कोरोना से ज्यादा खतरनाक हुआ डेंगू का डंक

कोरोना से ज्यादा खतरनाक हुआ डेंगू का डंक

इस साल अब तक 5500 लोग हुए शिकार, सर्वाधिक प्रभावित जयपुर जिला

जयपुर। राजस्थान में कोरोना वायरस से राहत है, लेकिन अब डेंगू भयावह हो रहा है। प्रदेश में पिछले 33 दिन में रोजाना 130 लोगों को अपना शिकार बनाया है। प्रदेशभर में 4295 नए रोगी इस अवधि में सामने आए हैं। वहीं 10 सितम्बर तक प्रदेश में डेंगू से एक भी मौत नहीं हुई थी, लेकिन इसके बाद 8 लोगों की जान डेंगू से जा चुकी है। वहीं कोरोना से पिछले 75 दिन में कोई मौत नहीं हुई है। डेंगू मच्छर के डंक ने सर्वाधिक प्रभावित जयपुर जिला हुआ है। इस एक माह में अकेले जयपुर में डेंगू की चपेट में 961 लोग आए हैं।  इस साल प्रदेश के सर्वाधिक 26 फीसदी यानी 1453 मरीज जयपुर में सामने आए हैं। प्रदेश में इस साल 14 सितम्बर को चिकित्सा विभाग के आंकड़ों के अनुसार डेंगू के 1205 मामले थे। जो अब एक माह में बढ़कर 5500 हो गए हैं।

प्रदेश में 33 दिन में 4295 शिकार, 8 की मौत
जयपुर में सर्वाधिक 961 आए चपेट में


डेंगू से कहां कितनी मौत

अलवर           01
बीकानेर         01
श्रीगंगानगर    01
जयपुर           01
दौसा              02
हनुमानगढ़     02

सर्वाधिक डेंगू प्रभावित जिले
जयपुर, अलवर, कोटा, उदयपुर, जोधपुर भरतपुर सर्वाधिक प्रभावित जिले हैं। वहीं बांसवाड़ा, डूंगरपुर, जैसलमेर, जालौर, प्रतापगढ़, सिरोही सबसे कम प्रभावित जिले हैं।

कोरोना के 8 नए रोगी, 42 हुए एक्टिव केस
प्रदेश में गुरुवार को कोरोना के 8 नए रोगी सामने आए हैं। इनमें जयपुर, जोधपुर, सवाई माधोपुर में 2-2, बीकानेर, धौलपुर में 1-1 नए रोगी हैं। शेष 28 जिलों में नया संक्रमित सामने नहीं आया है। प्रदेश में वर्तमान में 42 एक्टिव केस हैं। सर्वाधिक जयपुर में 19, बीकानेर में 6, अजमेर में 5, जोधपुर में 4, उदयपुर में 3, सवाई माधोपुर में 2, धौलपुर-हनुमानगढ़-झालावाड़ में 1-1 एक्टिव केस हैं। शेष 24 जिले कोरोना फ्री हैं।

बीते सालों में कितने मरीज और मौतें हुई
प्रदेश में हर साल डेंगू के मामले आने के साथ ही मौतें भी होती रही है। बीते छह साल में सर्वाधिक मौतें 2019 में 17 हुई थीं। पिछले एक माह में प्रदेश में 5-6 मौतें होने की सूचना है। हालांकि विभाग के अधिकारी इसकी पुष्टि नहीं कर रहे हैं। वर्ष 2015 में 4043 मरीज और 7 मौतें, 2016 में 5292 मरीज और 16 मौतें,  2017 में 8427 मरीज और 14 मौतें,  2018 में 9587 मरीज और 10 मौतें, 2019 में 13706 मरीज और 17 मौतें, 2020 में 2023 मरीज और 7 मौतें हुई है।

 

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