दुर्भाग्य है धर्मयुद्ध के लिए निकलना पड़ रहा: शंकराचार्य स्वामी ने कहा गोमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग को लेकर धर्मयुद्ध यात्रा जारी

गोवंश रक्षा का शंखनाद: शंकराचार्य ने दी यूपी सरकार को 48 घंटे की मोहलत

दुर्भाग्य है धर्मयुद्ध के लिए निकलना पड़ रहा: शंकराचार्य स्वामी ने कहा गोमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग को लेकर धर्मयुद्ध यात्रा जारी

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की 'धर्मयुद्ध यात्रा' रायबरेली से लखनऊ की ओर बढ़ रही है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार को गोमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने के लिए दिए गए 40 दिनों के अल्टीमेटम में अब केवल दो दिन शेष होने की चेतावनी दी है। वह जल्द ही उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से मिलकर अपनी रणनीति साझा करेंगे।

रायबरेली। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि काशी से शुरू हुई उनकी धर्मयुद्ध यात्रा आगे लखनऊ तक जारी रहेगी और उत्तर प्रदेश सरकार को गोमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने के लिए दिए गए 40 दिन के समय में अब केवल दो दिन शेष रह गए हैं।

शंकराचार्य से जुड़े यश पांडेय ने रविवार को बताया कि एक रात के प्रवास के बाद शंकराचार्य की धर्मयुद्ध यात्रा रायबरेली से आगे बढ़ गई है और वह अगले पड़ाव के लिए उन्नाव रवाना हो गए। आगे उनका लखनऊ पहुंचकर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से मुलाकात का कार्यक्रम प्रस्तावित है।

बताया गया कि शंकराचार्य शनिवार को रायबरेली पहुंचे थे, जहां उन्होंने भाजपा समर्थित विधायक मनोज पांडेय के भतीजे यश पांडेय के आवास पर रात्रि विश्राम किया। रविवार सुबह लगभग 10 बजे वह उन्नाव के लिए रवाना हो गए। प्रस्थान से पहले सुबह उन्होंने मीडिया से बातचीत की।

मीडिया से बातचीत में शंकराचार्य ने कहा कि उन्होंने वाराणसी से शंखनाद कर धर्मयुद्ध यात्रा की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य सनातन धर्म और गोमाता की रक्षा के मुद्दे को लेकर जनजागरण करना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार को गोमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने के लिए 40 दिन का समय दिया गया था, जिसमें अब केवल दो दिन शेष रह गए हैं। यदि इस अवधि में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो लखनऊ में आगे की रणनीति तय की जाएगी।

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उन्होंने कहा कि देश की बहुसंख्यक जनता ने गोमाता की रक्षा और सनातन धर्म के संरक्षण की अपेक्षा के साथ सरकारों को समर्थन दिया, लेकिन अब तक गो रक्षा से संबंधित ठोस कानून लागू नहीं हो पाया है। इस दौरान शंकराचार्य ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों का भी खंडन करते हुए कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने कहा कि उनकी धर्मयुद्ध यात्रा का उद्देश्य सनातन धर्म की रक्षा और समाज में फैली भ्रम की स्थिति को दूर करना है।

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