई इलाकों में बार-बार हवाई हमले किए।

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