1887 में भवन निर्माण और संग्रहालय स्थापना में 5,10,036 रुपए का आया था खर्चा
ग्यारह साल में कितने दर्शकों ने देखा संग्रहालय
सन् 1876 ई. में जब प्रिंस ऑफ वेल्स, अल्बर्ट एडवर्ड की जयपुर यात्रा के दौरान अल्बर्ट हॉल की आधारशिला रखी गई थी। तब यह निर्धारित नहीं था कि इसका क्या उपयोग किया जाएगा।
जयपुर। सन् 1876 ई. में जब प्रिंस ऑफ वेल्स, अल्बर्ट एडवर्ड की जयपुर यात्रा के दौरान अल्बर्ट हॉल की आधारशिला रखी गई थी। तब यह निर्धारित नहीं था कि इसका क्या उपयोग किया जाएगा। हालांकि सन् 1880 ई. में महाराजा सवाई माधोसिंह द्वितीय की ओर से स्थानीय कारीगरों के उत्पादों को प्रदर्शित करने के लिए रेजीडेंट सर्जन डॉ.थॉमस होलबेन हेंडले के औद्योगिक कला का एक संग्रहालय स्थापित करने के सुझाव को मंजूरी दी गई। इसके बाद सन् 1887 ई.में अंग्रेज मिलिट्री इंजीनियर मेजर सैमुअल स्वीन्टन जैकब की देखरेख में अल्बर्ट हॉल बनकर तैयार हुआ। अब ये संग्रहालय शनिवार 21 फरवरी, 2026 को अपना 140वां स्थापना दिवस मनाएगा।
हेंडले ने दरबार को बताया तीन मिलियन से अधिक दर्शक आए
पुरातत्व विभाग के अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार सन् 1898 ई. में अपने प्रस्थान की पूर्व संध्या पर हेंडले ने दरबार को यह लिखकर अवगत कराया कि संग्रहालय में दर्शकों की संख्या औसतन वार्षिक एक चौथाई मिलियन से अधिक थी। साथ ही ग्यारह वर्षों में तीन मिलियन से अधिक दर्शकों ने अवलोकन किया था। इससे पहले सन् 1887 ई. में अल्बर्ट हॉल में भवन निर्माण व संग्रहालय स्थापना में कुल राशि 5 लाख 10 हजार 036 रुपए का व्यय आया था। संग्रहालय भवन बनाने के कार्य में सुपरवाइजर मीर तजम्मुल हुसैन, तीन नक्शानवीस शंकरलाल, छोटेलाल और रामबक्श के साथ ही चन्दर और तारा कारीगर थे।
अब 18 दीर्घाओं में सजा पुरा सामग्री का खजाना
21 फरवरी, 1887 ई. में अल्बर्ट हॉल संग्रहालय को आम-जन के देखने के लिए खोला गया था। इस दौरान संग्रहालय की सामग्री 4 श्रेणियों में विभक्त थीं। वहीं साल 2007-08 में संग्रहालय के जीर्णाद्धार एवं संरक्षण कार्य में लगभग 7 करोड़ की राशि का व्यय हुआ। अब यहां 18 दीर्घाओं में विभिन्न पुरा सामग्रियां प्रदर्शित हैं। जिनमें कारपेट हॉल, अन्तरराष्ट्रीय दीर्घा, पोट्री दीर्घा, मूर्ति दीर्घा, हथियार दीर्घा, धातु दीर्घा, लाख सामग्री दीर्घा, पेंटिंग दीर्घा, सिक्का दीर्घा, मार्बल दीर्घा, वेशभूषा दीर्घा, मिस्त्र कला दीर्घा सहित अन्य दीर्घाएं शामिल है।

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