मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द करना कानून के विपरीत : फैसला वापस ले आयोग, मनु सिंघवी ने कहा- फैसला पूरी तरह गलत और गैरकानूनी
अंतिम तिथि को देखते हुए उनका नामांकन वैध घोषित किया जाना चाहिए
नई दिल्ली। कांग्रेस ने मध्य प्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रद्द किये जाने को कानून के विपरीत बताते हुए बुधवार को चुनाव आयोग से हस्तक्षेप की मांग की और कहा कि कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिसके आधार पर उनका नामांकन रद्द किया जा सके। इसलिए आयोग को यह फैसला तत्काल वापस लेना चाहिए तथा उनका नामांकन पत्र स्वीकार करना चाहिए। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने पार्टी के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ तीनों चुनाव आयुक्तों से मुलाकात के बाद निर्वाचन सदन के बाहर पत्रकारों से कहा कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द करना पूरी तरह गैरकानूनी है और इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने आयोग से यह भी कहा कि राज्यसभा चुनाव में नाम वापस लेने की अंतिम तिथि को देखते हुए समय रहते उनका नामांकन वैध घोषित किया जाना चाहिए।
चुनाव आयोग से मिलने गये कांग्रेस के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल में पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल, अभिषेक मनु सिंघवी, विवेक तंखा, भूपेश बघेल, मीनाक्षी नटराजन, जयराम रमेश, रणदीप सिंह सुरजेवाला सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल थे। सिंघवी ने कहा कि रिटर्निंग अधिकारी (आरओ) ने जिस मामले का हवाला देकर नामांकन खारिज किया है, उसमें मजिस्ट्रेट ने अभी संज्ञान तक नहीं लिया है। उन्होंने कहा कि चुनाव कानून के तहत ऐसी स्थिति में किसी प्रकार के खुलासे की आवश्यकता नहीं होती, इसलिए आरओ का फैसला पूरी तरह गलत और गैरकानूनी है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि पार्टी के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों के समक्ष विस्तार से अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि मीनाक्षी नटराजन के मामले में रिटर्निंग अधिकारी का फैसला विकृत, कानूनी रूप से गलत और असमर्थनीय है। उन्होंने कहा कि जिस आधार पर नामांकन रद्द किया गया है, वह आधार कानून में मौजूद ही नहीं है। नटराजन के खिलाफ ऐसा कोई आपराधिक मामला नहीं था, जिसका उन्हें नामांकन पत्र में खुलासा करना आवश्यक होता। उन्होंने बताया कि संबंधित मामले में अदालत की ओर से केवल एक नोटिस जारी किया गया था, जिसमें उन्हें उपस्थित होकर यह बताने को कहा गया था कि मामले का संज्ञान लिया जाए या नहीं।
सिंघवी ने कहा कि किसी भी आपराधिक मामले में मजिस्ट्रेट द्वारा संज्ञान लिया जाना प्रारंभिक चरण होता है और उसके बाद ही यह तय होता है कि मामला आगे बढ़ेगा या नहीं। बिना संज्ञान लिये कोई आपराधिक मामला विधिक रूप से अस्तित्व में नहीं माना जाता। चुनाव कानून में स्पष्ट प्रावधान है कि उम्मीदवार को केवल उन्हीं मामलों का खुलासा करना होता है, जिनमें आरोप तय हो चुके हों और जिनमें दोष सिद्ध होने पर दो वर्ष या उससे अधिक की सजा का प्रावधान हो। उन्होंने कहा कि इस मामले में अभी कई कानूनी चरण शेष हैं-संज्ञान, जांच, आरोपपत्र और आरोप तय होना। इसके बावजूद रिटर्निंग अधिकारी ने इसे लंबित आपराधिक मामला मानकर नामांकन रद्द कर दिया, जो पूरी तरह गलत है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से यह भी कहा कि ऐसी त्रुटिपूर्ण व्याख्या के आधार पर किसी भी उम्मीदवार का नामांकन रद्द नहीं किया जा सकता। यह लोकतांत्रिक सिद्धांतों, समान अवसर की अवधारणा और संविधान की मूल भावना के विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के पास रिटर्निंग अधिकारी के फैसले को पलटने अथवा निरस्त करने का पूरा अधिकार है। अतीत में हरियाणा और गुजरात के मामलों में भी आयोग हस्तक्षेप कर चुका है। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि आयोग असहाय है। कांग्रेस ने आयोग से तत्काल हस्तक्षेप कर मीनाक्षी नटराजन का नामांकन स्वीकार करने की मांग की है।

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