वन और पशुपालन विभाग की पहल : बाघ-तेंदुओं की सुरक्षा के लिए बड़ा अभियान, कैनाइन डिस्टेंपर वायरस पर संयुक्त वार
श्वानों का समय पर टीकाकरण वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण
जयपुर। रणथंभौर टाइगर रिजर्व में बाघों, तेंदुओं और अन्य मांसाहारी वन्यजीवों को कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) के संभावित खतरे से सुरक्षित रखने के लिए विशेष टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक शारदा प्रताप सिंह के निर्देशानुसार रणथंभौर टाइगर रिजर्व (प्रथम) सवाई माधोपुर तथा रणथंभौर टाइगर रिजर्व (द्वितीय) करौली में वन विभाग और पशु चिकित्सा विभाग की संयुक्त टीमें अभयारण्य क्षेत्र से सटे गांवों में श्वानों का टीकाकरण कर रही हैं। अभियान के तहत सवाई माधोपुर वन मंडल के फलोदी, खंडार एवं आरओपीटी परिक्षेत्र के आमली, हलोंदा, खंडार, गणेशधाम और शेरपुर सहित विभिन्न गांवों में 25 मई से 9 जून तक श्वानों को कैनाइन डिस्टेंपर का टीका लगाया गया।
इसी प्रकार करौली वन मंडल के नैनिया की एवं मंडरायल परिक्षेत्र के खोह, डांग भावपुर, ऊंची मुवारी, हरिकी, कल्याणपुरा तथा नींदर-झरीला गांवों में 28 मई से 9 जून तक विशेष टीकाकरण अभियान संचालित किया गया। वन अधिकारियों के अनुसार कैनाइन डिस्टेंपर वायरस घरेलू एवं आवारा श्वानों से वन्यजीवों में फैल सकता है। यह संक्रमण बाघ, तेंदुआ, लकड़बग्घा समेत अन्य मांसाहारी वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। ऐसे में श्वानों का समय पर टीकाकरण वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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