केन्द्र सरकार निर्मित है देश का ईंधन संकट : सरकार में बैठे लोगों में दूरदर्शिता का अभाव, खड़गे बोले- जनता को भुगतना पड़ रहा खामियाजा
डीजल की कीमतों में वृद्धि का महंगाई पर होता है व्यापक प्रभाव
खड़गे ने ईंधन संकट और महंगाई के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि नेतृत्व की कमी, दूरदर्शिता का अभाव और गलत नीतियों से पेट्रोल-डीजल व गैस महंगे हुए। खड़गे ने आरोप लगाया कि सरकार ने सस्ता तेल खरीदने के बावजूद जनता को राहत नहीं दी और टैक्स बढ़ाकर मुनाफा कमाया और महंगाई बढ़ी है।
नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने देश में उत्पन्न ईंधन समस्या को केन्द्र सरकार निर्मित संकट करार दिया और कहा कि इसके लिए सरकार में बैठे लोगों में दूरदर्शिता का अभाव तथा उनकी अक्षमता जिम्मेदार है। खड़गे ने शुक्रवार को यहां कहा कि देश की जनता को यह समझना होगा कि वैश्विक ईंधन संकट के साथ-साथ भारत में आर्थिक संकट की बड़ी वजह केन्द्र सरकार में नेतृत्व संकट, दूरदर्शी सोच का अभाव और अयोग्यता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस संकट का खामियाजा जनता को पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के बढ़े दामों के रूप में अपनी जेब से भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि डीजल की कीमतों में वृद्धि का महंगाई पर व्यापक प्रभाव होता है और इससे पूरे देश में महंगाई की श्रृंखलाबद्ध मार पड़ती है, जिसका असर उद्योगों, किसानों और घरेलू बजट पर होता है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के समय सरकार ने स्थिति को सामान्य बताने का प्रयास किया और कांग्रेस पार्टी द्वारा उठाए गए सवालों को खारिज किया है। उनका कहना था कि रूस से तेल खरीद को लेकर मार्च में अमेरिका ने 30 दिन की छूट की अनुमति देने जैसे अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने सवाल किया कि आखिर सराकर ने देश को ऐसी स्थिति में क्यों पहुंचा दिया कि भारत को अनुमति मांगनी पड़े।
खड़गे ने कहा कि चुनाव के दौरान केंद्र सरकार यह संदेश देती रही कि सब कुछ सामान्य है, लेकिन अब संकट बढ़ने पर सरकार लोगों को घर से काम करने और ईंधन बचाने की सलाह दे रही हैं। उन्होंने यह भी वह कि जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें कम थीं, तब केंद्र सरकार ने आम जनता को राहत नहीं दी, बल्कि केंद्रीय करों के माध्यम से भारी राजस्व अर्जित किया। उन्होंने सवाल किया कि अब महंगाई का बोझ आम जनता पर क्यों डाला जा रहा है।

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