भारत के टेक फ्यूचर की झलक ‘2NM चिप’: भारत पहली बार टेक्नोलॉजी के डिजाइन मैप पर मजबूती से उभरा, अश्विनी वैष्णव की उंगलियों के बीच दिखी 2ल्ले चिप
भारत के सेमीकंडक्टर सफर में नया मील का पत्थर
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 2एनएम चिप दिखाई। क्वालकॉम द्वारा भारत में डिजाइन यह उपलब्धि देश को वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बनने की दिशा में आगे बढ़ाती है।
नई दिल्ली। हाल ही में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव की एक तस्वीर ने भारत के तकनीकी क्षेत्र में एक नई दिशा को चिह्नित किया है, जिसमें उनकी दो उंगलियों के बीच एक छोटी सी 2 नैनोमीटर चिप को देखा जा सकता है। यह चिप भारत के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी मील का पत्थर साबित हो सकती है, खासकर तब जब इसे दुनिया की सबसे बड़ी सेमीकंडक्टर निमार्ता कंपनियों में से एक, क्वालकॉम द्वारा बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद स्थित अपने इंजीनियरिंग केंद्रों में डिजाइन किया गया है। इस चिप के डिजाइन का सफल टेप-आउट (अंतिम डिजाइन चरण) हाल ही में घोषित किया गया है, जो भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि है।
2एनएम चिप क्या है और क्यों है खास?
2एनएम चिप को नेक्स्ट-जेनरेशन सेमीकंडक्टर तकनीकी के रूप में जाना जा रहा है। यह चिप ट्रांजिस्टर डेंसिटी (ट्रांजिस्टर की संख्या) के मामले में अत्यधिक प्रभावी हैं, जिससे अधिक डेटा प्रोसेसिंग और कम ऊर्जा खपत संभव होती है। विशेष रूप से, यह चिप्स मौजूदा 5एनएम और 3एनएम चिप की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करती हैं। आधिकारिक तौर पर दावा किया जा रहा है कि 2एनएम चिप का उपयोग होने के बाद ऊर्जा खपत में 45% तक की कमी आएगी। यह चिप न केवल स्मार्टफोन्स, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (अक), इंटरनेट ऑफ थिंग्स और अन्य स्मार्ट गैजेट्स में भी इस्तेमाल हो सकती हैं।
भारत के लिए यह सफलता क्यों महत्वपूर्ण है?
क्वालकॉम द्वारा 2एनएम चिप का विकास भारत में करना एक बहुत बड़ा कदम है। भारत, जो पहले से ही वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की ओर अग्रसर है, अब सेमीकंडक्टर डिजाइनिंग में भी खुद को स्थापित करने की ओर बढ़ रहा है। क्वालकॉम के अनुसार, भारत में स्थित बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई उनके लिए अमेरिका के बाद दूसरा सबसे बड़ा इंजीनियरिंग टैलेंट पूल है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव का मानना है कि यह भारत के डिजाइन इकोसिस्टम की बढ़ती क्षमता का प्रमाण है।
इस चिप का प्रभाव
आने वाले समय में 2एनएम चिप का प्रभाव सिर्फ स्मार्टफोन्स तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इनका उपयोग कई अन्य क्षेत्रों में भी होगा:
स्मार्टफोन्स: आगामी प्रीमियम स्मार्टफोन्स में इन चिप का उपयोग किया जाएगा।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (अक): एआई ऐप्लिकेशंस के लिए यह चिप बहुत कारगर साबित हो सकती हैं, क्योंकि वे बड़े पैमाने पर डेटा प्रोसेसिंग में मदद करती हैं।
इंटरनेट ऑफ थिंग्स : स्मार्ट होम डिवाइस, स्मार्ट वियरेबल्स और अन्य उपकरणों में भी इन चिप का प्रभावी उपयोग होगा।
ऑटोमोटिव इंडस्ट्री: स्वचालित वाहन और कनेक्टेड कारों में भी इन चिप का इस्तेमाल हो सकता है, जो इन तकनीकों को और अधिक सक्षम बनाएगा।
डेटा सेंटर: 2एनएम चिप की ऊर्जा दक्षता और प्रोसेसिंग स्पीड डेटा सेंटर ऑपरेशंस को अधिक प्रभावी बनाएगी।
भारत की तकनीकी क्रांति
भारत का सेमीकंडक्टर डिजाइनिंग क्षेत्र एक नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। क्वालकॉम जैसी कंपनियों के बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई में स्थापित इंजीनियरिंग केंद्रों में इस तकनीक का विकास भारत के बढ़ते तकनीकी सामर्थ्य का प्रतीक है। भारत के पास अब विश्व स्तरीय डिजाइनिंग टैलेंट, उच्च गुणवत्ता वाली इंजीनियरिंग टीम और विशाल मैन्युफैक्चरिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर है, जो उसे वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में प्रमुख खिलाड़ी बना सकता है। अगर भारत इस क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करता है, तो वह न केवल अमेरिका और चीन के समकक्ष खड़ा हो सकता है, बल्कि सेमीकंडक्टर डिजाइनिंग और मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में एक वैश्विक नेता के रूप में उभर सकता है।
2एनएम चिप अब तक कहाँ बन रही हैं?
