फारूक अब्दुल्ला का बड़ा बयान : जम्मू-कश्मीर सरकार को लेकर कह दी बड़ी बात, संघर्ष बढ़ने पर गंभीर आर्थिक परिणामों की दी चेतावनी
राज्य सरकार दो मिनट में शराब पर प्रतिबंध लगा सकती है
नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि यदि केंद्र सरकार राजस्व घाटे की भरपाई कर दे, तो जम्मू-कश्मीर में शराब पर प्रतिबंध तत्काल लग सकता है। उन्होंने विपक्ष पर इस मुद्दे के राजनीतिकरण का आरोप लगाया। साथ ही, उन्होंने ईरान-अमेरिका तनाव से उपजे वैश्विक ईंधन संकट और ऑनलाइन शिक्षा की चुनौतियों पर भी गहरी चिंता जताई।
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने मंगलवार को कहा कि यदि केंद्र सरकार राजस्व के नुकसान की भरपाई कर दे, तो राज्य सरकार दो मिनट में शराब पर प्रतिबंध लगा सकती है। शराब की दुकानों को लेकर चल रहे विवाद पर अब्दुल्ला ने कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से शराब का सेवन नहीं करते हैं, लेकिन उनका मानना है कि जो लोग पीते हैं, वे स्थानीय स्तर पर उपलब्ध न होने की स्थिति में इसे जम्मू-कश्मीर के बाहर से मंगवा लेंगे।
उन्होंने कहा, “मैं शराब नहीं पीता। जो पीते हैं, वे पिएंगे ही। अगर उन्हें यहां से नहीं मिलेगी, तो वे बाहर से लाएंगे। और जो लोग आवाज उठा रहे हैं, उनसे पूछिए कि शराब पीने वाले लोग कौन हैं।” साल 1977 की एक घटना को याद करते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने उनके पिता और तत्कालीन मुख्यमंत्री शेख अब्दुल्ला से राज्य में शराब की बिक्री बंद करने के लिए कहा था। उन्होंने कहा, “मेरे पिता ने उनसे कहा था कि अगर केंद्र हमें वह राजस्व दे दे, जो हम इससे कमाते हैं, तो हम इसे बंद कर देंगे। उसके बाद कुछ नहीं हुआ। ”
नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष ने तर्क दिया कि इस मुद्दे का विरोधियों द्वारा राजनीतिकरण किया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि जब पहले शराब की दुकानें खोली गयीं थी, तब विरोध क्यों नहीं हुआ था। उन्होंने कहा, “हमने शराब की दुकानें नहीं खोलीं। जिन्होंने खोलीं, तब किसी ने आवाज क्यों नहीं उठाई? हर गांव में दुकानें खुल रही थीं।” विपक्षी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) पर निशाना साधते हुए अब्दुल्ला ने आरोप लगाया कि वे केवल सरकार पर हमला करने के लिए इस मुद्दे को उठा रहे हैं। उन्होंने कहा, “वे हर बात पर हमारी आलोचना करने के लिए तैयार रहते हैं...उन्हें लगता है कि हम उनसे डरते हैं, लेकिन हम उन्हें इस तरह हराएंगे कि वे याद रखेंगे।”
हाल ही में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा शराब के सेवन पर दिये गये बयानों के बाद जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक विवाद छिड़ गया था। पीडीपी नेता इल्तिजा मुफ्ती ने उन पर मुस्लिम बहुल क्षेत्र की संवेदनशीलता को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया था। उमर ने रविवार को कहा था कि किसी को शराब पीने के लिए मजबूर नहीं किया जा रहा है और लोग अपनी मर्जी से शराब की दुकानों पर जाते हैं। आलोचना के बाद उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि उनके बयानों को राजनीतिक विरोधियों द्वारा ‘मरोड़ा’ जा रहा है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में उपलब्ध शराब केवल उन अन्य धर्मों के मानने वालों के लिए है, जिनके यहां इसके सेवन की अनुमति है।
अब्दुल्ला ने ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच गहराते ईंधन और गैस संकट पर भी चिंता व्यक्त की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मितव्ययिता की अपील पर उन्होंने कहा कि बढ़ते संकट के कारण देश कठिन स्थिति की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, “ हम ईंधन और गैस संकट का सामना कर रहे हैं और हम तबाही की ओर बढ़ रहे हैं।” अबदुल्ला ने यह भी कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए ऑनलाइन शिक्षा एक व्यावहारिक विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा, “यह दुखद है कि गरीब लोगों की ऑनलाइन शिक्षा तक पहुंच नहीं है। शिक्षा जरूरी है, लेकिन ऑनलाइन शिक्षा हर किसी के लिए संभव नहीं है।”
उन्होंने वैकल्पिक समाधान खोजने की आवश्यकता पर जोर दिया ताकि शिक्षा, विशेष रूप से वंचित छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो। संघर्ष बढ़ने पर गंभीर आर्थिक परिणामों की चेतावनी देते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि इसके नतीजे विनाशकारी हो सकते हैं। उन्होंने कहा, “इसमें कोई शक नहीं है। अगर यह संकट खत्म नहीं हुआ, अगर ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध समाप्त नहीं हुआ, तो केवल ईश्वर ही जानता है कि हमारा क्या होगा।”

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