विजिन्जम इंटरनेशनल सीपोर्ट: भारत का उभरता ग्लोबल ट्रांसशिपमेंट हब, समुद्र के बीच बनाई जा रही सड़क

विजिन्जम पोर्ट: भारत का नया समुद्री गेम-चेंजर

विजिन्जम इंटरनेशनल सीपोर्ट: भारत का उभरता ग्लोबल ट्रांसशिपमेंट हब, समुद्र के बीच बनाई जा रही सड़क

केरल का विजिन्जम पोर्ट जनवरी 2026 में 1.23 लाख TEUs हैंडल कर वैश्विक स्तर पर 83वें स्थान पर पहुँचा। ₹16,000 करोड़ के दूसरे चरण के विस्तार से इसकी क्षमता 5.7 मिलियन TEUs हो जाएगी।

तिरुअनंतपुरम। केरल के तिरुअनंतपुरम स्थित विजिन्जम इंटरनेशनल सीपोर्ट तेजी से भारत के समुद्री व्यापार के नक्शे पर छा रहा है। यह भारत का पहला गहरा समुद्री ट्रांसशिपमेंट पोर्ट है, जो अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट्स पर अपनी रणनीतिक स्थिति के कारण तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यह फुल ऑटोमेटिक है, जिसे मशीनों से कंट्रोल किया जाता है। यहां समुद्र के बीच करीब तीन किलोमीटर लंबी सड़क बनाई जा रही है। जनवरी 2026 में विजिन्जम पोर्ट ने अब तक का सबसे बड़ा मासिक कंटेनर थ्रुपुट दर्ज किया। पोर्ट ने 1 लाख 23 हजार 092 ट्वेंटी फुट इक्विवेलेंट यूनिट्स हैंडल किए, जो अब तक का सर्वोच्च आंकड़ा है। इसी महीने में 62 जहाजों को संभाला गया और ग्रॉस क्रेन रेट 30.12 कंटेनर लिफ्ट्स प्रति घंटा तक पहुंचा। इन उपलब्धियों के साथ पोर्ट वैश्विक कंटेनर हैंडलिंग में 83वें स्थान पर पहुंच गया है। दिसंबर, 2024 से जनवरी, 2026 तक यहां 50 से अधिक अल्ट्रा लार्ज कंटेनर वेसल्स (399 मीटर से लंबे) सफलतापूर्वक हैंडल किए जा चुके हैं। 

फेज-2 विस्तार: 16 हजार करोड़ का मेगा निवेश

अदानी विजिंजम पोर्ट प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ प्रदीप जयरामन ने बताया कि 24 जनवरी, 2026 को अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड ने विजिन्जम पोर्ट के दूसरे चरण के विस्तार की औपचारिक शुरुआत की। इस चरण में 16 हजार करोड़ रुपए का अतिरिक्त निवेश किया जा रहा है, जिससे कुल निवेश 30 हजार करोड़ रुपए के आसपास पहुंच जाएगा। यह केरल में अब तक का सबसे बड़ा निजी निवेश है।

विस्तार के प्रमुख बिंदु

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- कंटेनर बर्थ की लंबाई 800 मीटर से बढ़ाकर 2000 मीटर।
- ब्रेकवॉटर की लंबाई बढ़ाकर लगभग 3900 मीटर।
- वार्षिक क्षमता 1 मिलियन टीईयू से बढ़ाकर 5.7 मिलियन ट्वेंटी फुट इक्विवेलेंट यूनिट्स (2028-29 तक)।
- अत्याधुनिक ऑटोमेशन, 21  ऑटोमेटेड एसटीएस क्रेन और 45 आरएमजी क्रेन सहित आधुनिक सुविधाएं।
- यह विस्तार भारत को कोलंबो, सिंगापुर जैसे विदेशी ट्रांसशिपमेंट हब पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा और देश को वैश्विक समुद्री व्यापार में मजबूत स्थिति दिलाएगा।

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लॉजिस्टिक्स ईकोसिस्टम को मजबूत करने के कदम

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केरल सरकार ने हाल ही में विजिन्जम के आसपास दो मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क की मंजूरी दी है। कॉनकोर और सेंट्रल वेयरहाउस कॉपरेशन की ओर से विकसित ये पार्क पोर्ट की क्षमता को और मजबूत करेंगे। इसके अलावा पोर्ट से सटे क्षेत्र में 550 एकड़ से अधिक भूमि की पहचान की है, जहां पोर्ट-लिंक्ड इंडस्ट्रियल क्लस्टर और लॉजिस्टिक्स पार्क विकसित किए जाएंगे। विजिन्जम इंटरनेशनल सीपोर्ट न केवल केरल बल्कि पूरे भारत के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो रहा है। यह मैरीटाइम विजन 2030 और अमृत काल विजन 2047 के लक्ष्यों को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जिससे भारत वैश्विक समुद्री व्यापार में एक प्रमुख खिलाड़ी बन सकेगा।

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