तारिक रहमान ने एक हिंदू और एक बौद्ध को बनाया मिनिस्टर : कौन हैं निताई रॉय चौधरी और दीपेन दीवान, दोनों ने कैबिनेट मंत्री के तौर पर ली शपथ

निताई रॉय चौधरी को संस्कृति मंत्रालय दिया

तारिक रहमान ने एक हिंदू और एक बौद्ध को बनाया मिनिस्टर : कौन हैं निताई रॉय चौधरी और दीपेन दीवान, दोनों ने कैबिनेट मंत्री के तौर पर ली शपथ

चौधरी बीएनपी के वाइस प्रेसिडेंट और टॉप लीडरशिप के लिए सीनियर सलाहकार और रणनीतिकार हैं। निताई रॉय चौधरी को संस्कृति मंत्रालय दिया गया है।

ढाका। बांग्लादेश की बीएनपी सरकार में 2 अल्पसंख्यक मंत्रियों को शामिल किया गया है। बांग्लादेश के पीएम तारिक रहमान ने अपनी कैबिनेट में एक हिंदू और और एक बौद्ध नेता को शामिल किया है। मंत्री बनने वाले निताई रॉय चौधरी हिंदू और दीपेन दीवान बौद्ध समुदाय से आते हैं। दोनों ने कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ ली है। दोनों बीएनपी के टिकट पर चुनाव जीतकर सांसद बने हैं और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। बांग्लादेश की करीब 18 करोड़ की आबादी में से 8 फीसदी हिंदू हैं, जो देश का सबसे बड़ा अल्पसंख्यक समुदाय है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के नेता निताई रॉय चौधरी ने पश्चिमी मगुरा चुनाव क्षेत्र से जमात-ए-इस्लामी के उम्मीदवार को बड़े अंतर से हराकर जीत हासिल की है। रॉय बीएनपी स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य हैं। चौधरी बीएनपी के वाइस प्रेसिडेंट और टॉप लीडरशिप के लिए रणनीतिकार हैं। निताई रॉय चौधरी को संस्कृति मंत्रालय दिया गया है।

पेशे से अधिवक्ता हैं चौधरी और दीवान

77 वर्षीय निताई रॉय चौधरी पेशे से अधिवक्ता रहे हैं और उनका राजनीति में काफी तजुर्बा है। बीएनपी के कद्दावर नेता निताई रॉय चौधरी युवा एवं खेल मामलों के मंत्री रह चुके हैं। बीएनपी की जीत के बाद से ही उनको प्रमुख पद मिलने की उम्मीद की जा रही थी। तारिक रहमान ने उनको कैबिनेट में जगह दी है। तारिक रहमान के दूसरे अल्पसंख्यक मंत्री दीपेन दीवान हैं। दीपेन बौद्ध बहुल चकमा जातीय अल्पसंख्यक समूह से आते हैं। उन्होंने पहाड़ी जिले रंगामाटी से बीएनपी के टिकट पर जीत दर्ज की है। दीवान ने निर्दलीय उम्मीदवार को नजदीकी मुकाबले में हराकर चुनाव जीता है। निताई चौधरी की तरह दीपेन दीवान भी पेशे से अधिवक्ता हैं। 62 वर्षीय दीवान को चटगांव पहाड़ी क्षेत्र कार्य मंत्रालय मिला है।

बांग्लादेश चुनाव में अल्पसंख्यक

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बांग्लादेश के इलेक्शन कमीशन के मुताबिक, 12 फरवरी को हुए चुनाव में 79 अल्पसंख्यक कैंडिडेट ने हिस्सा लिया। इनमें धार्मिक माइनॉरिटी कम्युनिटी की 10 महिलाएं थीं। 22 पॉलिटिकल पार्टियों ने 67 कैंडिडेट को नॉमिनेट किया था, जबकि 12 इंडिपेंडेंट कैंडिडेट के तौर पर चुनाव लड़े। बीएनपी ने 6 अल्पसंख्यक कैंडिडेट तो जमात-ए-इस्लामी ने अपने इतिहास में पहली बार एक हिंदू कैंडिडेट को टिकट किया। बांग्लादेश की कम्युनिस्ट पार्टी ने सबसे ज्यादा 17 माइनॉरिटी कैंडिडेट को मैदान में उतारा। इसके बाद लेफ्ट-विंग बांग्लादेश साम्यबादी दल ने आठ माइनॉरिटी कैंडिडेट, बांग्लादेश माइनॉरिटी जनता पार्टी ने आठ कैंडिडेट और लेफ्ट-विंग बांग्लादेश समाजवादी दल ने सात कैंडिडेट को टिकट दिया।

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