मनरेगा में पहले काम के बदले बजट और अब बजट के बदले काम : जूली
हमारे समय में काम के बदले बजट दिया जाता था
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने मनरेगा योजना के नाम और स्वरूप में बदलाव को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इससे ग्रामीण रोजगार प्रभावित होगा और पलायन बढ़ेगा। जूली ने केंद्र व राज्य सरकार पर कर्ज बढ़ाने, ब्यूरोक्रेसी हावी होने और जनविरोधी नीतियों का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आगामी निकाय व पंचायत चुनाव में जनता सरकार को जवाब देगी।
जयपुर। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने मनरेगा योजना के नाम बदलने पर एक बार फिर मोदी सरकार पर निशाना साधा है।
पीसीसी में सेवादल की बैठक में शामिल होने के बाद मीडिया से बात करते हुए जूली ने कहा कि यूपीए सरकार में ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों का पलायन रोकने के लिए यह योजना लाई गई थी। हमारे समय लोगों को गांव में ही रोजगार की गारंटी देते हुए उन्हें रोजगार मुहैया कराया जाता था। हमारे समय में काम के बदले बजट दिया जाता था और अब बजट के बदले काम दिया जाएगा। ये योजना का नाम बदल देते तो हमें कोई आपत्ति नहीं थी, लेकिन इन्होंने योजना का स्वरूप बंद करके इसे बंद करने का काम किया है। आने वाले दिनों में इसके दुष्परिणाम सामने आएंगे। अब रोजगार के लिए लोग शहरी क्षेत्रों में पलायन करेंगे और गांव में श्रमिकों की कमी से एक बार फिर असमानता बढ़ेगी। जूली ने कहा कि केंद्र में मोदी सरकार और राजस्थान में भजनलाल सरकार लोगों पर कर्जा बढ़ा रही है। सरकार में लोग परेशान हैं और ब्यूरोक्रेसी हावी है। सरकार अपने डेढ़ साल के काम की तुलना हमारे 5 साल से करती है, लेकिन अधूरे काम पर मोदी सरकार के यंहा से देरी के नाम पर पल्ला झाड़ लेते हैं। इस सरकार में मंत्री विधायकों को ब्यूरोक्रेसी के रहते प्रोटोकॉल नहीं मिल रहा। आगामी निकाय पंचायत चुनाव में जनता इनको सबक सिखाएगी। हम सरकार की जनविरोधी नीतियों पर विधानसभा में सरकार को घेरेंगे।

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