हर तीसरे दिन नाबालिग बालिकाएं हो रही दुष्कर्म व छेड़छाड़ की शिकार

बालश्रम के मामलों में आई दो गुना कमी : कोटा जिले में बालिकाओं से छेड़छाड़ व दुष्कर्म के मामले बढ़े

 हर तीसरे दिन नाबालिग बालिकाएं हो रही दुष्कर्म व छेड़छाड़ की शिकार

कोटा सिटी एवं ग्रामीण पुलिस थानों में दर्ज किए जा रहे मामलों व बाल कल्याण समिति द्वारा जारी किए गए आंकड़ों से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि जनवरी से 31 दिसंबर 2019 में 72 मामले छेड़छाड़, दुष्कर्म और पोक्सो के सामने आए थे। वही वर्ष 2022 में बढ़कर 117 हो गए। हालांकि वर्ष 2020 में 87 तथा 2021 में 108 मामले दर्ज किए गए। जो कि गत वर्ष की तुलना में 21 अधिक दर्ज हुए हैं, यह डेढ़ से दो प्रतिशत अधिक हैं।

कोटा। कोटा जिले में नाबालिग बालिकाओं से दुष्कर्म व छेड़छाड़  के मामलों में पिछले चार साल की अपेक्षा वर्ष 2022 में डेढ़ गुना वृद्धि हुई। यानी वर्ष में हर तीन दिन में नाबालिग से दुष्कर्म व छेड़छाड़ का मुकदमा पुलिस थानों में दर्ज हो रहा है। जबकि बालश्रम के मामलों में निरंतर गिरावट आने से दो गुना कमी दर्ज की गई।  नाबालिग बालिकाओं के मामले में जन जागरुकता का अभाव सामने आ रहा है। पोक्सो एक्ट की धारा 42 में   राज्य सरकार द्वारा प्रचार प्रसार का प्रावधान है, इसके बावजूद पोक्सो के मामलों में इजाफा होता जा रहा है। उधर, कोटा सिटी एवं ग्रामीण पुलिस थानों में दर्ज किए जा रहे मामलों व बाल कल्याण समिति द्वारा जारी किए गए आंकड़ों से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि जनवरी से 31 दिसंबर 2019 में 72 मामले छेड़छाड़, दुष्कर्म और पोक्सो के सामने आए थे। वही वर्ष 2022 में बढ़कर 117 हो गए। हालांकि वर्ष 2020 में 87 तथा 2021 में 108 मामले दर्ज किए गए। जो कि गत वर्ष की तुलना में 21 अधिक दर्ज हुए हैं, यह डेढ़ से दो प्रतिशत अधिक हैं।

 बालश्रम में आई गिरावट
 बालश्रम के आंकडों पर नजर डालें तो पिछल चार साल में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। जबकि वर्ष 2019 में सर्वाधिक 68 मामले सामने आए थे। वही 2020 में कारोना काल के कारण 59 बालश्रमिकों ं को बालश्रम  से मुक्त कराया गया। वही 2021 में ये आकड़ा गिरकर मात्र 19 पर ही बंद हो गया। इसके बाद जनवरी से 31 दिसंबर 2022 में बढ़कर 46 पर ही रुक गया। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि बालश्रम के मामलों में कमी आई है। 

बाल कल्याण समिति क्या है 
देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बालकों के संरक्षण देखभाल एवं पुनर्वास संबंधी मामलों की जांच एवं निपटान के लिए  अधिनियम की धारा 27 के अंतर्गत गठित न्याय पीठ बाल कल्याण समिति के नाम से जानी जाती है। राज्य के सभी जिलों में गठित बाल कल्याण समिति निर्धारित कार्य दिवसों पर राजकीय बाल गृह में   बैठक आयोजित करती है। समिति के एक अध्यक्ष और 4 सदस्य होते हैं । जिसमें कम से कम 1 महिला होगी इनकी नियुक्ति 3 वर्ष के लिए राज्य सरकार द्वारा की जाती है।  समिति को प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट की शक्तियां प्रदत्त हैं।  

पोक्सो केस                  
2019 में 72 
2020 में  87
2021 में 108
2022 में 117

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बाल श्रमिक 
2019 में 68 
2020 में 59
2021 में 19 
2022 में 46 

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ऐसे अपराधियों में भय की कमी होना तथा पुलिस द्वारा भी तत्परता से कार्रवाई ना करना सबसे बड़ी समस्या है। इसके अलावा गलत संगत, अश्लील वीडियो देखना तथा सुरक्षा का अभाव, अनुसंधान के दौरान  पुलिस की जांच प्रणाली का लचर होना तथा पोक्सो एक्ट के कानून के बारे में व्यापक प्रचार प्रसार नहीं होने के कारण ऐसे मामलों में इजाफा हो रहा है। 
-लोकेश कुमार सैनी, वरिष्ठ एडवोकेट 

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संयुक्त परिवार का विघटन तथा मोबाइल व सोशल मीडिया पर परोसी जा रही अश्लील सामग्री और बच्चों को छोटी उम्र में ही मोबाइल पकड़ाना तथा अश्लील साहित्य पढ़ने से भी बच्चे कम उम्र में अपराध की तरफ अग्रसर हो रहे हैं। परिवार में छोटे बच्चों के सामने अश्लील बातें करना तथा नैतिक शिक्षा के अभाव के कारण आज ऐसे मामलों में इजाफा हो रहा है। 
-अमर सिंह राठौड़, डिप्टी एसपी कोटा सिटी प्रथम 

 

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