फ्रांस: नए सामाजिक सुरक्षा बजट के विरोध में निजी डॉक्टरों की 10 दिनी हड़ताल शुरू, स्वास्थ्य सेवाएं चरमराईं

फ्रांस में डॉक्टरों की 10 दिवसीय हड़ताल

फ्रांस: नए सामाजिक सुरक्षा बजट के विरोध में निजी डॉक्टरों की 10 दिनी हड़ताल शुरू, स्वास्थ्य सेवाएं चरमराईं

बजट प्रस्तावों और कड़े नियंत्रणों के विरोध में फ्रांस के निजी डॉक्टरों ने सोमवार से काम बंद कर दिया है। सरकार ने सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करने हेतु कड़े कदम उठाने की चेतावनी दी है।

पेरिस। फ्रांस में निजी प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों और विशेषज्ञों ने इस वर्ष के सामाजिक सुरक्षा बजट में प्रस्तावित उपायों के विरोध में सोमवार से 10 दिनों की हड़ताल शुरू कर दी है। हड़ताल का आयोजन कर रही यूनियनों ने निजी क्लीनिकों को बंद करने और परामर्श रद्द करने या स्थगित करने का आह्वान किया है। निजी क्लीनिकों के ऑपरेशन थिएटर भी बंद रहने की संभावना है, जिसका सीधा असर सरकारी अस्पतालों पर पड़ सकता है।

फ्रेंच मेडिकल ट्रेड यूनियंस के परिसंघ (सीएसएमएफ) का कहना है कि उन्हें इस आंदोलन में 'अत्यधिक भागीदारी' की उम्मीद है। उनके 85 प्रतिशत सदस्यों ने हड़ताल पर जाने की योजना बनाई है। फ्रांस की स्वास्थ्य मंत्री स्टेफनी रिस्ट ने रविवार को कहा कि क्षेत्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों और स्वास्थ्य सुविधा प्रदाता एजेंसियों के साथ मिलकर 'देखभाल की निरंतरता बनाए रखने के लिए कदम उठाए गए हैं, ताकि इस विरोध प्रदर्शन के दौरान नागरिकों को जोखिम में न डाला जाए।'

फ्रांस के स्वास्थ्य मंत्री ने चेतावनी दी है कि यदि जरूरत पड़ी तो सरकार 'अधिग्रहण' जैसे सख्त कदम उठा सकती है। स्वास्थ्य मंत्री ने फ्रांसिसी समाचार पत्र 'ला रिपब्लिक डू सेंटर' को दिए एक साक्षात्कार में कहा, अगर जरूरत पड़ी तो हम 'जबरन काम पर बुलाने' का सहारा भी ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि वह यह सुनिश्चित करेंगी कि मरीजों का इलाज हो सके। इसके साथ ही पेशेवरों के हड़ताल करने के अधिकार का भी सम्मान किया जाएगा।

नया सामाजिक सुरक्षा वित्तपोषण कानून उन शुल्कों और अतिरिक्त फीस को नियंत्रित करने के लिए तंत्र पेश करता है जो निजी डॉक्टर वसूलते हैं, विशेष रूप से वे जो आधारभूत रिफंड दरों से अधिक हैं। सरकार स्वास्थ्य बीमा कोष (सीएनएम) को 'जनरल प्रैक्टिशनर्स' द्वारा ली जाने वाली अतिरिक्त राशि को सीमित करने की शक्ति देकर स्वास्थ्य खर्च को नियंत्रित करना चाहती है। निजी डॉक्टर इस तरह के कड़े नियंत्रणों के साथ-साथ सिक लीव के नियमों में बदलाव का भी विरोध कर रहे हैं। 1 जनवरी से, सिक लीव एक महीने में एक ही लेने का प्रावधान है। डॉक्टरों का दावा है कि अधिकारी 'तानाशाहीपूर्ण तरीके' से व्यवहार कर रहे हैं। वे नए डिजिटल प्रबंधन उपकरणों का भी विरोध कर रहे हैं।

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