प्रधानमंत्री ताकाइची की युद्ध नीतियों के खिलाफ टोक्यो में Gen Z का भारी विरोध प्रदर्शन: मिसाइल लॉन्चरों की तैनाती पर जताई गंभीर चिंता, गंभीर मुद्दों को सुलझाने की दिशा में काम करने की मांग

शांति के लिए टोक्यो में आक्रोश

प्रधानमंत्री ताकाइची की युद्ध नीतियों के खिलाफ टोक्यो में Gen Z का भारी विरोध प्रदर्शन: मिसाइल लॉन्चरों की तैनाती पर जताई गंभीर चिंता, गंभीर मुद्दों को सुलझाने की दिशा में काम करने की मांग

जापान में पीएम सनाए ताकाइची की सैन्य नीतियों के खिलाफ टोक्यो की संसद के बाहर हजारों लोगों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने अनुच्छेद 9 (शांतिवाद) का समर्थन करते हुए हथियारों के निर्यात और मिसाइल तैनाती का विरोध किया। उन्होंने सरकार से कूटनीति अपनाने और संविधान का सम्मान करने की मांग की, जिसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए जरूरी बताया।

टोक्यों। जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची की सरकार की सैन्य विस्तार की नीतियों के विरोध में मंगलवार रात टोक्यो में हजारों लोगों ने जोरदार प्रदर्शन किया। इन हजारों प्रदर्शनकारियों ने नेशनल डाइट (जापान की संसद) के बाहर जमा होकर मिसाइलों की तैनाती और घातक हथियारों के निर्यात में ढील देने के सरकारी फैसलों की कड़ी निंदा की। कड़ाके की ठंड के बावजूद, प्रदर्शनकारियों ने युद्ध को ना और संविधान कुचलना बंद करो जैसे नारों वाली तख्तियां थाम रखी थीं। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सामूहिक रूप से जापानी संविधान के अनुच्छेद नौ को पढ़कर सुनाया, जो देश के शांतिवादी सिद्धांतों और युद्ध के त्याग की पुष्टि करता है। आयोजकों के अनुसार, रैली में लगभग 8,000 लोग व्यक्तिगत रूप से शामिल हुए, जबकि 1,000 से अधिक लोग ऑनलाइन माध्यम से जुड़े।

जापानी कम्युनिस्ट पार्टी के नीति प्रमुख ताकु यामाजोए ने कहा कि जापान, अमेरिका की वर्चस्ववादी नीतियों के साथ मिलकर सैन्य विस्तार को बढ़ावा दे रहा है, जो क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लक्ष्य के विपरीत है। प्रदर्शनकारियों ने कुमामोटो प्रान्त में लंबी दूरी के मिसाइल लॉन्चरों की तैनाती पर गंभीर चिंता जताई। युवा प्रदर्शनकारी अया यासुई ने इसे बेहद खतरनाक स्थिति करार दिया।

गौरतलब है कि, ताकाइची सरकार ने हाल ही में रक्षा उपकरण और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के तीन सिद्धांतों के परिचालन दिशानिर्देशों में संशोधन कर हथियारों के निर्यात पर प्रतिबंधों को कम कर दिया है। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि जापान को युद्ध की तैयारी पर आधारित कूटनीति के बजाय बातचीत के माध्यम से मुद्दों को सुलझाने की दिशा में काम करना चाहिए। रैली में युवाओं की बड़ी भागीदारी देखी गई, जो संविधान संशोधन और देश के सैन्यीकरण की ओर बढ़ते कदमों को लेकर आशंकित हैं।

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