जासूसी के आरोप में श्रीलंकाई नौसेना ने तमिलनाडु के 25 मछुआरों को किया गिरफ्तार, परिवारवालों ने लगाई केंद्र सरकार से मदद की गुहार
श्रीलंकाई नौसेना ने 25 भारतीय मछुआरों को पकड़ा
श्रीलंकाई नौसेना ने सोमवार को पाक जलडमरुमध्य में 25 भारतीय मछुआरों को गिरफ्तार कर उनकी नावें जब्त कर लीं। ये मछुआरे पुडुचेरी के करियाकल के निवासी हैं और उन पर सीमा उल्लंघन का आरोप है।
चेन्नई। तमिलनाडु के 25 मछुआरों को सोमवार को श्रीलंका की नौसेना ने पाक जलडमरुमध्य क्षेत्र में मछली पकड़ते समय गिरफ्तार कर लिया। जानकारी के अनुसार, मछुआरे दो मशीन वाली नावों में कल रात समुद्र में उतरे थे और अपने पारंपरिक पानी में मछली पकड़ रहे थे, तभी श्रीलंकाई नौसेना ने उन्हें रोक लिया। मछुआरों को अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा (आईएमबीएल) पार करने के बाद श्रीलंकाई जलक्षेत्र में मछली पकडऩे के आरोप में गिरफ्तार किया गया और उन्हें कांकेसंथुराई तट ले जाया गया। उनकी दो नावों को भी नौसेना ने आगे की कार्रवाई के लिए जब्त कर लिया।
बताया जा रहा है कि मछुआरे केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के करियाकल के रहने वाले थे। यह घटना मुख्यमंत्री एम के स्टालिन के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील करने के एक दिन बाद हुई है कि वे चार दशकों से ज्यादा समय से राज्य में बसे श्रीलंकाई तमिल शरणार्थियों के सामने मौजूद कानूनी उलझन को खत्म करें और इस मामले में मानवीय नजरिया अपनाएं और उन्हें नागरिकता या दीर्घकालीन वीजा देने पर विचार करें।
सीएम स्टालिन ने कल रात प्रधानमंत्री मोदी को लिखे एक अद्र्व सरकारी पत्र में कहा, दशकों से रहने और सामाजिक ताने-बाने में घुलने-मिलने के बावजूद, कई लोगों के पास नागरिकता या दीर्घकालीन वीजा स्टेटस जैसे टिकाऊ कानूनी समाधान नहीं हैं। आज की तारीख में लगभग 89,000 लोग तमिलनाडु में रह रहे हैं, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा 30 साल से ज्यादा समय से भारत में रह रहा है, और उनमें से लगभग 40 प्रतिशत भारतीय धरती पर पैदा हुए हैं।
मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा कि श्रीलंकाई तमिल शरणार्थियों का आना 1983 में द्वीप देश में जातीय अल्पसंख्यक तमिलों के खिलाफ हुई हिंसा के बाद शुरू हुआ। उन्होंने कहा, 1983 से तमिलनाडु में एक के बाद एक सरकारों ने केंद्र सरकार के समर्थन और सहमति से श्रीलंका में जातीय संघर्ष से भागे श्रीलंकाई तमिलों को रहने की जगह, मदद, शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल दी है। हालांकि, राज्य ने प्रतिबद्वता और दया के साथ अपनी मानवीय जिम्मेदारियों को पूरा किया है, लेकिन ये लोग लंबे समय से कानूनी अनिश्चितता की स्थिति में हैं।
अलग-अलग मछुआरा एसोसिएशन ने मछुआरों की गिरफ्तारी की बार-बार होने वाली घटनाओं की निंदा की और केंद्र और राज्य सरकारों से आग्रह किया कि वे उनकी रोजी-रोटी बनाए रखने और पाक जलडमरुमध्य इलाके में उनके पारंपरिक मछली पकडऩे के अधिकार को बहाल करने के लिए एक स्थायी समाधान खोजें।

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