2 नैनोमीटर चिप एक नई तकनीक हैं, जो सेमीकंडक्टर उद्योग में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हैं। अभी तक इस तकनीक पर काम कर रही कुछ प्रमुख कंपनियां और उनकी फैक्ट्रियां हैं, जहां यह चिप्स विकसित या निर्माण की प्रक्रिया में हैं।
दुनिया की नंबर-1 चिप मैन्युफैक्चरर
लोकेशन: ताइवान
स्टेटस: सबसे आगे
उत्पादन: 2025 से
क्लाइंट्स लाइन में माना जा रहा है कि 18 के प्रोसेसर यहीं बनेंगे
दक्षिण कोरिया
टेक्नोलॉजी पर फोकस
लोकेशन: साउथ कोरिया
उत्पादन लक्ष्य: 2025
अमेरिका और यूरोप
अपनी 2एनएम तकनीक को 20ए / 18ए नाम से पेश कर रहा है
लोकेशन: अमेरिका, जर्मनी, आयरलैंड
फोकस: हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग, सर्वर और अक
स्टेटस: एडवांस टेस्टिंग स्टेज
अमेरिका - रिसर्च लेवल
कइट ने सबसे पहले 2ल्ले चिप का प्रोटोटाइप दिखाया
लोकेशन: न्यूयॉर्क रिसर्च लैब
उत्पादन नहीं, सिर्फ टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट
कइट की रिसर्च का फायदा ळरटउ और रें२४ल्लॅ को भी मिलता है
भारत में 2एनएम चिप कहां बन रही है?
भारत में मैन्युफैक्चरिंग नहीं, लेकिन डिजाइन हो रहा है
लोकेशन: बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई
काम: 2एनएम चिप का डिजाइन और टेप-आउट
मैन्युफैक्चरिंग: ताइवान या साउथ कोरिया में होगी
यह भारत के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है
2एनएम चिप बनाना इतना मुश्किल क्यों है?
टेक्नोलॉजी चैलेंज
एक मशीन की कीमत: 1.5 लाख करोड़ से ज्यादा
एक फैब प्लांट की लागत: 20-25 लाख करोड़।
2एनएम चिप के निर्माण की चुनौतियां
2एनएम चिप्स का निर्माण अत्यधिक जटिल प्रक्रिया है, क्योंकि इस तकनीक में बहुत छोटे ट्रांजिस्टर होते हैं जो मौजूदा तकनीकी प्रक्रियाओं की तुलना में बहुत अधिक सटीकता और अत्याधुनिक उपकरणों की आवश्यकता होती है। इसके निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री, जैसे कि हाई-प्रीसीजन मटेरियल और उन्नत पैटर्निंग तकनीक, चिप्स की निर्माण प्रक्रिया को और भी जटिल बनाती हैं।
भारत में 2एनएम चिप कब बनेगी?
भारत में अभी 2एनएम चिप नहीं बन रही, फिलहाल यह डिजाइन, टेस्टिंग में मजबूत हो रहा है
मैन्युफैक्चरिंग में आने में 5-7 साल लग सकते हैं।
अभी यह चिप केवल ताइवान, दक्षिण कोरिया और अमेरिका में बन रही है।
Related Posts
Post Comment
Latest News
09 Feb 2026 18:50:41
राज्यसभा में बजट पर विपक्ष ने कटौती, बेरोजगारी पर सवाल उठाए, जबकि सत्तापक्ष ने इसे विकसित भारत की दिशा में...

Comment List