वर्ष 2025 की रिपोर्ट का खुलासा, प्रदेश में हर दिन हो रही 33 मौंते : तेज रफ्तार, लापरवाही से गाड़ी चलाना ; रॉंग साइड ड्राइविंग से सड़कें हो रहीं लहूलुहान
हर रोज हादसों में मौत कर रही तांडव
तेज रफ्तार, ड्रिंक एंड ड्राइव, रॉन्ग साइड ड्राइविंग और यातायात नियमों की खुली अनदेखी से प्रदेश में 2025 में 34,118 सड़क हादसे हुए। हर दिन 94। इनमें 12370 लोग मरे। हर दिन 33।
जयपुर। तेज रफ्तार, ड्रिंक एंड ड्राइव, रॉन्ग साइड ड्राइविंग और यातायात नियमों की खुली अनदेखी से प्रदेश में 2025 में 34,118 सड़क हादसे हुए। हर दिन 94। इनमें 12370 लोग मरे। हर दिन 33।
पांच गम्भीर हादसे, जिनसे दहल गए दिल
उदयपुर
19 जनवरी को सवीना क्षेत्र के पुराने अहमदाबाद बाईपास (नेला तालाब के पास) पर दो कारों की आमने-सामने भिड़ंत हुई। 120 से ऊपर की तेज रफ्तार गाड़ी के चालक के हाथ में सिगरेट और तेज संगीत के दौरान हादसा हुआ, जिसमें तीन नाबालिग समेत चार जनों की मौत हो गई।
अजमेर
9 जनवरी को पीसांगन थाना क्षेत्र के लेसवा गांव में बजरी से भरे डंपर से दो भाइयों की मौत हो गई।
कोटा
11 जनवरी को मार्बल चौराहे के पास तेज रफ्तार कार (थार) ने सात माह की मासूम बच्ची लक्ष्मी को टक्कर मार दी।
जयपुर
रेसिंग करने के दौरान 10 जनवरी को पत्रकार कॉलोनी क्षेत्र (खरबास सक्रिल के पास) तेज रफ्तार ऑडी कार ने करीब 140 की स्पीड से सड़क किनारे ठेलों और पैदल चल रहे लोगों को कुचल दिया। एक व्यक्ति की मौत हुई और 16 से अधिक घायल हुए।
जोधपुर
20 जनवरी को जोधपुर-जैसलमेर एनएच (अरना झरना या केरू के पास) पर बस और टैंकर-ट्रेलर की भीषण टक्कर हुई। एक बाइक सवार को बचाने की कोशिश में हादसा हुआ, जिसमें 4 लोगों की मौत हो गई और 20 से अधिक घायल हुए।
एक नजर में हादसे और मौतों का सच
जनवरी 2025 से जनवरी 2026 के बीच सामने आए आंकड़े चिंताजनक तस्वीर पेश करते हैं। इस अवधि में हजारों सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों की जान गई। आंकड़े बताते हैं कि कुछ महीनों में हादसों और मौतों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई, जबकि बाद के महीनों में हल्की कमी जरूर दर्ज की गई है।
प्रदेश में सड़क हादसों के कारण
ओवर स्पीडिंग: 4221 हादस।
नशे में ड्राइविंग से: 108 हादसे।
गलत साइड ड्राइविंग: प्रदेश में ट्रकों-भारी वाहनों सहित बहुत हादसे होते हैं।
ध्यान भटकना (डिस्ट्रैक्टेड ड्राइविंग): मोबाइल के उपयोग से।
कमजोर सड़क उपयोगकर्ताओं (वल्नरेबल रोड यूजर्स) की असुरक्षा: 61 प्रतिशत मौतें दुपहिया वाहन चालकों, 45 प्रतिशत पैदल यात्रियों,16 प्रतिशत हादसे साइकिल चालकों से होते हैं। ये हादसे हेलमेट नहीं पहनने, फुटपाथों की कमी और पाकिंर्ग से रास्ता अवरुद्ध होने से होते हैं।
बुनियादी ढांचे की खामियां: सड़कों की खराब स्थिति, अपर्याप्त ट्रैफिक साइन, खराब डिजाइन वाले चौराहे, रोशनी की कमीऔर अतिक्रमण से हादसे होते हैं।
पशुजनित खतरे: सड़कों पर आवारा पशु के अचानक आने से हादसे होते हैं।
अन्य कारक: चालक थकान, अनियंत्रित चालक, मौसमी प्रभाव और वाहनों भी वृद्धि भी बड़ा कारण है।
समाधान और निवारक उपाय
राजस्थान सरकार ने राजस्थान रोड सेफ्टी एक्शन प्लान (2025-2033) लॉन्च किया है, जिसका लक्ष्य 2030 तक हादसों में 50 प्रतिशत और 2033 तक 75 प्रतिशत कमी लाना है।
ओवर-स्पीडिंग रोकी जाए।
स्पीड ब्रेकर, ट्रैफिक-कैल्मिंग डिवाइस और बेहतर साइनेज। ब्लैकस्पॉट (हाई-रिस्क क्षेत्र) की पहचान की जाए।
शिक्षा, जागरूकता अभियान चलाए जाएं। युवाओं के लिए ऐप.बेस्ड अलर्ट सिस्टम बने।
नशे में ड्राइविंग पर रोक लगे।
शिक्षा, मीडिया कैंपेन, टीवी, सोशल मीडिया और ड्राइविंग स्कूलों में अनिवार्य ट्रेनिंग कराई जाए।
