नए साल के साथ शुरू होंगे बदलाव : सात लाख के बदले 12 लाख तक आय कर मुक्त, वेतन और पेंशन में इजाफा
छोटी बचत योजनाओं के ब्याज में कटौती
नए साल में केन्द्र के कर्मचारियों की पगार और सेवानिवृत्त लोगों की पेंशन बढ़ सकती है। कई बचत योजनाओं पर ब्याज भी घट सकता है। इसके अलावा 12 लाख की कमाई टैक्स फ्री हो जाएगी। 2026 में होने वाले बड़े बदलाव। 8वें वेतन आयोग से बढ़ सकती है सैलरी केंद्र सरकार ने 8वां वेतन आयोग लागू करने का ऐलान किया।
नई दिल्ली। नए साल में केन्द्र के कर्मचारियों की पगार और सेवानिवृत्त लोगों की पेंशन बढ़ सकती है। कई बचत योजनाओं पर ब्याज भी घट सकता है। इसके अलावा 12 लाख की कमाई टैक्स फ्री हो जाएगी। 2026 में होने वाले बड़े बदलाव। 8वें वेतन आयोग से बढ़ सकती है सैलरी केंद्र सरकार ने 8वां वेतन आयोग लागू करने का ऐलान किया है। अभी टाइमलाइन नहीं बताई गई है, लेकिन ऐसा माना जा रहा है यह जनवरी 2026 से लागू हो सकता है। आईटीआर के नए स्लैब से पैसा बचेगा: वित्त वर्ष 2025-26 के लिए न्यू टैक्स रिजीम के तहत आईटीआर फाइल करने पर अब 12 लाख रुपए तक की कमाई पर कोई टैक्स नहीं देना होगा। नौकरीपेशा लोगों के लिए 75 हजार के स्टैंडर्ड डिडक्शन के साथ छूट 12.75 लाख हो जाएगी। पहले ये लिमिट 7 लाख रुपए थी।
छोटी बचत योजनाओं के ब्याज में कटौती
महंगी हो सकती हैं कारें: मारुति, टाटा, एमजी और हुंडई जैसी कंपनियों की गाड़ियां एक जनवरी से महंगी हो सकती हैं। 12 जनवरी से दिन में रेलवे रिजर्वेशन के लिए आधार जरूरी: 12 जनवरी से ऐसे यूजर्स जिनका अपना आईआरसीटीसी अकाउंट आधार से लिंक नहीं है, वो सुबह 8 से रात 12 बजे तक टिकट बुक नहीं कर सकेंगे। ये नियम केवल रिजर्व टिकट बुकिंग खुलने के पहले दिन के लिए हैं।
नया इनकम टैक्स एक्ट लागू होगा: एक अप्रैल 2026 से नया इनकम टैक्स एक्ट 2025 लागू होगा। यह 1961 के पुराने कानून की जगह लेगा। सरकार का कहना है कि नया बिल टैक्स कानूनों को आसान बनाएगा। इससे टैक्स रेट में कोई बदलाव नहीं होगा।
नए इनकम टैक्स बिल की बड़ी बातें
इनकम टैक्स बिल में असेसमेंट ईयर को टैक्स 'ईयर' से रिप्लेस किया गया है। बिल के पन्ने 823 से घटकर 622 रह गए हैं। हालांकि चैप्टर्स की संख्या 23 ही है। सेक्शन 298 से बढ़ाकर 536 कर दिए गए हैं और शेड्यूल्स भी 14 से बढ़कर 16 हो गए हैं।
क्रिप्टो एसेट्स को अनडिस्क्लोज्ड इनकम के तहत गिना जाएगा, जैसे अभी नगदी, बुलियन और ज्वैलरी को शामिल किया जाता है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि डिजिटल ट्रांजैक्शन को भी पारदर्शी और कानूनी तरीके से कंट्रोल किया जा सके।
बिल में टैक्सपेयर्स चार्टर को शामिल किया गया है, जो टैक्स पेयर्स के अधिकारों को प्रोटेक्ट करेगा और टैक्स प्रशासन को ज्यादा ट्रांसपेरेंट बनाएगा। यह चार्टर टैक्सपेयर्स के हितों की रक्षा करने के साथ टैक्स अधिकारियों के अधिकारों और जिम्मेदारियों को भी साफ करेगा।
सैलरी से संबंधित कटौतियां जैसे कि स्टैंडर्ड डिडक्शन, ग्रेच्युटी और लीव एनकैशमेंट को अब एक ही जगह पर लिस्ट कर दिया गया है। पुराने कानून में मौजूद मुश्किल एक्सप्लेनेशन और प्रावधानों को हटा दिया गया है, जिससे टैक्सपेयर्स के लिए इसे समझना आसान होगा।

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