भारत की अर्थव्यवस्था को 2025 ने दी नई रफ्तार : महंगाई काबू में, निवेश और शेयर बाजार ने बनाया नया रिकॉर्ड
घरेलू निवेशकों ने संभाला शेयर बाजार
साल 2025 भारत की अर्थव्यवस्था के लिए टर्निंग पॉइंट रहा। आईएमएफ ने जीडीपी ग्रोथ 6.9% आंकी। महंगाई काबू में रही, रेपो रेट घटा, निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा मिला। सर्विस एक्सपोर्ट, रेमिटेंस और घरेलू निवेशकों के दम पर शेयर बाजार में रिकॉर्ड आईपीओ और मजबूत तेजी दर्ज हुई।
नई दिल्ली। साल 2025 भारत की अर्थव्यवस्था के लिए किसी टर्निंग पॉइंट से कम नहीं रहा। कभी महंगाई पर ब्रेक लगा, तो कभी निवेश ने रफ्तार पकड़ी। शेयर बाजार में रिकॉर्ड बने, ब्याज दरों ने राहत दी और भारत एक बार फिर दुनिया की सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था बनकर उभरा। सरकारी नीतियों, आरबीआई के फैसलों और घरेलू निवेशकों के भरोसे ने मिलकर इकोनॉमी की गाड़ी को फुल स्पीड में दौड़ाया।
सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना भारत :
साल 2025 में भारत फिर दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (आईएमएफ) ने भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 6.9 फीसदी कर दिया। अगले फाइनेंशियल ईयर के लिए भी ग्रोथ अनुमान मजबूत रखा गया। इसके पीछे इनकम टैक्स राहत, आसान मॉनेटरी पॉलिसी, जीएसटी रिफॉर्म और अमेरिका के साथ संभावित ट्रेड डील जैसे बड़े कारण रहे।
इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग पर जोर :
आईएमएफ और आरबीआई के अनुसार, साल 2025 में इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में सरकारी निवेश से विकास को काफी गति मिली।
सर्विस एक्सपोर्ट और रेमिटेंस ने संभाला मोर्चा :
इतना ही नहीं, इस वर्ष आईटी, बीपीओ, कंसल्टिंग और रिमोट हेल्थ/एजुकेशन जैसी सेवाओं का निर्यात मजबूत रहा। आईएमएफ की रिपोर्ट के अनुसार, मजबूत सेवा निर्यात और रेमिटेंस ने चालू खाता संतुलन बनाए रखने में मदद की, भले ही ऊर्जा की कीमतें और टैरिफ संबंधी अनिश्चितता रही।
महंगाई पर काबू और सस्ता लोन :
इसके अलावा, अक्टूबर 2025 में खुदरा महंगाई केवल 0.25 फीसदी रही, जो आरबीआई के 4 फीसदी लक्ष्य से बहुत कम है। वहीं दिसंबर एमपीसी बैठक में आरबीआई ने रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट घटाकर 5.25 फीसदी कर दिया। इसी के साथ इस साल चौथी बार केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट को कम किया है, जिससे लोगों को लोन लेना आसान हो गया और आर्थिक गतिविधि को बढ़ावा मिलेगा।
शेयर बाजार में रिकॉर्ड उछाल :
अक्टूबर 2024 से सितंबर 2025 तक 86 आईपीओ ने लगभग 1.71 लाख करोड़ रुपए जुटाए, जो पिछले साल से तकरीबन दोगुना है। नई लिस्टिंग्स ज्यादातर ओवरसब्सक्राइब हुईं और निफ्टी से लगभग चार गुना बेहतर रिटर्न दिया। यह घरेलू निवेशकों, म्यूचुअल फंड्स और रिटेल निवेश से संभव हुआ।
घरेलू निवेशकों ने संभाला शेयर बाजार :
हालांकि इस दौरान विदेशी निवेश अस्थिर रहे। वहीं घरेलू निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार को मजबूत बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई, एसआईपी, बढ़ते डीमैट अकाउंट्स और गिरावट पर खरीदारी की मानसिकता ने बाजार को मजबूती प्रदान की।

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