गुरूवार आधी रात से शुरू होगी केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल: सामान्य जनजीवन प्रभावित होने की संभावना, अस्पतालों, दवाखानों, एम्बुलेंस सेवाओं, अग्निशमन और बचाव कार्यों, दूध की आपूर्ति को छूट
लेबर कोड के विरोध में कई सेवाएं प्रभावित, आवश्यक सेवाएं मुक्त
केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की 24 घंटे हड़ताल 12 फरवरी आधी रात से शुरू। बैंकिंग, परिवहन प्रभावित रह सकते हैं। अस्पताल, एम्बुलेंस, दूध आपूर्ति व तीर्थ वाहन छूट में।
तिरुवनंतपुरम। प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की ओर से बुलायी गयी 24 घंटे की राष्ट्रव्यापी हड़ताल 12 फरवरी आधी रात से शुरू होगी, जिससे कई क्षेत्रों में व्यापक व्यवधान होने की संभावना है। अस्पतालों, दवाखानों, एम्बुलेंस सेवाओं, अग्निशमन और बचाव कार्यों, दूध की आपूर्ति और समाचार पत्र वितरण जैसी आवश्यक सेवाओं को छूट दी गई है, ताकि आम जनता को कठिनाई न हो। केरल में सबरीमाला तीर्थयात्रियों और मारामोन सम्मेलन के प्रतिभागियों को ले जाने वाले वाहनों को भी हड़ताल के प्रतिबंधों से मुक्त रखा गया है।
यह हड़ताल केंद्र सरकार की श्रम नीतियों, विशेष रूप से चार नयी श्रम संहिताओं (लेबर कोड) के कार्यान्वयन के विरोध में आयोजित की जा रही है। ट्रेड यूनियनों का तर्क है कि ये नीतियां श्रमिकों की सुरक्षा और सामूहिक सौदेबाजी के अधिकारों को कमजोर करती हैं। यूनियन नेताओं ने दावा किया है कि इस हड़ताल में संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों के करोड़ों श्रमिक भाग लेंगे। हड़ताल में सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों, सरकारी विभागों, बैंङ्क्षकग, बीमा, परिवहन, औद्योगिक प्रतिष्ठानों और विभिन्न सेवा क्षेत्रों के कर्मचारियों के शामिल होने की उम्मीद है, जिससे यह हाल के वर्षों में सबसे बड़ी समन्वित श्रमिक कार्रवाइयों में से एक बन गयी है।
कई राज्यों में सामान्य जनजीवन प्रभावित होने की संभावना है। प्रत्येक क्षेत्र में भागीदारी के स्तर के आधार पर सरकारी कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों, बैंकों और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में आंशिक या पूर्ण व्यवधान देखा जा सकता है। औद्योगिक उत्पादन और व्यावसायिक गतिविधियों के भी इससे प्रभावित होन की उम्मीद है, क्योंकि ट्रेड यूनियनों ने श्रमिकों से उस दिन काम से दूर रहने का आह्वान किया है।
यूनियनों ने कहा है कि इस विरोध प्रदर्शन का उद्देश्य मजबूत सामाजिक सुरक्षा उपायों, श्रम अधिकारों की सुरक्षा और उन नीतिगत बदलावों के लिए दबाव बनाना है जो श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक हैं। उन्होंने संकेत दिया है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आगे की कार्रवाई की जा सकती है। अधिकारियों ने किसी भी अप्रिय घटना को रोकने और हड़ताल की अवधि के दौरान आवश्यक सेवाओं का सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है।

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