आरसीए और परिषद के अहम की लड़ाई अब ग्राउण्ड पर बन आई : खेल परिषद ने मांगा शुल्क, बिहाणी ने एसएमएस स्टेडियम से हटाया ग्राउण्ड स्टाफ, उपकरणों पर ताला लगाया
शुल्क पर तकरार, ग्राउंड स्टाफ हटाया
जयपुर। सवाई मानसिंह स्टेडियम, जहां हाल ही में आईपीएल के सात मैचों का सफल आयोजन हुआ, अब राजस्थान क्रिकेट संघ (आरसीए) और राजस्थान खेल परिषद के बीच खिंच रही रस्साकशी का शिकार बनता दिख रहा है। घरेलू क्रिकेट को लेकर चल रहे विवाद के बीच खेल परिषद ने जहां ग्राउंड के लिए प्रतिदिन एक लाख रुपये शुल्क की मांग की है, वहीं आरसीए की एडहॉक कमेटी के कन्वीनर जयदीप बिहाणी ने स्टेडियम से ग्राउंड स्टाफ हटा दिया और उपकरणों पर ताले लगवा दिए हैं। अब यह टकराव मैदान के मेंटिनेंस तक पहुंच चुका है, जिससे क्रिकेट गतिविधियों पर भी खतरा मंडराने लगा है। प्रशासनिक खींचतान और अहंकार की इस लड़ाई में नुकसान केवल क्रिकेट और खिलाड़ियों का हो रहा है। यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो यह हरा-भरा मैदान भी राजनीति की भेंट चढ़ सकता है।
शुल्क पर तकरार, ग्राउंड स्टाफ हटाया
एडहॉक कमेटी ने सीनियर स्टेट चैंपियनशिप 'कॉल्विन शील्ड' के लिए एसएमएस स्टेडियम नि:शुल्क उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था, लेकिन खेल परिषद ने पुराने बकाया के साथ प्रतिदिन एक लाख रुपये किराए की शर्त रख दी। इस पर नाराज होकर कन्वीनर बिहाणी ने एसएमएस स्टेडियम से आरसीए का पूरा ग्राउंड स्टाफ हटा लिया और उन्हें केएल सैनी स्टेडियम में रिपोर्ट करने के निर्देश दिए। साथ ही मैदान की देखरेख के उपकरणों को भी लॉक करवा दिया गया है।
ग्राउंड की हालत बिगड़ने की आशंका
अब चिंता इस बात की है कि ग्राउंड स्टाफ और उपकरणों के अभाव में मैदान की देखरेख कैसे होगी। खेल परिषद के पास सीमित संसाधन हैं और इस स्थिति में मैदान की गुणवत्ता गिरने का खतरा है। यदि मैदान खराब होता है तो इसका सीधा असर आगामी रणजी ट्रॉफी और अन्य घरेलू टूनार्मेंटों पर पड़ेगा।
ये कहा बिहाणी ने
आरसीए की ओर से जारी प्रेस नोट में जयदीप बिहाणी ने स्पष्ट किया कि हमने एसएमएस स्टेडियम से अपना स्टाफ हटा लिया है और उपकरणों को लॉक करवा दिया है। स्टाफ को अन्य ग्राउंड्स पर शिफ्ट किया गया है। हमने परिषद से ग्राउंड मांगा था, लेकिन जब अन्य मैदान 7-8 हजार रुपये प्रतिदिन में मिल रहे हैं, तो एक लाख रुपये शुल्क देना कहां उचित होगा।

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