वाहनों में अल्कोहल इंटरलॉक डिवाइस और ड्राइवर मॉनिटरिंग सिस्टम लगें।
गलत साइड ड्राइविंग और लेन ड्राइविंग हो।
पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथ, क्रॅसिंग और लाइटिंग, साइकिल ट्रैक बनाए जाएं।
कम्युनिटी प्रोग्राम जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में हेलमेट वितरण और जागरूकता की जाए।
सड़क डिजाइन में सुधार हो, अतिक्रमण हटाने के लिए स्थाई अभियान चलाएं।
आवारा पशुओं को हटाने के लिए लोकल बॉडीज को जिम्मेदारी, पशु चराई क्षेत्र अलग किए जाएं।
क्या कहते हैं आंकड़े
अक्टूबर 2025 में सबसे अधिक 3563 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। नवंबर और दिसंबर में मामूली गिरावट रही। जनवरी 2026 में दुर्घटनाओं और मौतों में कमी आई है।
प्रदेश में आमजन को यातायात नियमों के प्रति जागरुक करने के साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी है। इसका परिणाम है कि इस बार सड़क हादसों में मौतों की संख्या में कमी आई है। पुलिस का लगातार जागरुकता अभियान और सख्ती चलती रहेगी। आमजन से अपील है कि लेन सिस्टम को फॉलो करते हुए यातायात नियमों का पालन करें।
बीएल मीणा, एडीजी टै्रफिक राजस्थान
सड़कों पर अवैध कट कम करें। कट आने से पहले रंबल ्ट्रिरप लगाएं ताकि चलाने वाले कट के बारे में सचेत हो जाएं। कट की डिजाइन में अहम बदलाव होने चाहिए, ताकि कट पार करने वाला खुला को सुरक्षित रखते हुए धीरे से पार कर सके।
प्रकाश बोहरा,
महासचिव होटल एसोसिएशन जयपुर
प्रशासन को सड़क हादसों को रोकने के लिए जनजागरुकता अभियान चलाने चाहिए। डिं्रग एंड ड्राइव पर पूरी तरह से सख्ती करनी चाहिए। चालान ही समाधान नहीं है। जागरुकता भी हादसों में कमी ला सकती है।
वर्तिका सैन,
प्रदेश मंत्री महिला मोर्चा, राजस्थान
प्रदेश में बढ़ रहे सड़क हादसों को लेकर आमजन को यातायात नियमों के प्रति जागरुक होना चाहिए। वहीं प्रशासन को समय-समय पर जागरुकता अभियान चलाकर वाहन चालकों को समझाइश करनी चाहिए।
श्रीकृष्ण तिवारी,
सामाजिक कार्यकर्ता
प्रदेश में सड़क हादसों को रोकने के लिए आमजन को यातायात नियमों के प्रति जागरुक होना होगा। वहीं पुलिस को लापरवाही तरीके से वाहन चलाने और यातायात नियमों की अवेहलना करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी होगी।
अजय यादव,
संगठित महामंत्री समाचार पत्र वितरक महासंघ जयपुर
कानून की सख्ती से पालना होनी चाहिए। यातायात नियमों का उल्लंघन करने पर डिजिटल तरीके से यानि एआई का उपयोग करते हुए चालान की कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं नाबालिगों के ड्राइव करने पर पूरी तरह से रोक लगनी चाहिए।
डॉ. नीरज जैन, डायरेक्टर एडमिशन पूर्णिमा ग्रुप
प्रदेश में रोड सेफ्टी पॉलिसी, ब्लैक स्पॉट पहचान, ई-चालान प्रणाली प्रभावी तरीके से लागू हो। ब्लैक स्पॉट पर बेहतर कैमरे लगाए जाएं। सरकार चालान बढ़ा सकती है लेकिन असली सुधार तब होगा जब हम खुद जिम्मेदारी से वाहन चलाएंगे।
हिना वाधवानी,
संस्थापिका दिव्यांशी
जन सेवा संस्थान
पहला हादसा: टोंक रोड पर 17 फरवरी 2026 को हुए सड़क हादसे में मौत का शिकार हुए मोहम्मद सादिक की पत्नी सनव्वर का कहना है कि ऐसा लग रहा है सारी दुनिया उजड़ गई। सब खत्म हो गया।
दूसरा हादसा: 16 फरवरी 2026 को कांटा चौराहा झोटवाड़ा में रात करीब 12 बजे स्कॉर्पियो की टक्कर से स्कूटी सवार नीम का थाना निवासी मोहित और भरतपुर के कुम्हेर निवासी वीरेन्द्र की मौत हो गई। मोहित के पिता का कहना है कि बेटा पढ़ाई में होशियार था, उसका सपना सरकारी नौकरी में जाने का था। हादसे ने सब छीन लिया।

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