उत्पादकों और निर्यातकों के साथ संवाद कर समाधान का प्रयास करे सरकार - आरतिया

रत्न-आभूषण व कपड़े के घटते निर्यात पर आरतिया का मंथन

 उत्पादकों और निर्यातकों के साथ संवाद कर समाधान का प्रयास करे सरकार - आरतिया

आरतिया स्टडी ग्रुप की रिपोर्ट के अनुसार देश से रत्न-आभूषणों का निर्यात गत वित्त वर्ष के दौरान 11.04 प्रतिशत घट गया था और 2.70 लाख करोड़ रुपए के करीब दर्ज किया गया, जबकि 2022-23 में यह निर्यात 3.04 लाख करोड़ रुपए से भी अधिक था।

जयपुर। आल राज. ट्रेड एंड इडस्ट्री एसोसियेशन ने देश से रत्न-आभूषण व कपड़े के निर्यात में आ रही गिरावट पर चिंता जताई है। केंद्र तथा राजस्थान सरकार दोनों से आग्रह किया है कि इस पर विशेष ध्यान दे। आरतिया के अध्यक्ष विष्णु भूत, मुख्य संरक्षक आशीष सर्राफ, चेयरमैन कमल कंदोई, कार्यकारी अध्यक्ष राजकुमार अग्रवाल एवं प्रेम बियाणी और वरिष्ठ उपाध्यक्ष कैलाश शर्मा, उपाध्यक्ष आनन्द पोद्दार, सलाहकार रमेश मित्तल एवं अजय गुप्ता ने कहा है कि यूरोपीय और अमेरिकी महाद्वीप व अन्य देशों से मांग घटने के कारण यह स्थिति बनी है। इन इलाकों में कारोबारी मंदी का एक दौर फिर से इंगित हो रहा है, इससे पहले कि हालात विषम हों, सरकार इस मुद्दे को वरियता पर लेकर स्टेक होल्डर्स के साथ डिसकस करे और समाधान की दिशा में पहल भी। 

आरतिया स्टडी ग्रुप की रिपोर्ट के अनुसार देश से रत्न-आभूषणों का निर्यात गत वित्त वर्ष के दौरान 11.04 प्रतिशत घट गया था और 2.70 लाख करोड़ रुपए के करीब दर्ज किया गया, जबकि 2022-23 में यह निर्यात 3.04 लाख करोड़ रुपए से भी अधिक था। चालू वित्तवर्ष के दौरान अप्रैल माह में 5.33 प्रतिशत घटकर 18832 करोड़ रुपए के करीब रह गया, जबकि पिछले वर्ष अप्रैल माह में यह 19892 करोड़ रुपए से अधिक था। डॉलर का मूल्य आलोच्य अवधि के दौरान बढ़ा है, उसके बाद भी रत्न-आभूषण के निर्यात में आ रही गिरावट से इस क्षेत्र के उत्पादकों-निर्यातकों में भय व्याप्त है। जयपुर शहर में 10 हजार से अधिक लोग रत्न-आभूषण क्षेत्र में कारोबार कर रहे हैं और इनके यहां दो लाख से अधिक लोगों का नियोजन है। निर्यात घटने तथा और आगे लगातार गिरावट जारी रहने की आशंका से इस क्षेत्र को बचाने के लिए सरकार पहल करे यह वक्त की मांग है।

टीम आरतिया के अनुसार टैक्सटाइल क्षेत्र के विभिन्न क्षेत्र के निर्यात में गिरावट का क्रम लगातार जारी है। जैसे मैन-मेड यार्न, फैब्रिक्स, मेड-अप्स आदि का निर्यात गत वित्तवर्ष के दौरान 2.49 प्रतिशत और आरएमजी ऑफ आल टैक्सटाइल्स का निर्यात 7.43 प्रतिशत घट गया। आरएमजी ऑफ आल टैक्सटाइल्स का निर्यात 129966 करोड़ रुपए से घटकर 120304 करोड़ रुपए ही रह गया। चालू वित्तवर्ष के प्रथम माह अप्रैल के दौरान मैन-मेड यार्न, फैब्रिक्स तथा मेड-अप्स का निर्यात 4.67 प्रतिशत घट गया था। आरएमजी ऑफ आल टैक्सटाइल्स का निर्यात हालांकि 0.64 प्रतिशत सुधरा है, लेकिन यूरोपीय व अमेरिकी बाजार की मंदी का डर निर्यातकों-उत्पादकों के बीच बढ़ने लगा है। 

आरतिया का कहना है कि टैक्सटाइल इंडस्ट्री राजस्थान की इंडस्ट्यिल इकोनॉमी में महत्वपूर्ण योगदान रखती है और 5000 से अधिक ऐसी इकाइयों में तीन लाख से अधिक श्रमिकों का प्रत्यक्ष नियोजन है। इसके अलावा एमएसएमई क्षेत्र में भी बड़ी तादाद में ऐसी इकाइयां जॉब-वर्क कर रही हैं। इन सबके सामने संकट उभरे और फैले, उसके पहले ऐहतियात के तौर पर कदम उठाने चाहिये। इसका समाधान है कि सरकार मुख्यसचिव की अध्यक्षता में टास्क-फोर्स बनाये, जिसमें निर्यातकों, उत्पादकों और कारोबारी संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए।

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