तेल उत्पादन बढ़ाने में विफल केन्द्र सरकार : देश में बढ़ा संकट, गोहिल ने कहा- सरकार जो कहती हैं, वह करती नहीं

सरकार ने देश में तेल उत्पादन बढ़ाने के आवश्यक कदम नहीं उठाए

तेल उत्पादन बढ़ाने में विफल केन्द्र सरकार : देश में बढ़ा संकट, गोहिल ने कहा- सरकार जो कहती हैं, वह करती नहीं

राज्यसभा सांसद शक्ति सिंह गोहिल ने सरकार पर तेल उत्पादन बढ़ाने में विफल रहने का आरोप लगाया। दावा किया कि प्रमुख तेल फील्डों में वाटर इंजेक्शन घटने से उत्पादन प्रभावित हुआ। वहीं रायबरेली में राहुल गांधी ने चेतावनी दी कि मौजूदा आर्थिक ढांचा आने वाले “आर्थिक तूफान” को झेल नहीं पाएगा।

नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा कि केन्द्र सरकार ने तेल आपूर्ति तथा तेल उत्पादकता बढ़ाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए हैं, जिसके कारण देश में तेल का संकट बढ़ गया है और इसका खामियाजा आम जनता को झेलना पड़ रहा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तथा राज्यसभा सांसद शक्ति सिंह गोहिल ने मंगलवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सरकार ने ईंधन उत्पादन को लेकर देश की जनता से जो वायदा किया था, उसे पूरा करने में विफल रही है और इसको लेकर उन्हें जनता को जवाब देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जो कहती हैं, करती नहीं हैं। इसका उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि सरकार ने देश में तेल उत्पादन बढ़ाने के आवश्यक कदम नहीं उठाए। डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर होते रुपए की कीमत रोकने की बात करती रही, लेकिन रुपए की घटती कीमत रोकने में असफल रही।

गोहिल ने आरोप लगाया कि सरकार ने देश की तीन प्रमुख तेल फील्डों, जहां से घरेलू पेट्रोल, डीजल और गैस का बड़ा हिस्सा मिलता है, वहां वैज्ञानिक मानकों के अनुसार किए जाने वाले वाटर इंजेक्शन में भारी कमी कर दी। उन्होंने दावा किया कि मुंबई हाई में 53 प्रतिशत, नीलम में 42 प्रतिशत और हीरा फील्ड में 78 प्रतिशत तक पानी का इंजेक्शन कम हुआ, जिससे एक वर्ष में 3.690 एमएमटी का नुकसान हुआ। उनका कहना था कि तेल कुओं की उत्पादकता बनाए रखने के लिए केमिकली ट्रीटेड पानी का इंजेक्शन किया जाता है और इसके लिए वैज्ञानिक मात्रा तय होती है। यह पानी समुद्र से लेकर फिल्टराइजेशन और क्लोरीनाइजेशन प्रक्रिया के बाद उपयोग में लाया जाता है।

इस बीच लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली में कहा, सरकार जिस तरह से देश की अर्थव्यवस्था का ढांचा बदला है, वह आने वाले आर्थिक तूफान में टिक नहीं पाएगा। इसका खामियाजा देश के युवाओं, किसानों और छोटे व्यापारियों को भुगतना पड़ेगा। इसका असर अडानी-अंबानी पर नहीं पड़ेगा, क्योंकि वे अपने महलों में बैठे रहेंगे। यह झटका बहुत बुरा होगा और आने वाला समय बेहद कठिन होगा।

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