दक्षिण अटलांटिक महासागर में शिप पर फैला दुर्लभ हंता वायरस : चपेट में आने से 3 लोगों की मौत, अन्य देशों तक पहुंचा; डब्लूएचओ ने कहा- महामारी नहीं
बड़े पैमाने पर एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलने का जोखिम कम
डच क्रूज शिप MV Hondius पर दुर्लभ और घातक हंता वायरस से 3 यात्रियों की मौत हो गई। 147 यात्री और क्रू, जिनमें 2 भारतीय भी शामिल हैं, क्वारंटीन में हैं। WHO निगरानी कर रहा है, हालांकि महामारी का खतरा कम बताया गया। आशंका है कि संक्रमण अर्जेंटीना में चूहों के संपर्क से फैला।
लंदन। दक्षिण अटलांटिक महासागर में सफर कर रहे डच क्रूज शिप एमवी होंडियस पर दुर्लभ और घातक हंता वायरस की चपेट में आने से अब तक 3 यात्रियों की मौत हो चुकी है। मृतकों में एक डच दंपती और एक जर्मन महिला शामिल है। संक्रमण का असर अब जहाज से बाहर अन्य देशों तक पहुंचने लगा है। इस दुखद घटना के बाद जहाज पर सवार दो भारतीय नागरिकों सहित 147 यात्रियों और क्रू मेंबर्स को केप वर्डे के पास सख्त क्वारंटीन में रखा गया है, ताकि इस जानलेवा वायरस के वैश्विक प्रसार को रोका जा सके। तीन यात्रियों की मौत के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) और संयुक्त राष्ट्र (यूएनओ) के स्वास्थ्य अधिकारी क्रूज शिप पर फैले दुर्लभ हंता वायरस संक्रमण पर बारीकी से निगरानी कर रहे हैं। इस वायरस का पता तब चला, जब डच कंपनी संचालित यह जहाज दक्षिण अटलांटिक में था। मौतों के बावजूद, स्वास्थ्य अधिकारियों ने जनता को आश्वस्त किया है कि यह घटना किसी नयी महामारी का रूप नहीं है, क्योंकि बड़े पैमाने पर एक इंसान से दूसरे इंसान में इसके फैलने का जोखिम कम है।
इस प्रकोप ने तब एक अंतरराष्ट्रीय ट्रेस-एंड-ट्रैक अभियान को जन्म दिया, जब यात्री दूरदराज के सेंट हेलेना द्वीप सहित कई स्थानों पर जहाज से उतरे। रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि इनमें से कुछ यात्रियों ने बाद में स्विट्जरलैंड और दक्षिण अफ्रीका के लिए उड़ान भरी, जहां जोहान्सबर्ग की एक 75 वर्षीय महिला की संक्रमण से मौत हो गयी। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, चिकित्सा विशेषज्ञ वायरस के एंडीज स्ट्रेन पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जो अधिक घातक माना जाता है और इसमें सीमित रूप से मानव-से-मानव में प्रसार की दुर्लभ क्षमता होती है।
संक्रमण के स्रोत की जांच से पता चलता है कि जहाज के रवाना होने से पहले अर्जेंटीना के उशुआया में पक्षियों को देखने के लिए की गयी तटीय यात्रा के दौरान यात्री संक्रमित चूहों के मल-मूत्र के संपर्क में आये होंगे।विशेषज्ञों के अनुसार, हंता वायरस आमतौर पर गंभीर श्वसन या रक्तस्रावी समस्याओं का कारण बनता है, लेकिन यह कोविड-19 जैसे वायरसों की तरह हवा के जरिये आसानी से नहीं फैलता है। संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक जोखिम कम है और मौजूदा स्वास्थ्य प्रोटोकॉल इस प्रसार को रोकने के लिए पर्याप्त हैं। ब्रिटेन, नीदरलैंड और दक्षिण अफ्रीका की सरकारों ने उन सभी व्यक्तियों की कड़ी स्वास्थ्य जांच शुरू कर दी है, जो जहाज के यात्रियों के संपर्क में आये थे। इस बीच क्वारंटीन अवधि समाप्त होने के बाद आगे की चिकित्सा सहायता और विशेष सफाई के लिए जहाज को कैनरी द्वीप समूह ले जाने की उम्मीद है।

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