युद्धविराम की विफलता के लिए ईरान नहीं होगा दोषी, इजरायल पर लगाम लगाए अमेरिका : उमर अब्दुल्ला

उमर अब्दुल्ला का बयान: "इजरायल पर लगाम लगाए अमेरिका"

युद्धविराम की विफलता के लिए ईरान नहीं होगा दोषी, इजरायल पर लगाम लगाए अमेरिका : उमर अब्दुल्ला

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अमेरिका से इजरायल को नियंत्रित करने की अपील की है, ताकि पश्चिम एशिया में शांति बनी रहे। उन्होंने ट्रंप की भाषा की आलोचना की और पाकिस्तान की मध्यस्थता की सराहना की। इसके अलावा, उन्होंने महिला आरक्षण और लुप्त होते जल निकायों पर चिंता जताते हुए सामूहिक नागरिक जिम्मेदारी पर जोर दिया।

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को कहा कि युद्धविराम की स्थिति सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका को इजरायल पर लगाम लगानी चाहिये। उन्होंने चेतावनी दी कि निरंतर होते हमले पश्चिम एशिया में शांति प्रयासों को पटरी से उतार सकते हैं। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आचरण की भी आलोचना की और उनके बयानों में "असंगति तथा अनुचित भाषा" का आरोप लगाते हुए कहा कि यह उनके पद की गरिमा के अनुकूल नहीं है। मुख्यमंत्री ने श्रीनगर में एक कार्यक्रम के इतर पत्रकारों से कहा कि ईरान ने संघर्ष की शुरुआत नहीं की थी और युद्ध उस पर "थोपा" गया था। उन्होंने युद्धविराम के बाद अमेरिका के जीत के दावों पर भी सवाल उठाये।

सीएम उमर अब्दुल्ला ने वाशिंगटन से "इजरायल को नियंत्रित करने" का आह्वान किया और लेबनान में जारी हमलों तथा नागरिक हताहतों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि युद्धविराम विफल होता है, तो इसकी जिम्मेदारी ईरान पर नहीं बल्कि इजरायल पर डाली जानी चाहिये। उमर अब्दुल्ला ने भारत की विदेश नीति पर कांग्रेस की आलोचना के संबंध में कहा कि वह इसे विफलता या सफलता का नाम नहीं देंगे, लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि पाकिस्तान "वह करने में सफल रहा जो दूसरे नहीं कर सके।"

उन्होंने कहा कि इजरायल के साथ भारत के घनिष्ठ संबंधों ने शायद उसके राजनयिक दायरे को सीमित कर दिया है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि ऐसा न होता, तो अमेरिका और ईरान दोनों के साथ बेहतर संबंधों के कारण नई दिल्ली अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकती थी। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि यदि पाकिस्तान ने इसमें योगदान दिया है, तो "इसकी सराहना की जानी चाहिए और हमें आगे बढ़ना चाहिए।" सीएम ने महिला आरक्षण विधेयक की आवश्यकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि संसद पहले ही इस मुद्दे पर कानून पारित कर चुकी है और सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि अब क्या बदल गया है। उन्होंने कहा कि अब तक कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दिया गया है। उन्होंने पूछा, "अब क्या बदल गया है?" उन्होंने ध्यान दिलाया कि यह कानून भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली राजग सरकार ही लाई और उसी के नेतृत्व में इसे पारित किया गया था, न कि यह किसी पिछली सरकार से विरासत में मिला था।

उमर अब्दुल्ला ने महिला आरक्षण के प्रति समर्थन दोहराया लेकिन कहा कि "कुछ तो सही नहीं है।" उन्होंने भारत सरकार, विशेष रूप से भाजपा से इस पर "सच्चाई सामने रखने" का आग्रह किया कि मौजूदा कानून होने के बावजूद नये विधेयक पर विचार क्यों किया जा रहा है। श्री उमर ने जम्मू-कश्मीर में जल निकायों के सिकुड़ने पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पूरे क्षेत्र में - श्रीनगर के आसपास और ग्रामीण क्षेत्रों में - झीलें और जल निकाय या तो काफी सिकुड़ गये हैं या पूरी तरह लुप्त हो गये हैं। उमर अब्दुल्ला ने सामूहिक कार्रवाई का आह्वान करते हुये कहा कि पर्यावरण की रक्षा करना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने सवाल किया कि क्या लोग आने वाली पीढ़ियों को एक खराब पर्यावरण सौंपना चाहते हैं। दैनिक आदतों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने नागरिकों से प्लास्टिक का उपयोग कम करने का आग्रह किया और पूछा कि व्यक्ति प्लास्टिक पर निर्भर रहने के बजाय अपना थैला खुद क्यों नहीं ले जा सकते।

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