भारत ने अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम का किया स्वागत : पश्चिम एशिया में स्थाई शांति की जताई उम्मीद, होर्मुज़ जलडमरूमध्य को खोलने का आग्रह
शांति की पहल: भारत ने किया अमेरिका-ईरान युद्धविराम का स्वागत
भारत ने अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम का पुरजोर समर्थन किया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, संवाद और कूटनीति ही स्थायी शांति का एकमात्र मार्ग है। भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक सुगमता और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा की बहाली पर विशेष बल दिया है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को राहत मिलेगी।
नई दिल्ली। भारत ने अमेरिका और ईरान के बीच हुये युद्धविराम का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि इससे पश्चिम एशिया में स्थाई शांति स्थापित होगी। विदेश मंत्रालय ने पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रम पर बुधवार को एक वक्तव्य जारी करते हुए कहा कि भारत पहले से ही इस विवाद के संवाद और कूटनीति से समाधान पर जोर देता रहा है। मंत्रालय ने कहा है, "हम संघर्ष विराम का स्वागत करते हैं और आशा करते हैं कि इससे पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित होगी। जैसा कि हम पहले भी लगातार कहते रहे हैं, तनाव में कमी, संवाद और कूटनीति ही संघर्ष को शीघ्र समाप्त करने के लिए आवश्यक हैं। इस संघर्ष ने पहले ही लोगों को अत्यधिक कष्ट पहुँचाया है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति तथा व्यापारिक नेटवर्क को बाधित किया है। हमें उम्मीद है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य के माध्यम से नौवहन की निर्वाध स्वतंत्रता और वैश्विक व्यापार का प्रवाह बना रहेगा।"
उल्लेखनीय है कि अमेरिका और ईरान ने बुधवार तड़के दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति व्यक्त की है। अमेरिका और इजरायल ने गत 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ हमलों की शुरुआत की थी। ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई में पश्चिम एशियाई देशों में अमेरिकी ठिकानों और इजरायल पर हमले किए थे। इन हमलों में जान और माल का व्यापक नुकसान हुआ है। ईरान ने इन हमलों के विरोध में और होर्मुज जलडमरूमध्य से आने वाले तेल और गैस टैंकरों के संचालन को बाधित कर दिया था जिससे दुनिया भर में कच्चे तेल एवं गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है।

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