गोवंश के काल ने दी दस्तक, चपेट में 28 गोवंश

पशुपालन विभाग अलर्ट मोड पर, टीम ने शुरू किया उपचार

गोवंश के काल ने दी दस्तक,  चपेट में 28 गोवंश

राजस्थान में गोवंश की जान लील रहे लंपी रोग ने अब कोटा जिले में भी दस्तक दे दी है। जिले में 28 गोवंश इस रोग की चपेट में आ गए हैं। सूचना पर पशुपालन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर उनका उपचार शुरू कर दिया है।

कोटा। राजस्थान में गोवंश की जान लील रहे लंपी रोग ने अब कोटा जिले में भी दस्तक दे दी है। जिले में 28 गोवंश इस रोग की चपेट में आ गए हैं। सूचना पर पशुपालन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर उनका उपचार शुरू कर दिया है। राज्य में लंपी रोग गोवंश के लिए काल साबित हो रहा है।  यह आंकड़ा निरन्तर बढ़ता जा रहा है। अब तक प्रदेश के कई जिले इसकी चपेट में आ गए हैं। कोटा जिला पूर्व में इस बीमारी के प्रभाव से बचा हुआ था। अब जिले में 28 गोवंश इस बीमारी से ग्रसित हो गए हैं। ऐसे मे अब कोटा जिले में भी रोग ने दस्तक दे दी है। एक साथ 28 गोवंश के इस रोग से पीड़ित होने के बाद पशुपालन विभाग भी अलर्ट मोड पर आ गया है। पशुपालन विभाग के अनुसार जिले के बोराबास और नयागांव में 28 गोवंश लंपी रोग से पीड़ित मिले हैं। इन क्षेत्रों में गोवंशों की तादात काफी अधिक है। इसके चलते सूचना मिलते ही पशुपालन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई और रोग पीड़ित गोवंशों का उपचार शुरू कर दिया है। 

रोगी गोवंशों को किया क्वारेंटाइन
पशुपालन विभाग की अलग-अलग टीमें बोराबास व नयागांव में पहुंची और बीमार गोवंशों के उपचार में जुट गई। इन दोनों क्षेत्रों में गोवंशों की अधिक संख्या के चलते विशेष सतर्कता बरती जा रही है। यह रोग मच्छर, मक्खी और अन्य परजीवी जैसे जीवों के माध्यम से तेजी से फैलता है। इस कारण लंपी रोग से पीड़ित गोवंशों को अलग स्थान पर क्वारेंटाइन किया गया है, ताकि अन्य स्वस्थ्य गोवंशों तक यह रोग नहीं पहुंचे। इस सम्बंध में पशुपालकों को विशेष हिदायत देकर सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। 

फैक्ट फाइल
जिले में गोवंश की स्थिति
गाय-    2 लाख 18
भैंस-    2 लाख 40 हजार

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भेज रखे सैम्पल, रिपोर्ट में देरी
कोटा जिले में लंपी रोग से पीड़ित गोवंश मिलने के बाद सैम्पल जांच के लिए भोपाल, बरेली और हिसार भेजे जा रहे है। इसकी रिपोर्ट आने में करीब दस दिन लग रहे हैं। इस कारण लंपी रोग से पीड़ित गोवंश को समय पर उचित उपचार नहीं मिल पाता है। लंपी रोग की जांच के लिए पूरे देश में केवल तीन ही लैब है, जो उत्तर प्रदेश के बरेली में इंडियन वेटनरनी रिसर्च इंस्टीटयूट, भोपाल की निशाद लैब और हरियाणा के हिसार में नेशनल रिसर्च सेंटर आॅफ इग्वाइन लैब के नाम से है। इन लैबों में राजस्थान व गुजरात सहित पांच राज्यों के हजारों सैंपल भेजे जा रहे हैं। यहां से लैब काफी दूर होने से जांच रिपोर्ट आने में करीब दस दिन का समय लग रहा है। इस दौरान पशुपालन विभाग के चिकित्सक रोग की स्थिति देखकर ही उपचार कर रहे हैं।

यह होता है लंपी स्किन रोग
लंपी स्किन बीमारी मुख्य रूप से गोवंश को प्रभावित करती है। देसी गोवंश की तुलना में संकर नस्ल के गोवंश में लंपी स्किन बीमारी के कारण मृत्यु दर अधिक है। इस बीमारी से गोवंश में मृत्यु दर 1 से 5 प्रतिशत तक है। रोग के लक्षणों में बुखार, दूध में कमी, त्वचा पर गांठें, नाक और आंखों से स्राव आदि शामिल हैं। रोग के प्रसार का मुख्य कारण मच्छर, मक्खी और परजीवी जैसे जीव हैं। इसके अतिरिक्त इस बीमारी का प्रसार संक्रमित पशु के नाक से स्राव, दूषित फीड और पानी से भी हो सकता है।

टोंक से आया रोग
पशुपालन विभाग के अनुसार कोटा जिला पिछले काफी समय से लंपी रोग के प्रकोप से बचा हुआ था। अब अचानक से 28 गोवंश इसकी चपेट में आ गए हैं। हालांकि इन गोवंशों में बीमारी के हल्के लक्षण हैं। इसके बावजूद विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और उपचार शुरू किया। वहां पर पूछताछ करने पर पशुपालकों ने बताया कि गत दिनों कुछ गोवंश टोंक जिले से खरीद कर लाए गए थे। संभवतया वहां से यह रोग कोटा में पहुंचा है। टोंक में इस रोग से काफी गोवंश पीड़ित हैं। अब काफी सतर्कता बरती जा रही है।

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गोटपॉक्स टीका से बचाव संभव
गोवंशों को लंपी रोग से बचाने के लिए गोट पॉक्स टीका लगाया जा रहा है।  इस टीके को गोवंश के बीमार होने से पहले लगाया जाता है। इस टीके को लगाने के बाद गोवंश में तीन सप्ताह बाद इम्यूनिटी बन जाती है। टीका लगाने के बाद करीब एक साल तक गोवंश में इम्यूनिटी बनी रहती है। इस कारण फिलहाल टीकाकरण पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि अन्य स्वस्थ गोवंशों को इस रोग की चपेट में आने से बचाया जा सके। अब टीकाकरण अभियान को भी तेज कर दिया गया है।

कोटा जिले में 28 गोवंश लंपी रोग से पीड़ित मिले है। हालांकि इनमें रोग के लक्षण हल्के हैं। फिर भी एहतियात के तौर पर पशुपालन विभाग की टीम को मौके पर भेजकर रोगी पशुओं का उपचार शुरू कर दिया गया है। वहीं इन पशुओं को स्वस्थ्य पशुओं से अलग कर दिया है। लंपी बीमारी की जांच के लिए राजस्थान में लैब नहीं है। सैंपलों को राज्य से बाहर स्थित लैबों में भेजा जाता है। कोटा से भी कुछ सैम्पल भेजे गए हैं। जांच रिपोर्ट आने में काफी समय लगता है। जिले के पशुपालकों से अपील है कि किसी भी गोवंश के संक्रमित होने पर तुरन्त विभाग को सूचना दें ताकि गोवंश का समय पर उपचार किया जा सके।
- चंपालाल मीणा, संयुक्त निदेशक पशुपालन विभाग

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