अब रोडवेज बसों का होगा बीमा, फर्जी दुर्घटना क्लेम और बढ़ते खर्च से निपटने की तैयारी

हर माह औसतन 2.5 करोड़ रुपए तक का क्लेम भार

अब रोडवेज बसों का होगा बीमा, फर्जी दुर्घटना क्लेम और बढ़ते खर्च से निपटने की तैयारी
राजस्थान रोडवेज प्रशासन बढ़ते सड़क दुर्घटना क्लेम, फर्जी दावों और न्यायालयों में लंबित मामलों के कारण अपनी बसों का बीमा कराने पर विचार कर रहा है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो दुर्घटना पीड़ितों को समयबद्ध मुआवजा मिलने के साथ-साथ रोडवेज को भी करोड़ों रुपए के आर्थिक बोझ से राहत मिल सकती है।

जयपुर। राजस्थान रोडवेज प्रशासन बढ़ते सड़क दुर्घटना क्लेम, फर्जी दावों और न्यायालयों में लंबित मामलों के कारण अपनी बसों का बीमा कराने पर विचार कर रहा है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो दुर्घटना पीड़ितों को समयबद्ध मुआवजा मिलने के साथ-साथ रोडवेज को भी करोड़ों रुपए के आर्थिक बोझ से राहत मिल सकती है। वर्तमान में केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम-1988 और केंद्रीय मोटर वाहन नियम-1989 के तहत राज्य परिवहन उपक्रमों को वाहनों का बीमा कराने से छूट प्राप्त है।  नियम 146 के उपबंध 3 और 4 के अनुसार राज्य परिवहन निगमों के वाहनों के लिए थर्ड पार्टी बीमा अनिवार्य नहीं है। इसी वजह से राजस्थान रोडवेज सहित देश के अधिकांश राज्य परिवहन निगम अपनी बसों का बीमा नहीं कराते। बीमा नहीं होने की स्थिति में किसी भी सड़क दुर्घटना के मामले में यदि मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) कोर्ट मुआवजा तय करता है, तो पूरी राशि रोडवेज प्रशासन को अपने स्तर पर चुकानी पड़ती है। यही कारण है कि दुर्घटना क्लेम का वित्तीय दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

3700 दुर्घटना क्लेम केस लंबित
रोडवेज के खिलाफ वर्तमान में करीब 10500 न्यायिक मामले लंबित हैं। इनमें से लगभग 3700 मामले सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े क्लेम के हैं। कई मामलों में रोडवेज चालक और परिचालक दुर्घटना से इनकार करते हैं, लेकिन बाद में बस का नाम जोड़कर क्लेम दायर कर दिया जाता है। ऐसे मामलों में फर्जीवाड़े और मिलीभगत की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। रोडवेज को प्रति दुर्घटना क्लेम केस में औसतन 15 लाख रुपए तक का भुगतान करना पड़ता है। वर्तमान में रोडवेज को हर माह करीब ढाई करोड़ रुपए क्लेम राशि के रूप में चुकाने पड़ रहे हैं। इस हिसाब से सालाना वित्तीय भार 30 करोड़ रुपए तक पहुंच रहा है।

बीमा से क्या होगा फायदा 
यदि रोडवेज बसों का बीमा कराया जाता है तो दुर्घटना क्लेम के भुगतान की जिम्मेदारी बीमा कंपनी पर आ जाएगी। इससे रोडवेज के वित्तीय जोखिम में कमी आएगी और फर्जी दावों की जांच भी अधिक व्यवस्थित तरीके से हो सकेगी। साथ ही वास्तविक दुर्घटना पीड़ितों को भी मुआवजा मिलने की प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बन सकेगी। 

प्रस्ताव बनाया जा रहा है...
रोडवेज की बसों का इंश्योरेंस कराया जाए, इसका प्रस्ताव बनाया जा रहा है। इससे रोडवेज के राजस्व में बचत होगी।
-पुरुषोत्तम शर्मा, एमडी रोडवेज

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