भारत ‘पैक्स सिलिका’ में शामिल : अमेरिका के साथ घोषणा पत्र पर किए हस्ताक्षर, तकनीक एवं आर्थिक-रणनीतिक साझेदारी की दिशा में बड़ा कदम
हम अपनी मजबूरी का फायदा उठाने वालों को ना कह रहे
भारत सिलिकॉन जैसे महत्पपूर्ण दुर्लभ खनिजों की पूरी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को विविधीकृत और सशक्त बनाने के लिए अमेरिका की अगुवाई में गठित चुनिंदा देशों के गठबंधन ‘पैक्स सिलिका’ में औपचारिक रूप से शामिल हो गया।
नई दिल्ली। भारत सिलिकॉन जैसे महत्पपूर्ण दुर्लभ खनिजों की पूरी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को विविधीकृत और सशक्त बनाने के लिए अमेरिका की अगुवाई में गठित चुनिंदा देशों के गठबंधन ‘पैक्स सिलिका’ में औपचारिक रूप से शामिल हो गया। भारत ने कहा है कि इस पहल का उद्देश्य वैश्विक सिलिकॉन आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित और लोकतांत्रिक रूप से संचालित करना है। सिलिकॉन सेमीकंडक्टर और डिजिटल प्रौद्योगिकी उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण खनिज है। यहां भारत मंडपम में एआई इम्पैक्ट समिट-2026 के दौरान एक विशेष समारोह में भारत और अमेरिका की ओर से ‘पैक्स सिलिका’ घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए। गठबंधन में भारत का जुड़ाव दोनों देशों के बीच तकनीक एवं आर्थिक-रणनीतिक साझेदारी की दिशा में बड़ा कदम बताया गया है।
यह समझौता भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है : वैष्णव
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह समझौता वैश्विक तकनीक और सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। आज पैक्स सिलिका पर हस्ताक्षर किए गए, जो सेमीकंडक्टर आपूर्ती श्रृंखला, इसके निर्माण और चिप डिजाइन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, ताकि हमारे देश में सेमीकंडक्टर का पूरा माहौल अच्छी तरह स्थापित हो सके। यह घोषणा आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा, तकनीकी संप्रभुता और एआई की वैश्विक दौड़ को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच अमेरिका-भारत के बढ़ते सहयोग को दर्शाती है।
हम अपनी मजबूरी का फायदा उठाने वालों को ना कह रहे हैं : हेलबर्ग
इस मौके पर अमेरिकी आर्थिक मामलों के उपमंत्री जैकब हेलबर्ग ने कहा कि यह समझौता केवल कागज पर एक करार नहीं है, बल्कि एक साझा भविष्य का रास्ता है। हम साथ मिलकर यह कहते हैं कि आर्थिक सुरक्षा ही राष्ट्रीय सुरक्षा है। संप्रभुता किसी वैश्विक दफ्तर या नौकरशाही से नहीं आती। यह उन निर्माताओं से आती है, जो आज इस कमरे में मौजूद हैं। यह घोषणा एआई के क्षेत्र में नए आविष्कारों को बढ़ावा देने वाला है। साथ ही, यह तकनीकी विकास को रोकने की कोशिशों के खिलाफ खड़े होने का एक संकल्प है। अमेरिकी उपमंत्री ने प्राचीन इतिहास के एक सबक का जिक्र करते हुए कहा कि सिकंदर ने एक बार कहा था कि एशिया के लोग इसलिए गुलाम थे क्योंकि उन्होंने ‘ना’ शब्द बोलना नहीं सीखा था। हमारे दोनों राष्ट्रों की नींव ‘ना’ शब्द पर टिकी है। इसलिए आज जब हम पैक्स सिलिका घोषणापत्र पर हस्ताक्षर कर रहे हैं, तो हम अपनी मजबूरी और निर्भरता का फायदा उठाने वालों को‘ना’कहते हैं, और हम ब्लैकमेल को ‘ना’ कहते हैं।
समझौता एक ‘रणनीतिक गठबंधन’: गोर
में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस समझौते को एक‘रणनीतिक गठबंधन’बताया जो 21वीं सदी की आर्थिक और तकनीकी व्यवस्था को आकार देगा। यह खनिजों और चिप बनाने से लेकर एआई के इस्तेमाल तक, पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित करेगा। पैक्स सिलिका का लक्ष्य मजबूरी वाली निर्भरता को खत्म करके भरोसेमंद औद्योगिक साझेदारी बनाना है, जो स्वतंत्र बाजारों को ताकत दे सके।

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