अमेरिका में कृषि नेताओं ने दी पतन की चेतावनी : ट्रम्प प्रशासन की नीतियों ने इस क्षेत्र में किया नुकसान, कहा- खेती में इनपुट की लागत बढ़ाना किसानों की जेब से पैसा निकालना

संघीय कर्मचारियों की छंटनी का हवाला दिया

अमेरिका में कृषि नेताओं ने दी पतन की चेतावनी : ट्रम्प प्रशासन की नीतियों ने इस क्षेत्र में किया नुकसान, कहा- खेती में इनपुट की लागत बढ़ाना किसानों की जेब से पैसा निकालना

डेटा में भी पाया गया है कि अमेरिकी किसान पिछले तीन सालों में 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक के नुकसान में है।

लॉस एंजिल्स। अमेरिका में कृषि नेताओं और संगठनों ने कई चेतावनियां जारी करते हुए कहा कि अगर मौजूदा प्रशासन की नीतियाँ जारी रहीं, तो वे अमेरिकी कृषि के बड़े पैमाने पर पतन का कारण बन सकती हैं। अमेरिका के प्रमुख कृषि संघों और अमेरिकी कृषि विभाग (यूएसडीए)  के 27 पूर्व नेताओं के एक गठबंधन ने हाल ही में अमेरिकी कांग्रेस को एक औपचारिक पत्र जारी किया। इस पत्र में कहा गया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन की अपनायी गयी नीतियों ने इस क्षेत्र को बहुत नुकसान पहुँचाया है। उन्होंने आंकड़ों के हवाले से कहा कि इस साल सभी फार्मों में से मुश्किल से आधे ही फार्म मुनाफा कमा पाएंगे। उनकी यह बात अमेरिकन फार्म ब्यूरो फेडरेशन के डेटा से मेल खाती है। इस डेटा में भी पाया गया है कि अमेरिकी किसान पिछले तीन सालों में 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक के नुकसान में है।

इस खत में लिखा गया है, खेती में इस्तेमाल की जाने वाली विभिन्न प्रकार की सामग्री (इनपुट) पर आयात शुल्क लगाया गया है। उर्वरक से लेकर, खेती के रसायन, से लेकर मशीनरी के पुर्जों तक, प्रशासन के शुल्क ने खेती में इनपुट की कीमतें बढ़ा दी हैं और पैदावार की लागत को जिंसों की कीमतों से काफी ऊपर कर दिया है। इसमें कहा गया कि खेती में  इनपुट की लागत बढ़ाना अमेरिकी किसानों की जेब से पैसा निकालना है। पत्र में आगे कहा गया है, इस प्रशासन की व्यापार नीतियों और कांग्रेस की कार्रवाई की कमी ने हमारी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को कम करके, निर्यात बाजारों को बाधित करके और कमोडिटी कीमतों को कम करके अमेरिकी किसानों को भी नुकसान पहुँचाया है।

यह दो पिछली चेतावनियों के बाद आया है। पहली चेतावनी अक्टूबर 2025 में 215 से अधिक कृषि संगठनों का एक पत्र के जरिए दी गयी और बाद में इस साल 15 जनवरी को 56 कृषि समूहों का एक पत्र जारी किया गया। इनमें देश में बिगड़ती कृषि अर्थव्यवस्था के मुख्य कारणों के रूप में व्यापार संरक्षणवाद, श्रम की कमी और संघीय कर्मचारियों की छंटनी का हवाला दिया।

 

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