38 करोड़ नए वोटरों पर शिवसेना की नजर, Gen Z को जोड़ने के लिए जल्द होगी अहम रणनीतिक बैठक
'GenZ' वोटरों को साधने की तैयारी
मुंबई। जंतर-मंतर पर हाल ही में 'जेन जी' के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शन के बाद, शिवसेना एक्शन मोड में आ गयी है। पार्टी 2029 के लोकसभा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों से पहले युवा वोटरों को जोड़ने के लिए एक लंबी अवधि की रणनीति तैयार कर रही है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना जल्द ही 'जेन जी' वोटरों तक पहुँचने के अपने कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने के लिए एक विशेष बैठक बुला सकती है।
गौरतलब है कि वर्ष 2029 तक अनुमानित 38 करोड़ युवा मतदाताओं के मतदाता सूची में शामिल होने की उम्मीद है, इसलिए पार्टी युवाओं के साथ अपना जुड़ाव मजबूत करना चाहती है। इस रणनीति के तहत, शिवसेना 'जेन जी' के साथ जुड़ने की प्रक्रिया का नेतृत्व करने के लिए एक उपयुक्त युवा चेहरे की तलाश कर रही है। सूत्रों ने बताया कि पार्टी राजनीतिक परिवारों के युवा नेताओं के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक संगठनों के युवा प्रतिनिधियों पर भी विचार कर रही है, जिनका युवाओं के साथ सक्रिय जुड़ाव है। पार्टी शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में बड़े युवा सम्मेलन आयोजित करने पर भी आंतरिक रूप से चर्चा कर रही है ताकि पहली बार वोट देने वाले और युवा वोटरों से सीधे जुड़ा जा सके। रिपोर्ट है कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने पार्टी पदाधिकारियों और नेताओं को युवाओं से जुड़े मुद्दों पर तुरंत काम शुरू करने और उनकी आकांक्षाओं और चिंताओं को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम तैयार करने का निर्देश दिया है।
यह कदम जंतर-मंतर पर छात्रों के बड़े विरोध प्रदर्शन के बाद उठाया गया है, जिसमें 'जेन ज़ी' के बहुत से युवाओं ने हिस्सा लिया था। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) पेपर लीक और परीक्षा से जुड़ी समस्याओं को लेकर हुए इस विरोध प्रदर्शन ने पूरे देश का ध्यान खींचा और युवा वोटरों के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव को उजागर किया। वर्ष 2029 के चुनावों में युवाओं की अहम भूमिका होने की उम्मीद है, इसलिए राजनीतिक पार्टियां इस महत्वपूर्ण वर्ग को लुभाने के लिए अपनी रणनीतियों में बदलाव कर रही हैं। संगठनात्मक प्रयासों के साथ-साथ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) नेतृत्व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के ज़रिए भी युवा वोटरों से जुड़ने की कोशिशें बढ़ा रहा है। केंद्र सरकार ने संसद में 'परीक्षा सुधार विधेयक' पहले ही पास कर दिया है, जिसका मकसद भविष्य में परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों को रोकना और देश की भर्ती और प्रवेश परीक्षा प्रणाली में भरोसा बहाल करना है।

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