किसानों की आत्महत्या मामला: कनार्टक भाजपा ने राज्य सरकार को घेरा, सीएम सिद्दारमैया पर लगाया किसानों के शवों पर गारंटी की राजनीति का आरोप
कर्नाटक में किसान आत्महत्या पर राजनीतिक घमासान
एनसीआरबी की रिपोर्ट में कर्नाटक किसान आत्महत्या के मामलों में दूसरे स्थान पर पहुँच गया है। भाजपा नेता आर. अशोक ने कांग्रेस सरकार पर 22.61% की वृद्धि को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार गारंटी योजनाओं के प्रचार में व्यस्त है, जबकि अन्नदाता कर्ज और फसल नुकसान के बोझ तले दब रहा है।
बेंगलुरु। कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी ने नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) की नवीनतम रिपोर्ट में राज्य में किसानों की आत्महत्या के मामलों में भारी वृद्धि दिखाये जाने पर कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर अशोक ने मुख्यमंत्री सिद्दारमैया पर 'कि्सानों के शवों पर गारंटी की राजनीति' करने का आरोप लगाया। अशोक ने गुरुवार को जारी एनसीआरबी की 'भारत में आकस्मिक मृत्यु और आत्महत्या 2024' रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि कर्नाटक में किसानों और खेतिहर मजदूरों की आत्महत्या के मामलों में 22.61 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी है। यह संख्या साल 2023 के 2,423 से बढ़कर 2024 में 2,971 हो गयी है।
इस वृद्धि को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाते हुए भाजपा नेता ने पूछा कि क्या यह उछाल सिद्दारमैया प्रशासन की विफलता को दर्शाता है, खासकर ऐसे समय में जब कई अन्य राज्यों में ऐसी मौतों में कमी आयी है। अशोक ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार की 'किसान विरोधी नीतियों' की पोल नवीनतम एनसीआरबी आंकड़ों ने खोल दी है। उन्होंने दावा किया कि किसान आत्महत्या के मामले में कर्नाटक का देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य बनना सरकार के 'मॉडल शासन' का प्रमाण है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, "कर्नाटक किसान आत्महत्याओं के मामले में देश में दूसरे नंबर पर पहुंच गया है। यह कांग्रेस सरकार के प्रशासन का असली चेहरा है।"
भाजपा नेता ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि वह अपनी गारंटी योजनाओं के विज्ञापनों और प्रचार अभियानों पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, जबकि राज्य भर के किसान फसल के नुकसान, बढ़ते कर्ज, बिजली दरों में वृद्धि और पानी की कमी से जूझ रहे हैं। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य नहीं मिल रहा है और सरकार पर कृषि क्षेत्र की बिगड़ती बदहाली की अनदेखी करने का आरोप लगाया। अशोक ने पूछा, "किसानों को न तो उनकी फसलों का उचित दाम मिल रहा है और न ही उनके जीवन का कोई मोल है। क्या यही वह जन-हितैषी सरकार है, जिसका कांग्रेस ने वादा किया था?"
मुख्यमंत्री को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाते हुए अशोक ने आरोप लगाया कि उनका ध्यान किसानों की दुर्दशा दूर करने के बजाय कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रहे राजनीतिक घटनाक्रमों और नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों पर अधिक केंद्रित है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि किसानों के आंसुओं पर खड़ी राजनीति लंबे समय तक नहीं टिकेगी और दावा किया कि कोई भी कल्याणकारी गारंटी योजना कांग्रेस सरकार को इन मौतों पर उपजे जनता के आक्रोश से नहीं बचा पायेगी।
एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024 में पूरे भारत में कुल 10,546 किसानों और खेतिहर मजदूरों ने आत्महत्या की, जो 2023 में दर्ज किए गए 10,786 मामलों की तुलना में 2.22 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्शाती है। महाराष्ट्र में ऐसी मौतों की संख्या सबसे अधिक 3,824 दर्ज की गयी, इसके बाद कर्नाटक 2,971 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर रहा। मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु भी उन राज्यों में शामिल थे, जहां किसानों और खेतिहर मजदूरों के बीच आत्महत्या के मामले अधिक रहे।

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